Onion Prices: ₹35 किलो की सरकारी प्याज़ पर उठे सवाल, कहीं छोटी तो कहीं सड़ी प्याज़ की शिकायत; NCCF करेगी जाँच
प्याज़ की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार बफर स्टॉक से कम दाम पर प्याज़ बेचकर लोगों को राहत देने की कोशिश कर रही है। देश के 19 शहरों में ₹35 प्रति किलो की दर से प्याज़ उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन सस्ती प्याज़ लेने पहुँचे कुछ ग्राहकों ने इसकी गुणवत्ता को लेकर शिकायत की है। कुछ बिक्री केंद्रों पर प्याज़ का आकार छोटा होने और कुछ प्याज़ के खराब या सड़े होने की बात सामने आई है। ऐसे में महँगी प्याज़ के बीच सस्ते विकल्प के तौर पर शुरू की गई सरकारी बिक्री में अब गुणवत्ता का सवाल भी उठ रहा है।
सरकार के मुताबिक, 24 अगस्त 2026 से NAFED और NCCF के ज़रिए बफर स्टॉक की प्याज़ की बिक्री शुरू की गई थी। इसका मक़सद बाज़ार में प्याज़ की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत देना है। 1 सितंबर तक बफर स्टॉक से करीब 669 मीट्रिक टन प्याज़ बेची जा चुकी थी। इसमें 446 मीट्रिक टन प्याज़ खुदरा चैनल और 223 मीट्रिक टन थोक चैनल के ज़रिए उपभोक्ताओं और कारोबारियों तक पहुँची।
19 शहरों में ₹35 किलो प्याज़ की बिक्री
केंद्र सरकार ने प्याज़ की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए बफर स्टॉक का इस्तेमाल बढ़ाया है। इसके तहत 19 शहरों में ₹35 प्रति किलो की दर से प्याज़ उपलब्ध कराई जा रही है। NAFED और NCCF को इसके वितरण की ज़िम्मेदारी दी गई है। दिल्ली-एनसीआर में भी इस पहल के तहत प्याज़ की बिक्री की जा रही है। राजधानी दिल्ली में NAFED और NCCF के माध्यम से अलग-अलग बिक्री केंद्रों पर प्याज़ उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, नोएडा और ग़ाज़ियाबाद में भी सरकारी प्याज़ की बिक्री के केंद्र बनाए गए हैं।
महँगी प्याज़ के बीच सस्ते विकल्प की मांग
खुले बाज़ार में प्याज़ की कीमतें ऊँची होने के कारण सरकारी बिक्री केंद्रों पर लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। आम उपभोक्ता के लिए ₹35 किलो की दर बाज़ार भाव के मुक़ाबले काफ़ी कम है। यही वजह है कि कम दाम पर प्याज़ लेने के लिए बिक्री केंद्रों पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है। सरकार का कहना है कि बफर स्टॉक से प्याज़ जारी करने का उद्देश्य बाज़ार में इसकी उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। प्रमुख मंडियों में अतिरिक्त आपूर्ति पहुँचने से कीमतों में नरमी लाने में भी मदद मिल सकती है।
बिक्री केंद्रों पर गुणवत्ता को लेकर शिकायत
सस्ती प्याज़ मिलने के बावजूद कुछ ग्राहकों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध कुछ प्याज़ के छोटे आकार और कुछ प्याज़ के खराब होने की शिकायत सामने आई है। उपभोक्ताओं की परेशानी यह भी है कि उन्हें खरीदने से पहले प्याज़ को छाँटने का पर्याप्त विकल्प नहीं मिल रहा है। ऐसे में कम कीमत पर प्याज़ उपलब्ध होने के बावजूद ग्राहकों को कुछ ऐसी प्याज़ भी खरीदनी पड़ रही है, जिसे इस्तेमाल करने से पहले छाँटना पड़ सकता है। महँगाई के दौर में उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि वे कम कीमत के कारण सरकारी बिक्री केंद्रों का रुख कर रहे हैं।
शिकायत के बाद NCCF कराएगी जाँच
सरकारी प्याज़ की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायत का मामला NCCF के संज्ञान में भी आया है। NCCF की प्रबंध निदेशक एनिस जोसेफ चंद्रा ने मामले की जाँच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि इस बार बेमौसम बारिश का असर प्याज़ की गुणवत्ता पर पड़ा है। अधिकारी के मुताबिक, इससे पहले इस तरह की गुणवत्ता संबंधी शिकायत उनके पास नहीं आई थी। मीडिया की ओर से मामला सामने लाए जाने के बाद इसकी जाँच कराने की बात कही गई है। अब जाँच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिक्री केंद्रों तक पहुँची खराब प्याज़ की मात्रा कितनी है और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या रही।
बफर स्टॉक से लगातार बढ़ाई जा रही आपूर्ति
सरकार प्याज़ के बफर स्टॉक का इस्तेमाल सिर्फ़ कीमतों पर नियंत्रण के लिए ही नहीं, बल्कि बाज़ार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी कर रही है। प्याज़ की कीमतों में तेज़ी आने पर बफर स्टॉक से अतिरिक्त मात्रा बाज़ार में उतारने से आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, बफर स्टॉक की बिक्री को कई शहरों तक विस्तार दिया गया है। दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े उपभोक्ता बाज़ारों में भी इसकी आपूर्ति बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है।
सस्ती प्याज़ के साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी
सरकारी बिक्री का मक़सद आम लोगों को महँगाई से राहत देना है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ़ कम कीमत ही पर्याप्त नहीं है। प्याज़ की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए शिकायतों की जाँच के बाद यह देखना अहम होगा कि सरकारी बफर से निकलने वाली प्याज़ बिक्री केंद्रों तक किस स्थिति में पहुँच रही है और ख़राब प्याज़ को उपभोक्ताओं तक पहुँचने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है। सरकार के लिए चुनौती अब दोहरी है एक तरफ़ प्याज़ की बढ़ती कीमतों पर क़ाबू रखना और दूसरी तरफ़ कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही प्याज़ की गुणवत्ता सुनिश्चित करना। अगर दोनों मोर्चों पर असरदार तरीके से काम होता है, तभी बफर स्टॉक की यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत दे पाएगी।