यूपीः क्या इस बार भी ठिठुरते होगी राज्य के प्राइमरी स्कूल के बच्चों की पढ़ाई?

प्राइमरी स्कूलों में स्वेटर वितरण का जायजा लेने के लिए गांव कनेक्शन की टीम ने राज्य के अलग-अलग ग्रामीण हिस्सों के सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इस पड़ताल में बहुत कम ही स्कूल ऐसे मिले, जहां पर स्वेटर वितरण समय से पूरा हो चुका है।

Daya SagarDaya Sagar   23 Nov 2019 8:46 AM GMT

यूपी के बाराबंकी जिले के बसारी गांव का प्राइमरी स्कूल। स्कूल के सामने घास के बड़े मैदान में सूरज की गुनगुनी धूप खिली है। अलग-अलग कक्षाओं के छात्र अलग-अलग समूहों में बैठे हुए हैं और स्कूल के अध्यापक उनकी कक्षाएं ले रहे हैं।

लगभग सौ छात्रों के बीच हमें कक्षा चार में पढ़ने वाले ज्ञान प्रकाश मिले। उन्होंने स्कूल के लाल चेक ड्रेस के नीचे एक पुराना स्वेटर पहना हुआ था। पूछने पर ज्ञान कहते हैं कि सुबह घर से स्कूल आते वक्त ठंड लगती है, इसलिए अंदर स्वेटर पहना है।

अपनी धीमी आवाज में ज्ञान प्रकाश ने बताया, "सर कहते हैं कि दो-तीन दिन में स्वेटर मिल जाएगा, लेकिन अभी तक नहीं मिला है।" शुभम के बगल में खड़े कक्षा एक के छोटेलाल भी उनकी हां में हां मिलाते हैं।

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में इस साल भी बच्चों को समय से स्वेटर नहीं मिल पाया है। सरकारी स्कूलों में स्वेटर बंटने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर, 2019 थी, जिसे बाद में बढ़ा कर 30 नवंबर कर दिया गया। लेकिन नवंबर के 23 दिन बीत जाने के बाद भी अधिकांश स्कूलों में अभी तक स्वेटर नहीं बंट पाया है।

ज्ञान प्रकाश को ठंड लगती है तो वह ड्रेस के नीचे स्वेटर पहन कर आते हैं। (फोटो- वीरेंद्र सिंह, गांव कनेक्शन)

इस संबंध में स्कूलों के प्रधानाचार्य शासन की तरफ से स्वेटर वितरण के संबंध में कोई भी सूचना नहीं आने की बात कर रहे हैं। वहीं जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस बार शासन की तरफ से स्वेटर वितरण के लिए एक नई प्रणाली का प्रयोग किया जा रहा, जिसकी वजह से दिक्कत हो रही है।

दरअसल हर साल विद्यालय के स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के पास स्वेटर वितरण की जिम्मेदारी होती थी। विद्यालय के प्रधानाचार्य स्थानीय स्तर पर ही एक विक्रेता का चयन कर स्वेटर का वितरण करते थे। हालांकि तब भी स्वेटर वितरण में विलंब संबंधी तमाम खबरें सामने आती थीं।

इसलिए इस बार शासन ने जिले स्तर पर स्वेटर वितरण करने का निर्णय लिया। इसके लिए हर जिले से एक बड़ी कंपनी को टेंडर के द्वारा चयनित कर स्वेटर वितरण की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है। स्वेटर वितरण की आखिरी तारीख बदल रही है और विद्यार्थी ठंड में ठिठुरते हुए पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

ठंड बढ़ रही है लेकिन स्कूलों में बच्चे अभी बिना स्वेटर के ही आ रहे हैं

बाराबंकी के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) वीपी सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया, "22 नवंबर तक पूरे जिले में सिर्फ 6 प्रतिशत स्कूलों में ही स्वेटर वितरण हो पाया है। बाकी स्कूलों में स्वेटर वितरण का कार्य जारी है।"

