रात 11 बजे के बाद मोबाइल चलाने वाली महिलाओं में 15% ज़्यादा मिला मोटापे का स्तर, रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला कनेक्शन
क्या आपकी रात भी “बस एक रील और” से शुरू होकर 12 या 2 बजे खत्म होती है? अगर हाँ, तो देर रात तक मोबाइल चलाने की इस आदत को हल्के में न लें। एक रिसर्च में रात 11 बजे के बाद ज़्यादा समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मोटापे का स्तर क़रीब 15% ज़्यादा पाया गया है। आजकल स्वस्थ रहने के लिए लोग डाइट पर ध्यान देते हैं, एक्सरसाइज़ करते हैं और खाने-पीने की आदतों में बदलाव करते हैं। लेकिन दिनभर की हेल्दी रूटीन के बाद अगर रात का काफ़ी समय मोबाइल स्क्रीन देखते हुए गुज़र रहा है, तो नींद और बॉडी क्लॉक पर इसका असर पड़ सकता है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में महिलाओं के मोबाइल यूज़ और हेल्थ को लेकर हुई एक रिसर्च में देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने और हेल्थ से जुड़े कई फ़ैक्टर्स को देखा गया। इस रिसर्च में ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. गौरव मजुमदार और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की टीम भी शामिल रही।
रात 11 बजे के बाद मोबाइल यूज़ और मोटापे के बीच दिखा कनेक्शन
रिसर्च में सामने आया कि रात 11 बजे के बाद ज़्यादा समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मोटापे का स्तर क़रीब 15% ज़्यादा था। रिसर्च में केवल वज़न को ही नहीं देखा गया, बल्कि पीसीओएस, ओबेसिटी और मेंटल स्ट्रेस जैसे फ़ैक्टर्स को भी शामिल किया गया। यानी रात में लंबे समय तक मोबाइल चलाने की आदत सिर्फ़ स्क्रीन टाइम बढ़ाने तक सीमित नहीं है। देर रात तक मोबाइल चलाने के साथ नींद का समय लगातार कम हो रहा है, तो इसका असर अगले दिन की एक्टिविटी, खाने के समय और पूरे लाइफ़स्टाइल पर पड़ है। इसलिए रात में मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत को सिर्फ़ मनोरंजन से जोड़कर देखने के बजाय अपनी नींद और हेल्थ रूटीन से जोड़कर देखना ज़रूरी है।
रात में मोबाइल चलाने से बॉडी क्लॉक पर क्यों पड़ सकता है असर?
हमारे शरीर में एक नैचुरल क्लॉक होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर को बताती है कि कब सोना है, कब जागना है और दिन के अलग-अलग समय पर शरीर की गतिविधियाँ कैसे चलनी हैं। रात में लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखते रहने से इस नैचुरल क्लॉक पर असर पड़ सकता है। ख़ासकर स्क्रीन से निकलने वाली लाइट शरीर में मेलाटोनिन के रिलीज़ को प्रभावित करती हैं। मेलाटोनिन को आमतौर पर स्लीप हार्मोन कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर को सोने के लिए तैयार करने में मदद करता है। अगर रात में नींद देर से आती है या बार-बार टूटती है, तो अगले दिन थकान और दिनचर्या में बदलाव हो सकता है। लंबे समय तक ख़राब नींद रहने पर खाने की आदतों, फ़िज़िकल एक्टिविटी और पूरे लाइफ़स्टाइल पर भी असर पड़ता है।
सिर्फ़ मोबाइल नहीं, डिनर का टाइम भी है इम्पॉर्टेंट
देर रात तक मोबाइल चलाने के साथ अगर डिनर भी देर से होता है, तो स्लीप रूटीन और ज़्यादा बिगड़ जाता है। कई लोग खाना खाने के तुरंत बाद बेड पर चले जाते हैं। कोशिश करें कि डिनर सोने से क़रीब 2-3 घंटे पहले हो। इससे शरीर को खाना डाइजेस्ट करने के लिए कुछ समय मिल जाता है और सोने की रूटीन भी बेहतर रखने में मदद मिलती है। रात में बहुत देर तक जागने की आदत होने पर अक्सर खाने का समय भी बीत जाता है। ऐसे में लेट-नाइट स्नैकिंग की आदत भी बन सकती है, ख़ासकर जब व्यक्ति लंबे समय तक फ़ोन पर रील्स या वीडियोज़ देख रहा हो।
हेल्दी लाइफ़स्टाइल में स्लीप को भी दें जगह
अक्सर जब वज़न और हेल्थ की बात होती है, तो डाइट और एक्सरसाइज़ पर सबसे ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। लेकिन अच्छी नींद भी हेल्दी लाइफ़स्टाइल का ज़रूरी हिस्सा है। अगर आपकी रात का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन के साथ गुज़रता है, तो शुरुआत छोटे बदलावों से की जा सकती है। सोने से कुछ समय पहले मोबाइल को बेड से दूर रखें, रात में अनावश्यक स्क्रीन टाइम कम करें और रोज़ लगभग एक ही समय पर सोने की कोशिश करें। रोज़ देर से सोने की आदत आपकी पूरी रूटीन को प्रभावित करती है। इसलिए हेल्दी रहने के लिए डाइट और एक्सरसाइज़ के साथ अपनी नींद और बॉडी क्लॉक का भी ध्यान रखें।