बंगाल को मिला भाजपा का पहला मुख्यमंत्री, सुवेंदु अधिकारी ने ली शपथ, समारोह में पीएम मोदी हुए शामिल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वरिष्ठ भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी राज्य के पहले भाजपा के मुख्यमंत्री बन गए हैं। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने ममता बनर्जी की जगह ली है, जो 2011 से लगातार 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री पद पर रहीं।
भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए
इससे पहले शुक्रवार को सुवेंदु अधिकारी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधायक दल की बैठक में नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उनके नाम का प्रस्ताव रखा गया था। इसके साथ ही उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया था।
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए कई बड़े नेता
नई भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। यह दिन बंगाली कैलेंडर के अनुसार गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर पड़ा। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के अहम सदस्य और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
नंदीग्राम आंदोलन से बनाई बड़ी पहचान
सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के नंदीग्राम आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। इस आंदोलन को पश्चिम बंगाल में 24 वर्षों तक चली वाम मोर्चा सरकार के पतन और तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने की बड़ी वजह माना जाता है। हालांकि वर्ष 2019 में अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस के बीच मतभेद शुरू हो गए थे। इसके बाद उन्होंने 2021 में पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल होकर ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ पार्टी के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो गए। ममता बनर्जी कभी उन्हें अपना करीबी सहयोगी माना करती थीं।
सामूहिक नेतृत्व के आधार पर चलेगी सरकार
शपथ लेने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार “सामूहिक नेतृत्व” के सिद्धांत पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि सभी फैसले केवल मुख्यमंत्री स्तर पर केंद्रित नहीं होंगे, बल्कि मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों को भी निर्णय प्रक्रिया में बराबर भागीदारी दी जाएगी।