गाँवों में आधार सेवाओं का विस्तार, उत्तर प्रदेश की 110 ग्राम पंचायतों में शुरू हुई सुविधा, इन 6 ज़िलों के ग्रामीणों को मिलेगा लाभ
उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों को आधार कार्ड से जुड़ी सेवाओं के लिए अब शहरों और तहसील मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर आधार नामांकन और आधार अद्यतन की सुविधा शुरू कर दी है। पहले चरण में छह ज़िलों की 110 ग्राम पंचायतों में यह सेवा शुरू की गई है, जहाँ अब तक 75 हज़ार से अधिक आधार संबंधी सेवाएँ उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
सरकार का लक्ष्य इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों तक पहुँचाना है। इसके लिए ग्राम पंचायतों को डिजिटल नागरिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे ग्रामीणों का समय और ख़र्च दोनों बचेंगे, वहीं पंचायतों की आय बढ़ाने का नया माध्यम भी तैयार होगा।
किन ज़िलों की ग्राम पंचायतों में शुरू हुई सुविधा?
फ़िलहाल लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बलरामपुर की 110 ग्राम पंचायतों में आधार नामांकन और आधार अद्यतन सेवाएँ शुरू की गई हैं। इन पंचायतों में रहने वाले लोग अब नाम, पता, मोबाइल नंबर, बायोमेट्रिक विवरण सहित अन्य आधार संबंधी कार्य अपने गाँव के पास ही करा सकेंगे।
सभी ग्राम पंचायतों तक पहुँचाने की तैयारी
पंचायती राज विभाग ने प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में आधार केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। पहले चरण में पाँच हज़ार ग्राम पंचायतों को इस योजना में शामिल किया गया है। विभाग का उद्देश्य आने वाले समय में प्रदेश के प्रत्येक गाँव तक यह सुविधा उपलब्ध कराना है।
पंचायत सहायकों को कैसे किया जा रहा है तैयार?
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पंचायत सहायकों को आधार ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब तक 1,200 से अधिक पंचायत सहायकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि अन्य का प्रशिक्षण जारी है। वर्तमान में 179 पंचायत सहायकों की ऑपरेटर आईडी सक्रिय हो चुकी है और 157 आधार मशीनों का भी सक्रियण पूरा कर लिया गया है।
गाँव में ही मिलेंगी डिजिटल सेवाएँ
यह पहल केवल आधार सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में ग्राम पंचायतों को ऐसे डिजिटल सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी सेवाएँ स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेंगी।
पंचायतों की आय बढ़ाने पर भी रहेगा ज़ोर। पंचायती राज विभाग का मानना है कि आधार सेवाओं के संचालन से ग्राम पंचायतों के लिए आय का नया स्रोत भी विकसित होगा। इससे पंचायतें आर्थिक रूप से अधिक मज़बूत बनेंगी और स्थानीय स्तर पर नागरिक सेवाओं का दायरा भी बढ़ेगा।
सरकार का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाई तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक नागरिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा और सरकारी सुविधाएँ उनके गाँव के क़रीब ही उपलब्ध होंगी।
ग्रामीणों को क्या होगा फायदा?
गाँव में ही आधार सेवाएँ मिलने से लोगों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी, यात्रा पर होने वाला ख़र्च कम होगा और बुज़ुर्गों, महिलाओं तथा दिव्यांगों को विशेष सुविधा मिलेगी। ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवाओं का विस्तार होने से रिकॉर्ड का रखरखाव अधिक व्यवस्थित होगा। इससे सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीणों को समयबद्ध तरीके से सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकेंगी। सरकार का कहना है कि यह पहल अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले समय में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों तक आधार सेवाएँ पहुँचाने की योजना है। इससे लाखों ग्रामीण परिवारों को अपने गाँव के निकट ही आधार संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध हो सकेंगी।