समंदर में अब AI का पहरा, अवैध मछली पकड़ने पर लगेगी लगाम, सरकार ने पेश किया रोडमैप
केंद्र सरकार ने मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट संचार और डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम पर आधारित नया रोडमैप पेश किया है। इसका उद्देश्य अवैध मछली पकड़ने पर रोक लगाना, मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाना और मछली से जुड़े उत्पादों की सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाना है। यह रोडमैप मुंबई में आयोजित मत्स्य क्षेत्र में AI के उपयोग पर केंद्रित एक क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति बैठक में प्रस्तुत किया गया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में भारत, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका के नीति निर्माता, मत्स्य अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठन और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
समंदर में क्या हो रहा, अब AI रखेगा नजर
सरकार ने साफ किया है कि आने वाले समय में AI केवल डेटा विश्लेषण का उपकरण नहीं रहेगा, बल्कि मत्स्य क्षेत्र में निगरानी और प्रबंधन का अहम हिस्सा बनेगा। इसके जरिए मछली पकड़ने वाली नौकाओं की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान होगी और अवैध, अनियंत्रित तथा बिना रिपोर्ट वाली मछली पकड़ने (IUU Fishing) की घटनाओं को रोका जा सकेगा। इसके अलावा AI आधारित सिस्टम खराब मौसम, समुद्री जोखिम और सुरक्षा खतरों को लेकर मछुआरों को पहले से चेतावनी भी दे सकेंगे।
2.25 लाख से ज्यादा नौकाएं डिजिटल सिस्टम से जुड़ीं
मत्स्य विभाग के उप आयुक्त संजय पांडे ने बताया कि सरकार ReALCraft नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार कर रही है। यह मछली पकड़ने वाली नौकाओं के पंजीकरण और निगरानी के लिए विकसित वेब आधारित प्रणाली है। अब तक देश के सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2.25 लाख से अधिक नौकाओं का पंजीकरण इस प्लेटफॉर्म पर किया जा चुका है। सरकार इसे AI आधारित मत्स्य प्रबंधन की नींव मान रही है।
समुद्र से बाजार तक हर मछली की होगी पहचान
सरकार की योजना केवल निगरानी तक सीमित नहीं है। AI की मदद से मछली की ट्रेसबिलिटी यानी पकड़ने के स्थान से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया जाएगा। इससे सीफूड सप्लाई चेन अधिक पारदर्शी होगी और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूती मिलेगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक जे.के. जेना ने कहा कि AI मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन को बदलने की क्षमता रखता है।
लाखों मछुआरों तक तकनीक पहुंचाने की चुनौती
केंद्रीय मत्स्य विभाग की संयुक्त सचिव सुरभि राय ने कहा कि भारत ने मत्स्य उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, लेकिन लाखों मछुआरों और हजारों फिश लैंडिंग सेंटरों की निगरानी अब भी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि AI और डिजिटल तकनीकें नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच की दूरी को कम कर सकती हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि इनका लाभ छोटे और पारंपरिक मछुआरों तक भी पहुंचे।
50 करोड़ लोगों की आजीविका से जुड़ा है क्षेत्र
विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी क्षेत्र करीब 50 करोड़ लोगों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा हुआ है। ऐसे में AI आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण न केवल मत्स्य संसाधनों के संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और भविष्य की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत बना सकता है।