धान सीजन से पहले पंजाब की नहरों में छोड़ा गया 21000 क्यूसेक पानी, CM मान ने की ट्यूबवेल का इस्तेमाल कम करने की अपील
पंजाब में धान सीजन से पहले सिंचाई को लेकर सरकार ने बड़ा और समय से पहले फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नहरों में 21 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने की घोषणा करते हुए किसानों से अपील की है कि वे ट्यूबवेल पर निर्भरता कम करें और नहर आधारित सिंचाई को अपनाएं। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ किसानों को समय पर पानी मिलेगा, बल्कि भूजल संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
समय से पहले नहरों में पानी
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संगरूर के सतौज गांव में ग्रामीणों से बातचीत के दौरान बताया कि इस बार 1 मई से ही नहरों में पानी छोड़ दिया गया है, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ है। धान की बुवाई से पहले ही सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का मकसद किसानों को सुविधा देना और खेती को आसान बनाना है।
ट्यूबवेल को इस्तेमाल कम करने की सलाह
सीएम ने कहा कि लगातार ट्यूबवेल के इस्तेमाल से भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जो आने वाले समय में बड़ा संकट बन सकता है। उन्होंने किसानों से नहरों के पानी को प्राथमिकता देने और भूजल के अनावश्यक दोहन से बचने की अपील की। सरकार का फोकस टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना है।
सिंचाई ढांचे में निवेश और नई पहल
सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया है। मार्च 2026 से अब तक करीब 6,700 करोड़ रुपये खर्च कर 14,000 किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन और वाटरकोर्स तैयार किए गए हैं। धान सीजन से पहले 4,000 किलोमीटर अतिरिक्त वाटरकोर्स और 3,000 किलोमीटर पाइपलाइन शुरू करने की योजना है। इसके साथ ही नहरों के किनारे हर 20 मीटर पर भूजल रिचार्ज पॉइंट बनाए जा रहे हैं। वहीं, किसानों की सुरक्षा के लिए खेतों में गुजरने वाली हाई-टेंशन बिजली लाइनों को भूमिगत करने का पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया जा रहा है, जिससे खेती में जोखिम कम होगा और काम आसान बनेगा।