FCI में 77% घटी खाद्यान्न की बर्बादी, सरकार ने बताया फिर भी क्यों हुआ करोड़ों का नुकसान, जानें ताज़ा आँकड़े
भारतीय खाद्य निगम (एफ़सीआई) के गोदामों में ख़राब होने वाले खाद्यान्न के मूल्य में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने संसद में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में एफ़सीआई के गोदामों में ख़राब या वितरण के लिए अनुपयुक्त (नॉन-इश्यूएबल) हुए खाद्यान्न का मूल्य पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 77 प्रतिशत कम हो गया। सरकार के अनुसार, इस दौरान मुख्य रूप से चक्रवात, बाढ़ और अत्यधिक वर्षा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण लगभग 3.2 करोड़ रुपये मूल्य का खाद्यान्न प्रभावित हुआ।
खाद्य राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने संसद में लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि एफ़सीआई के केंद्रीय पूल में रखे गेहूँ और चावल को गोदामों की भंडारण व्यवस्था में किसी कमी के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ। सरकार ने यह भी कहा कि खाद्यान्न के ख़राब होने के प्रत्येक मामले की तीन-स्तरीय समिति से जाँच कराई जाती है और ज़िम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई भी की जाती है।
77% कैसे घटी खाद्यान्न की बर्बादी और कितना हुआ नुकसान?
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एफ़सीआई के गोदामों में लगभग 3.2 करोड़ रुपये मूल्य का खाद्यान्न ख़राब या वितरण के लिए अनुपयुक्त हुआ। यह नुकसान मुख्य रूप से चक्रवात, बाढ़ और अत्यधिक वर्षा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुआ। इससे पहले वर्ष 2024-25 में यह नुकसान 13.9 करोड़ रुपये था। यानी एक वर्ष में ख़राब हुए खाद्यान्न के मूल्य में 77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में 14.5 करोड़ रुपये का खाद्यान्न ख़राब हुआ था, जबकि 2021-22 और 2022-23 में यह आँकड़ा 2.5 करोड़ रुपये रहा था।
क्या एफ़सीआई के गोदामों की भंडारण व्यवस्था से अनाज ख़राब हुआ?
खाद्य राज्य मंत्री ने संसद में कहा कि एफ़सीआई के केंद्रीय पूल में रखे गेहूँ और चावल को गोदामों की भंडारण व्यवस्था में किसी कमी के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ। सरकार ने अपने उत्तर में कहा कि वितरण के लिए अनुपयुक्त होने वाले खाद्यान्न की मात्रा बेहद कम होती है और यह मुख्य रूप से चक्रवात, अचानक आई बाढ़ तथा भारी वर्षा जैसी प्राकृतिक घटनाओं के कारण होती है।
अनाज ख़राब होने के मामलों में क्या कार्रवाई की गई?
सरकार ने बताया कि खाद्यान्न के ख़राब होने के हर मामले की जाँच मंडल, क्षेत्रीय और ज़ोनल स्तर की तीन-स्तरीय वर्गीकरण समिति करती है। इन जाँचों में अब तक 18 कर्मचारियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर रही है?
सरकार ने संसद में बताया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत भंडारण अवसंरचना को आधुनिक बनाने का काम जारी है। इसके तहत देश में 76 स्थानों पर 39 लाख टन (3.9 मिलियन टन) क्षमता वाले साइलो का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा 59 स्थानों पर 25.6 लाख टन (2.56 मिलियन टन) क्षमता वाले साइलो का निर्माण कार्य जारी है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य खाद्यान्न भंडारण अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना है।