AgriStack: करोड़ों किसानों का डेटा हुआ डिजिटल, जानिए किसान आईडी से कौन-सी सेवाएँ होंगी आसान

Mansi | Aug 10, 2026, 14:31 IST
सरकार खेती से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है। एग्रीस्टैक के तहत किसानों की पहचान को भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है। इससे सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं तक पहुँच आसान होगी। डिजिटल फसल सर्वेक्षण से फसल उत्पादन के अनुमान को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। किसानों के डेटा की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।

देश में खेती से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में एग्रीस्टैक और डिजिटल कृषि मिशन से जुड़ी प्रगति की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं।



किसान आईडी के ज़रिए किसानों की पहचान को उनकी ज़मीन और खेती से जुड़ी जानकारी के साथ डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है। इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।



किसान की डिजिटल प्रोफ़ाइल में क्या होगा?

एग्रीस्टैक के तहत किसान की एक डिजिटल प्रोफ़ाइल तैयार की जा रही है। इसमें किसान की पहचान के साथ भूमि रिकॉर्ड, बोई गई फसल, पशुधन और मत्स्य पालन जैसी जानकारियाँ शामिल की जाएंगी। इस डिजिटल व्यवस्था के तीन प्रमुख हिस्से हैं:-



  • किसान रजिस्ट्री
  • भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र
  • फसल बोआई रजिस्ट्री

इन रिकॉर्ड को तैयार करने और उनका रखरखाव करने की ज़िम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की होगी।



किसान आईडी को ज़मीन के रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा

सरकार के अनुसार, किसान आईडी को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के साथ लिंक किया जा रहा है। इससे किसान की पहचान और भूमि से जुड़े विवरण का डिजिटल सत्यापन अधिक आसान हो सकता है। 3 अगस्त 2026 तक 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी तैयार हो चुकी थीं। मणिपुर में भी डिजिटल फसल सर्वेक्षण और किसान आईडी बनाने का काम शुरू किया गया है।



लोन और फसल बीमा में मिल सकती है मदद

लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, किसान रजिस्ट्री को विभिन्न किसान-केंद्रित योजनाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि ऋण, फसल बीमा, मौसम आधारित सलाह और MSP पर फसल ख़रीद जैसी सेवाओं को किसानों के लिए अधिक सुगम बनाना है। एकीकृत डिजिटल जानकारी से सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुँचाने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।



31.3 करोड़ से अधिक प्लॉट का डिजिटल सर्वे

डिजिटल कृषि मिशन के तहत रबी 2025-26 में 648 ज़िलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया। इस दौरान 31.3 करोड़ से अधिक प्लॉट को सर्वे में शामिल किया गया। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में कौन-सी फसल बोई गई है और कितना क्षेत्र खेती के तहत है, इसकी जानकारी जुटाने में मदद मिलती है। आगे इस डेटा का इस्तेमाल फसल उत्पादन के अनुमान को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।



किसानों के डेटा की सुरक्षा का भी प्रावधान

सरकार ने लिखित जवाब में बताया कि एग्रीस्टैक को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसमें किसान की सहमति से डेटा लेने, जानकारी साझा करने पर किसान का नियंत्रण, एन्क्रिप्टेड स्टोरेज और केवल अधिकृत सिस्टम को डेटा तक पहुँच देने जैसे सुरक्षा उपाय शामिल हैं। साइबर सुरक्षा के लिए MeitY और CERT-In के मानकों का पालन किया जा रहा है।



AI से फसल उपज का लगाया जा रहा अनुमान

कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। फसल बीमा से जुड़ी YES-TECH पहल के तहत धान, गेहूँ और सोयाबीन जैसी फसलों की उपज का तकनीक आधारित आकलन किया जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम (DGCES) विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य फसल उत्पादन के अधिक सटीक और समयबद्ध अनुमान तैयार करने में मदद करना है।



राज्यों के पास रहेगा किसान रजिस्ट्री का स्वामित्व

सरकार के मुताबिक़, राज्य किसान रजिस्ट्री का स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों के पास रहेगा। केंद्र सरकार आवश्यक तकनीकी ढाँचा उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। लोकसभा में दिए गए सरकार के लिखित जवाब से साफ़ है कि एग्रीस्टैक के ज़रिए किसान की पहचान, ज़मीन, फसल और कृषि गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को एक डिजिटल व्यवस्था में लाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इससे भविष्य में किसानों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं की पहुँच को तेज़ और अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

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