नितिन गडकरी-योगी की बैठक में बड़ा फ़ैसला, ₹1.94 लाख करोड़ के निवेश से बदलेगी यूपी में सड़क नेटवर्क की तस्वीर, जानिए पूरी योजना

Gaon Connection | Jul 13, 2026, 16:59 IST
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़क परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने समीक्षा बैठक की। 2014 के बाद प्रदेश में 10,204 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत हुए, जिनमें 9,329 किमी का निर्माण पूरा हो चुका है। अयोध्या, जेवर, प्रयागराज, सोनौली समेत कई प्रमुख सड़क परियोजनाओं, रिंग रोड, बाईपास और नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर भी चर्चा हुई। सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर भी ज़ोर दिया गया।

बेहतर सड़कें किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। जहाँ सड़क संपर्क मज़बूत होता है, वहाँ उद्योग, व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर भी तेज़ी से बढ़ते हैं। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क नेटवर्क का विस्तार इसी दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। अब कई नई परियोजनाओं के ज़रिये प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को आधुनिक सड़क संपर्क से जोड़ने की तैयारी है।



इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार की कई मौजूदा और प्रस्तावित परियोजनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में सड़क निर्माण की गति बढ़ाने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की सड़क परियोजनाओं को भी प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया गया।



2014 के बाद 10,204 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2014 के बाद उत्तर प्रदेश में 10,204 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ स्वीकृत की गईं, जिनमें से 9,329 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच 606 किलोमीटर नई परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली, जबकि 1,010 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण पूरा किया गया।



प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर अब तक लगभग 1.94 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। इनमें वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 23,445 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली टास्क फ़ोर्स, ग्रीनफ़ील्ड परियोजनाओं के लिए रॉयल्टी मुक्त मिट्टी की व्यवस्था, रिंग रोड और बाईपास परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण लागत में राज्य सरकार की भागीदारी तथा सरकारी भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराने जैसे फ़ैसलों से परियोजनाओं की रफ़्तार बढ़ी है।



निर्माणाधीन प्रमुख परियोजनाओं में लगभग 13,980 करोड़ रुपये की मथुरा-बरेली-सीतारगंज फोरलेन परियोजना, 5,904 करोड़ रुपये की आगरा-अलीगढ़ फोरलेन परियोजना, आगरा-ग्वालियर-झाँसी-नागपुर आर्थिक गलियारा, कानपुर रिंग रोड, जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को जोड़ने वाली छह लेन सड़क और मुरादाबाद-काशीपुर चार एवं छह लेन परियोजना शामिल हैं। इनके पूरा होने से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच संपर्क और बेहतर होगा।



अयोध्या, प्रयागराज, सोनौली और नेपाल सीमा तक बेहतर होगी कनेक्टिविटी

बैठक में पूर्वांचल, मध्य उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड की सड़क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। सोनौली-गोरखपुर फोरलेन, गाज़ीपुर-बलिया-बिहार सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रयागराज सदर्न रिंग रोड और प्रयागराज-जौनपुर-आज़मगढ़-दोहरीघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज़ी से काम चल रहा है। इनके पूरा होने से भारत-नेपाल सीमा, बौद्ध पर्यटन सर्किट, पूर्वांचल और बिहार के बीच संपर्क मज़बूत होगा, वहीं व्यापार और माल परिवहन को भी गति मिलेगी।



अयोध्या रिंग रोड बनने से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अन्य धार्मिक स्थलों तक आवागमन आसान होगा तथा शहर में ट्रैफ़िक का दबाव भी घटेगा। बैठक में रामवन गमन मार्ग, राम जानकी मार्ग और 84 कोसी परिक्रमा मार्ग की प्रगति की भी समीक्षा हुई। इनके पूरा होने से अयोध्या, चित्रकूट, प्रयागराज, कौशांबी और नेपाल के जनकपुर तक सड़क संपर्क और बेहतर होगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।



समीक्षा के दौरान बरेली बाईपास में पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी उठा। इस पर नितिन गडकरी ने कहा कि पेड़ों को काटने के बजाय आधुनिक तकनीक से उनका प्रत्यारोपण किया जाना चाहिए, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकें।



नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, नए हाईवे और रिंग रोड परियोजनाओं पर भी बनी सहमति

  • बैठक में अयोध्या-गोंडा और रीवा-राँची फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्गों की डीपीआर तैयार होने की जानकारी दी गई। इसके अलावा शामली से गोरखपुर तक लगभग 742 किलोमीटर लंबे फोरलेन एक्सेस कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग की भी समीक्षा हुई। माना जा रहा है कि इससे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क और तेज़ होगा तथा औद्योगिक निवेश, कृषि और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
  • देवा-फ़तेहपुर फोरलेन, वृंदावन बाईपास, कसया-पनियहवा राष्ट्रीय राजमार्ग, हड़िया चौराहा-करमैनी घाट मार्ग, कोदरकूट-बेला चौक मार्ग, कर्नलगंज और पश्चिमी गोंडा बाईपास तथा कानपुर के रामादेवी से गोल चौराहा तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर सहित कई परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
  • बैठक में बताया गया कि 267 किलोमीटर लंबी 10 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ निविदा प्रक्रिया में हैं, जबकि तीन अन्य परियोजनाओं पर जल्द काम शुरू होगा। केंद्रीय सड़क निधि (सीआरआईएफ) के तहत स्वीकृत परियोजनाओं और वृंदावन व प्रयागराज में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
  • इसके अलावा प्रयागराज में नैनी पुल के समानांतर नए पुल, प्रस्तावित नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त राज्य मार्गों के पुनर्निर्माण की स्थायी नीति, दो लेन या उससे कम क्षमता वाले मार्गों के उन्नयन, लखनऊ से सभी ज़िलों को चार लेन संपर्क, 33 ज़िला मुख्यालयों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने, मुरादाबाद, अलीगढ़, देवीपाटन, झाँसी, मिर्ज़ापुर और सहारनपुर में रिंग रोड तथा फ़र्रुखाबाद, श्रावस्ती और महराजगंज में बाईपास निर्माण जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर भी विशेष ज़ोर दिया गया। राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित डिज़ाइन, ब्लैक स्पॉट में सुधार, आधुनिक संकेतक व्यवस्था और सड़क सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई। साथ ही सड़क निर्माण के साथ दुर्घटनाएँ कम करने के उपायों पर समान रूप से ध्यान देने पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क से निवेश, उद्योग, कृषि, पर्यटन, व्यापार और रोज़गार को नई गति मिलेगी तथा उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुँचाने में मदद मिले

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