351 बोरियों में छिपाया था 56 किलो मेथाम्फेटामाइन, मक्के की खेप बनाकर सऊदी अरब भेजने की कोशिश, न्हावा शेवा पोर्ट पर डीआरआई ने पकड़ा
मक्का खेत से निकलकर मंडी, कारोबारी, परिवहन और फिर निर्यात के ज़रिए दूसरे देशों तक पहुँचता है। इसी लंबी आपूर्ति शृंखला का इस्तेमाल कथित तौर पर नशीले पदार्थ की तस्करी के लिए करने की कोशिश का मामला सामने आया है। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह पर सऊदी अरब भेजी जा रही मक्के की एक खेप से करीब 56 किलोग्राम मेथाम्फेटामाइन बरामद किया है।
डीआरआई ने यह कार्रवाई 16 और 17 अगस्त को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की। एजेंसी के मुताबिक, निर्यात खेप में कुल 351 बोरियाँ थीं। इनमें से एक बोरी में मक्के के साथ मेथाम्फेटामाइन पाउडर मिलाकर छिपाया गया था। नशीले पदार्थ को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज़ अधिनियम, 1985 के तहत जब्त किया गया है।
किसान की उपज नहीं, निर्यात शृंखला में हुई तस्करी की कोशिश
इस मामले में यह साफ़ समझना जरूरी है कि डीआरआई की कार्रवाई किसान या खेत में उगाए गए मक्के में मिलावट से जुड़ी नहीं है। मामला निर्यात के लिए तैयार की गई एक विशेष खेप में नशीला पदार्थ छिपाने का है। किसानों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खेत से निकलने के बाद उनकी उपज कई हाथों से होकर आगे बढ़ती है। मंडी, भंडारण, पैकिंग, परिवहन और निर्यात तक की इस प्रक्रिया में उत्पाद की निगरानी और सही दस्तावेज़ बेहद अहम होते हैं। किसी भी स्तर पर होने वाली गड़बड़ी का असर पूरी आपूर्ति शृंखला की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।
351 बोरियों की खेप में छिपाया गया था मेथाम्फेटामाइन
डीआरआई के अनुसार, सऊदी अरब भेजी जा रही खेप में 351 बोरियाँ थीं। इनमें से एक बोरी में मक्के के साथ करीब 56 किलोग्राम मेथाम्फेटामाइन मिला हुआ था। इसे मक्के के साथ इस तरह मिलाया गया था कि खेप देखने में सामान्य कृषि उत्पाद जैसी लगे। यह तरीका इसलिए अहम है क्योंकि कृषि उपज की बड़ी खेप नियमित रूप से देश के अलग-अलग हिस्सों से बंदरगाहों तक पहुँचती हैं। ऐसे में निर्यात के दौरान पैकिंग, दस्तावेज़ और खेप की जाँच की व्यवस्था अवैध गतिविधियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
निर्यातक और ट्रांसपोर्टर पर कार्रवाई
बरामदगी के बाद डीआरआई ने खेप से जुड़े लोगों की भूमिका की जाँच शुरू की। एजेंसी के मुताबिक, निर्यातक और ट्रांसपोर्टर व फ्रेट फ़ॉरवर्डर की पहचान की गई। जाँच में सामने आया कि ट्रांसपोर्टर व फ्रेट फ़ॉरवर्डर विदेशी खरीदार के साथ खेप के परिवहन और सीमा शुल्क से जुड़ी प्रक्रिया के समन्वय में शामिल था। दोनों लोगों को उनकी कथित भूमिका के आधार पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज़ अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ़्तार किया गया है। मामले में आगे की जाँच जारी है।
कृषि निर्यात की निगरानी क्यों जरूरी?
भारत से मक्का समेत कई कृषि उत्पादों का कारोबार घरेलू बाज़ार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक फैला हुआ है। किसानों के लिए निर्यात बाज़ार बेहतर दाम और नए कारोबारी अवसर उपलब्ध करा सकता है। ऐसे में कृषि उपज की गुणवत्ता, पहचान और सुरक्षित आपूर्ति शृंखला बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। न्हावा शेवा की यह कार्रवाई किसी कृषि उत्पाद या मक्का किसानों पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह बताती है कि किसान के खेत से लेकर विदेशी बाज़ार तक पहुँचने वाली उपज की पूरी आपूर्ति शृंखला में निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। इससे कृषि कारोबार से जुड़े निर्यातकों, परिवहनकर्ताओं और अन्य पक्षों की ज़िम्मेदारी भी सामने आती है।
मेथाम्फेटामाइन कितना ख़तरनाक है?
डीआरआई के मुताबिक, मेथाम्फेटामाइन एक शक्तिशाली सिंथेटिक नशीला पदार्थ है, जिसके सेवन से गंभीर शारीरिक और मानसिक समस्याएँ हो सकती हैं। इससे हृदय गति और रक्तचाप बढ़ना, बेचैनी, मानसिक भ्रम, मनोविकृति और निर्भरता जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इस मामले में डीआरआई ने नशीले पदार्थ को विदेश भेजे जाने से पहले ही बरामद कर लिया। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी तस्करी की कोशिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे।