जुलाई में महंगाई का क्या रहा हाल? थोक दाम घटे, लेकिन खुदरा महंगाई बढ़ी, जानिए आपकी जेब पर असर
महंगाई को लेकर जुलाई के आंकड़ों ने एक जैसी तस्वीर नहीं दिखाई है। एक तरफ़ थोक बाजार में कीमतों का दबाव जून के मुकाबले थोड़ा कम हुआ, तो दूसरी तरफ़ आम लोगों की रोज़मर्रा की खरीदारी से जुड़ी खुदरा महंगाई बढ़ गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर 9.78% रही, जबकि जून में यह 9.87% थी। यानी थोक महंगाई में सिर्फ़ 0.09 प्रतिशत अंक की मामूली कमी दर्ज की गई।
वहीं, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई 4.45% रही, जबकि जून में यह 4.38% थी। खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई भी जून के 5.32% से बढ़कर जुलाई में 5.52% हो गई। इसलिए थोक महंगाई में आई मामूली नरमी को सीधे तौर पर आम लोगों के लिए बड़ी राहत का संकेत मानना सही नहीं होगा।
जुलाई में थोक महंगाई कितनी रही?
सरकार के अनुसार, जुलाई 2026 में देश की थोक महंगाई दर 9.78% रही। जून में यह 9.87% थी। जुलाई में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक 110.0 रहा, जबकि जून में यह 110.2 था। हालाँकि, इसमें आई कमी काफी छोटी है। इसलिए इसे महंगाई में बड़ी गिरावट के बजाय थोक स्तर पर मामूली नरमी कहना ज्यादा उचित होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि जुलाई का WPI आंकड़ा अभी अस्थायी यानी प्रोविजनल है। सरकार ने इसे 78.55% के वेटेड रिस्पॉन्स रेट के आधार पर जारी किया है, इसलिए आगे इसमें संशोधन संभव है।
ईंधन और बिजली की महंगाई सबसे ज्यादा
थोक मूल्य सूचकांक के प्रमुख समूहों पर नज़र डालें तो जुलाई में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई 8.52% रही। वहीं ईंधन और बिजली समूह में महंगाई दर 20.05% और विनिर्मित उत्पादों में 8.29% रही। जून में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई 7%, ईंधन और बिजली की 27.41% और विनिर्मित उत्पादों की 7.48% थी। यानी जुलाई में ईंधन और बिजली की महंगाई में उल्लेखनीय कमी आई, जबकि प्राथमिक वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों में महंगाई बढ़ी।
खाद्य कीमतों का दबाव अभी भी बना हुआ है
कुल थोक महंगाई में मामूली गिरावट के बावजूद खाद्य क्षेत्र से राहत वाली तस्वीर नहीं आई है। सरकार के थोक खाद्य सूचकांक में जुलाई की सालाना महंगाई दर 6.65% रही, जबकि जून में यह 6.14% थी। इसका मतलब है कि थोक महंगाई की कुल दर भले ही थोड़ी नीचे आई हो, लेकिन खाद्य वस्तुओं से जुड़े दामों का दबाव जुलाई में बढ़ा है। सरकार के मुताबिक, जुलाई में WPI महंगाई को प्रभावित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में खनिज तेल, खाद्य वस्तुएँ, मूल धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएँ, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण तथा रसायन और रासायनिक उत्पादों का विनिर्माण शामिल रहे। यानी थोक कीमतों पर असर केवल खाने-पीने की चीज़ों से नहीं पड़ा, बल्कि ईंधन, धातु और औद्योगिक उत्पादों से जुड़े क्षेत्रों ने भी इसमें भूमिका निभाई।
खुदरा महंगाई में क्यों बढ़ा दबाव?
खुदरा महंगाई आम लोगों की रोज़मर्रा की खरीदारी से ज्यादा सीधे जुड़ी होती है। जुलाई में इसकी दर 4.45% रही, जबकि जून में यह 4.38% थी। वहीं जुलाई में खाद्य महंगाई 5.52% रही, जो जून के 5.32% से ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई 4.84% और शहरी क्षेत्रों में 3.96% रही। वहीं खाद्य महंगाई ग्रामीण क्षेत्रों में 5.79% और शहरी क्षेत्रों में 5.05% दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि जुलाई में खास तौर पर खाद्य कीमतों का दबाव खुदरा महंगाई के लिए अहम बना रहा।
नई थोक महंगाई सीरीज़ में क्या बदला?
जुलाई का थोक महंगाई आंकड़ा 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई सीरीज़ के तहत जारी हुआ है। सरकार ने पुरानी 2011-12 आधार वाली सीरीज़ की जगह नई सीरीज़ लागू की है। नई व्यवस्था में थोक मूल्य सूचकांक की टोकरी को ज्यादा व्यापक बनाया गया है। वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 की गई है। इसके अलावा बिजली समूह में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों के साथ परमाणु बिजली को भी शामिल किया गया है। नई सीरीज़ में प्राथमिक वस्तुओं का भार करीब 22.76%, ईंधन और बिजली का 14.11% और विनिर्मित उत्पादों का 63.13% है।
जुलाई के आंकड़ों के साथ सरकार ने मई 2026 के थोक मूल्य सूचकांक के अंतिम आंकड़े में भी बदलाव किया। मई का सभी वस्तुओं का सूचकांक शुरुआती 109.9 से संशोधित होकर 110.1 हो गया। इसके साथ मई की थोक महंगाई दर भी शुरुआती 9.68% से संशोधित होकर 9.88% हो गई।
क्या महंगाई से राहत के संकेत हैं?
जुलाई के आंकड़ों से इतना जरूर पता चलता है कि थोक स्तर पर महंगाई में मामूली नरमी आई है। लेकिन इसे आने वाले दिनों में आम लोगों के लिए महंगाई से राहत की निश्चित शुरुआत मानना जल्दबाज़ी होगी। इसकी वजह यह है कि इसी दौरान खुदरा महंगाई 4.45% और खाद्य महंगाई 5.52% तक पहुँच गई। साथ ही, थोक खाद्य सूचकांक की महंगाई भी जून के 6.14% से बढ़कर जुलाई में 6.65% हो गई।