राजस्थान के इन तीनों बांधों का ₹225 करोड़ की लागत से होगा कायाकल्प, 50 साल बढ़ जाएगी लाइफ, जानें क्या-क्या होगा काम?
राजस्थान सरकार ने चंबल नदी पर बने तीन प्रमुख बांधों कोटा बैराज, राणा प्रताप सागर बांध और जवाहर सागर बांध के बड़े अपग्रेडेशन की शुरुआत कर दी है। डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (DRIP-II) के तहत इनके कायाकल्प पर करीब 225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना का मकसद हाड़ौती क्षेत्र में जल प्रबंधन, सिंचाई और बिजली उत्पादन को मजबूत करना है।
कोटा बैराज: सभी गेट बदलेंगे, 50 साल बढ़ेगी उम्र
1960 में लाडपुरा तहसील में बने कोटा बैराज में अब तक कोई बड़ा हाइड्रो-मैकेनिकल बदलाव नहीं हुआ है। इसके 19 रेडियल गेट और दो स्लूइस गेट खराब हो चुके हैं और स्लूइस गेट कई वर्षों से काम नहीं कर रहे हैं। अब अपग्रेड के तहत सभी 19 रेडियल गेट, दो स्लूइस गेट, स्टॉप लॉग गेट, गैंट्री क्रेन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम बदले जाएंगे। काम के दौरान भी जल स्तर 854.50 फीट बनाए रखा जाएगा, ताकि कोटा और बूंदी जिलों में पेयजल और सिंचाई की सप्लाई प्रभावित न हो।
अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग (कोटा) सुनील गुप्ता के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में कोटा बैराज के सभी गेट नए लगाए जाएंगे। यह गेट इस तरह के मेटल से बनेंगे, जिससे बैराज की लाइफ करीब 50 साल बढ़ जाएगी।
राणा प्रताप सागर बांध: 172 MW क्षमता, बिना रुकावट होगा काम
चित्तौड़गढ़ में स्थित राणा प्रताप सागर बांध चंबल परियोजना का प्रमुख जल भंडारण ढांचा है, जिसकी बिजली उत्पादन क्षमता 172 मेगावाट है। यहां अपग्रेड के तहत 17 वर्टिकल क्रेस्ट गेट, स्लूइस गेट, स्टॉप लॉग गेट और गैंट्री क्रेन बदले जाएंगे, साथ ही स्की-जंप बकेट की मरम्मत भी होगी। यह बांध 18,408 क्यूमेक्स तक बाढ़ निकासी संभालता है। खास बात यह है कि ये सभी काम बिजली उत्पादन और जल आपूर्ति को बिना प्रभावित किए किए जाएंगे।
जवाहर सागर बांध: 99 MW पावर, डाउनस्ट्रीम फ्लो कंट्रोल मजबूत होगा
बूंदी के तलेरा ब्लॉक में स्थित जवाहर सागर बांध 1972 में बना था। इसकी ऊंचाई करीब 33.66 मीटर है और यह 99 मेगावाट बिजली उत्पादन करता है। इस बांध में 12 रेडियल गेट और 67.11 एमसीयूएम की जल भंडारण क्षमता है, जो चंबल नदी के डाउनस्ट्रीम फ्लो को नियंत्रित करता है। अपग्रेड के बाद इसकी कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।
सिंचाई और पानी की सुरक्षा बढ़ेगी
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के अनुसार, सभी कार्य निर्धारित समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरे किए जाएंगे। इस अपग्रेड से इन महत्वपूर्ण बांधों की आयु बढ़ेगी, दीर्घकालिक सिंचाई और पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित होगी और हाड़ौती क्षेत्र में शहरी विकास को भी मजबूती मिलेगी।