वीपी सिंह कहते हैं, "इस बार शुभम इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी को जिले के स्कूलों में स्वेटर बांटने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने अभी तक काफी धीमी चाल दिखलाई है। इसके लिए कंपनी को जिलाधिकारी के द्वारा नोटिस जारी कर उन्हें 25 नवंबर तक का समय दिया गया है। अगर 25 नवंबर तक स्वेटर नहीं बंट पाएगा तो कंपनी के खिलाफ जिला प्रशासन उचित कार्रवाई करेगी।"

बाराबंकी की तरह ही शाहजहांपुर के प्राथमिक विद्यालय, परशुरामपुर में भी हमें बाहर चलती हुई कक्षाएं मिली। इस संबंध में पूछने पर स्कूल की अध्यापिका पुष्पलता वर्मा ने बताया, "अभी ठंड की शुरुआत है। कुछ बच्चों के पास पुराना स्वेटर है, लेकिन कुछ बच्चों के पास नहीं है। इसलिए हम एहतिहातन बच्चों को धूप में ही बैठाकर पढ़ा रहे हैं, ताकि किसी को ठंड ना लगे।"

शाहजहांपुर के एक स्कूल में धूप में पढ़ाई करते बच्चे (फोटो- रामजी मिश्रा, गांव कनेक्शन)

उन्होंने बताया कि विद्यालय की तरफ से छात्रों की संख्या और उनके स्वेटर के साइज विभाग को भेज दिए गए हैं। लेकिन अभी तक विभाग की तरफ से स्वेटर वितरण की कोई भी सूचना नहीं मिली है।

हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "हर साल बच्चों को स्वेटर बांटे जाते हैं। अभी उतनी ठंड नहीं पड़ रही है। जिनको ठंड लग रही है, वे अपना पुराना स्वेटर पहन के आ रहे हैं।"

वहीं बाराबंकी के अखईपुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य जगदीश चंद्र सिंह इस तर्क को सहमति देने से इनकार करते हैं। वह कहते हैं कि जिन बच्चों को पिछले साल स्वेटर मिला उनका तो ठीक है लेकिन नए एडमिशन लेने वाले बच्चों का क्या?

जगदीश सिंह कहते हैं, "हमारा स्कूल ग्रामीण इलाके में है, इसलिए स्वाभाविक है कि सुबह के समय बच्चों को ठंड लगे। जिन बच्चों के पास पुराना स्वेटर है, वे तो पहन कर आ रहे हैं। लेकिन सबसे अधिक दिक्कत छोटे बच्चों को हो रही है, जिन्होंने इस साल पहली कक्षा में दाखिला लिया है। उनके पास ड्रेस वाला पुराना भी स्वेटर नहीं, जिसे वे पहन कर आ सकें।"

गोरखपुर के एक प्राथमिक विद्यालय में प्रभारी प्रधानाचार्य के पद पर तैनात एक शिक्षक ने नाम ना छापने की शर्त पर गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "प्रशासन ने स्वेटर वितरण की जिम्मेदारी खुद लेकर शिक्षकों को परोक्ष रुप से फायदा ही पहुंचाया है। इससे शिक्षक स्वेटर उठाने से लेकर उसके वितरण और रजिस्टर बनाने तक की तमाम कार्यों से छुटकारा मिला है। लेकिन इससे छात्रों का नुकसान हो रहा है। पिछली बार हमारे पास जिम्मेदारी थी तो हमने 15 नवंबर तक स्वेटर बांट दिया था। लेकिन इस बार देखिए, नवंबर खत्म होने वाले है लेकिन स्वेटर कहां है, इसका कुछ पता नहीं।"

रिपोर्टिंग सहयोग/इनपुट- ललितपुर से अरविंद सिंह परमार, बाराबंकी से वीरेंद्र सिंह, शाहजहांपुर से रामजी मिश्रा, कानपुर से असलम खान और सीतापुर से मोहित शुक्ला


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