सोशल मीडिया से जंतर-मंतर तक पहुँचा 'रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन', जानें प्रदर्शनकारियों की 5 बड़ी माँगें

Gaon Connection | Aug 22, 2026, 18:14 IST
दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन’ से जुड़े प्रदर्शन में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की माँग उठाई जा रही है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगों में आर्थिक स्थिति को सरकारी सहायता का आधार बनाना, ‘कोटे के भीतर कोटा’, आरक्षण पर श्वेत पत्र, उच्च शिक्षा में न्यूनतम अंक और EWS के लाभों का विस्तार शामिल है। आंदोलन सोशल मीडिया से शुरू होकर सड़क तक पहुँचा है। प्रदर्शनकारी मेरिट और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की माँग पर ज़ोर दे रहे हैं।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन’ से जुड़े प्रदर्शन को लेकर शुक्रवार से हलचल बनी हुई है। जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की माँग को लेकर बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुँचे। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा, सरकारी सहायता में आर्थिक स्थिति को अधिक महत्व देने और शिक्षा में योग्यता के मानक को मजबूत करने जैसी माँगें उठाईं। पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी और प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान जाने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुँचे, जिसके बाद वहाँ सुरक्षा बढ़ाई गई और 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।



यह आंदोलन पहले सोशल मीडिया अभियान के तौर पर चर्चा में आया था। इसके बाद 21 अगस्त को दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया गया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगों में सरकारी सहायता और आरक्षण के लिए आर्थिक स्थिति को अधिक महत्व देना, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा, ‘कोटे के भीतर कोटा’, आरक्षण पर श्वेत पत्र और उच्च शिक्षण संस्थानों में न्यूनतम अंक तय करना शामिल है। प्रदर्शन के दौरान ‘मेरिट’ यानी योग्यता को लेकर भी ज़ोर दिया गया।



आर्थिक स्थिति को सरकारी सहायता का आधार बनाने की माँग

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँग है कि सरकारी सहायता का निर्धारण केवल जाति के आधार पर नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा, छात्रवृत्ति, कोचिंग और दूसरी सरकारी मदद का लाभ देने में व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाए। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोगों ने तर्क दिया कि सरकारी सहायता वास्तव में उन लोगों तक पहुँचनी चाहिए जिन्हें आर्थिक रूप से इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन के दौरान ‘आरक्षण ग़रीब को मिले, जाति को नहीं’ जैसे नारे भी लगाए गए।



‘कोटे के भीतर कोटा’ की माँग क्यों?

प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के भीतर भी बदलाव की माँग उठाई है। उनका तर्क है कि आरक्षित वर्गों के भीतर भी कुछ समूह अपेक्षाकृत अधिक पिछड़े हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाता। इसी वजह से ‘कोटे के भीतर कोटा’ की माँग सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के लाभ को अधिक ज़रूरतमंद समूहों तक पहुँचाने के लिए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की माँग की है। प्रदर्शन के दौरान क्रीमी लेयर से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए गए।



आरक्षण पर श्वेत पत्र की माँग

आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आरक्षण व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की माँग भी की है। उनका कहना है कि देश में आरक्षण व्यवस्था लंबे समय से लागू है, इसलिए इसके प्रभाव और इससे मिलने वाले लाभों का विस्तृत आकलन सार्वजनिक किया जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरक्षण व्यवस्था के पिछले कई दशकों के प्रभाव की समीक्षा की माँग उठाई। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट होना चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था का लाभ किन वर्गों तक पहुँच रहा है और इसमें किन बदलावों की आवश्यकता है।



उच्च शिक्षा में न्यूनतम अंक की बात क्यों उठी?

आंदोलन की सबसे चर्चित माँगों में उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए न्यूनतम अंक तय करने की बात शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण की व्यवस्था के बावजूद उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए एक न्यूनतम शैक्षणिक स्तर होना चाहिए। उनका तर्क है कि देश को विकसित बनाने के लिए शिक्षा में योग्यता के मानक से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन में ‘मेरिट’ पर विशेष ज़ोर दिया गया। हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों की माँग है; इसे किसी नई सरकारी नीति या लागू नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।



EWS को लेकर भी उठी माँग

प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग यानी EWS के लिए सरकारी सहायता बढ़ाने की माँग भी उठाई है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को शिक्षा और दूसरी सरकारी सुविधाओं में अधिक सहायता मिलनी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों ने सरकारी सहायता को आर्थिक स्थिति के साथ-साथ दिव्यांगता, अनाथ होने या शहीद के बच्चे होने जैसे आधारों से जोड़ने की बात भी रखी है। यानी उनका ज़ोर इस बात पर है कि सहायता की ज़रूरत तय करते समय व्यक्ति की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी देखा जाए।



सोशल मीडिया से जंतर-मंतर तक पहुँचा आंदोलन

‘रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन’ की पहचान पहले एक सोशल मीडिया अभियान के तौर पर बनी। इंस्टाग्राम पर इस नाम से चल रहे अभियान ने लोगों से दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इसके बाद 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जुटे। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में अधिकतम 500 लोगों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुँच गए। वहाँ पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाई गई तथा बैरिकेड लगाए गए। पुलिस के मुताबिक़, निर्धारित समय के बाद भी कुछ लोग वहाँ बने रहे, जिसके बाद 50 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

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