Swadesh Darshan Scheme: आदिवासी क्षेत्रों में शुरू किए जाएँगे 1,000 नए होमस्टे

Gaurav Rai | Jan 31, 2026, 14:12 IST
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आदिवासियों की संस्कृति के बारे में लोगों को जानने-समझने और वहाँ के लोगों को रोज़गार देने के लिए एक नई योजना शुरू की गई है, ये है Swadesh Darshan Scheme। इसमें आदिवासी गाँवों में 1,000 होमस्टे बनाए जाएँगे।

<p>आदिवासी क्षेत्रों में 1,000 होमस्टे<br></p>

सदियों से आदिवासी ऐसे गाँवों में रहते आ रहे हैं, जो खूबसूरत तो हैं ही साथ ही न जाने उनकी कितनी ख़ासियतें भी हैं, लेकिन अभी भी वो बाहरी दुनिया से कटे हुए हैं, लेकिन अब आप भी उनके रहन-सहन, खानपान और संस्कृति को करीब से जान सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और गाँव आत्मनिर्भर बनेंगे।



इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में 1,000 होमस्टे बनाने की मंज़ूरी दी है। यह योजना स्वदेश दर्शन योजना के तहत लागू की जाएगी। इसकी जानकारी केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में दी।



प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान से जुड़ी पहल

यह योजना प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य आदिवासी गांवों का विकास करना और उन्हें पर्यटन के राष्ट्रीय नक़्शे पर लाना है। सरकार चाहती है कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन और परंपराओं को सहेजते हुए पर्यटन से सीधे तौर पर लाभ उठा सके। होमस्टे के ज़रिये पर्यटक आदिवासी इलाकों में रहकर वहां की जीवनशैली को समझ सकेंगे। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोज़गार के नए अवसर भी मिलेंगे।



होमस्टे के लिए कितना लोन मिलेगा ?

  • नया होमस्टे बनाने के लिए प्रति यूनिट ₹5 लाख तक की सहायता दी जाएगी।
  • पहले से मौजूद होमस्टे के नवीनीकरण या सुधार के लिए ₹3 लाख तक की मदद मिलेगी।
  • गांव की सामुदायिक ज़रूरतों, जैसे स्वच्छता, आधारभूत सुविधाएं और सार्वजनिक उपयोग के कामों के लिए ₹5 लाख का प्रावधान किया गया है।

जानिए क्या है स्वदेश दर्शन 2.0?

सरकार ने अपनी पुरानी स्वदेश दर्शन योजना को अब स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में नया रूप दिया है। इस नए चरण का मक़सद पर्यटन को ज़िम्मेदार और टिकाऊ बनाना है। यानी ऐसा पर्यटन, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और स्थानीय समुदाय को अधिकतम लाभ मिले। स्वदेश दर्शन 2.0 में पर्यटकों की सुविधाओं, स्थानीय बुनियादी ढांचे और गंतव्य विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंत्रालय अब ग्रामीण और आदिवासी इलाकों को एक संपूर्ण पर्यटन उत्पाद के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इन होमस्टे सुविधाओं को इंक्रेडिबल इंडिया बेड एंड ब्रेकफास्ट वर्गीकरण के तहत प्रमाणित भी किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को गुणवत्ता और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकें।



ग्रामीण सर्किट और सतत पर्यटन पर ज़ोर

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पर्यटन मंत्रालय ने ग्रामीण सर्किट को एक विशेष पर्यटन थीम के रूप में पहचाना है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा पर्यटन विकसित करना है, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखे।



गाँवों का होगा विकास?

सरकार का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी पर्यटन से गाँवों की अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी। होमस्टे, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प, खान-पान और सांस्कृतिक गतिविधियों के ज़रिये बड़ी संख्या में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। कुल मिलाकर, 1,000 आदिवासी होमस्टे की यह योजना न सिर्फ़ पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि आदिवासी इलाकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक अहम क़दम साबित हो सकती है।



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