UP Weather Forecast: यूपी में AI बताएगा कब और कहां होगी बारिश, किसानों को 10 दिन पहले मिलेगा अलर्ट
उत्तर प्रदेश में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मौसम का ज्यादा सटीक पूर्वानुमान लगाया जाएगा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के लिए हाई स्पेशियल रिजोल्यूशन रेनफॉल फोरकास्ट (HSRRF) सिस्टम शुरू किया है, जो 10 दिन पहले तक स्थानीय स्तर पर बारिश का अनुमान दे सकेगा। इस नई तकनीक से किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और प्रशासन को मौसम से जुड़ी घटनाओं की पहले से जानकारी मिल सकेगी, जिससे नुकसान कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
1 किलोमीटर स्तर तक देगा मौसम की जानकारी
IMD उत्तर प्रदेश केंद्र के स्टेशन प्रमुख मनीष रानालकर ने बताया कि HSRRF एक AI आधारित रेनफॉल फोरकास्ट मॉडल है जो 1 किलोमीटर के स्पेशियल रिजोल्यूशन तक मौसम का अनुमान लगाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम 10 दिन पहले तक बारिश का पूर्वानुमान दे सकता है। इस पायलट प्रोजेक्ट को मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लॉन्च किया।
कई संस्थानों ने मिलकर तैयार किया मॉडल
HSRRF सिस्टम को IMD, पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (IITM) और नोएडा के नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग (NCMRWF) ने मिलकर विकसित किया है। यह सिस्टम ऑटोमैटिक रेन गेज, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, डॉप्लर वेदर रडार, सैटेलाइट आधारित रेनफॉल डेटा और अपर एयर ऑब्जर्वेशन समेत कई स्रोतों से डेटा लेकर काम करता है। AI आधारित डाउनस्केलिंग तकनीक के जरिए इन सभी आंकड़ों को बेहद सूक्ष्म स्तर के मौसम पूर्वानुमान में बदला जाता है।
यूपी में सबसे बड़ा ऑब्जर्वेशन नेटवर्क
मनीष रानालकर ने बताया कि उत्तर प्रदेश में देश का सबसे घना मौसम ऑब्जर्वेशन नेटवर्क मौजूद है, जो इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने करीब 2,450 ऑब्जर्वेशन स्टेशन लगाए हैं। इनमें लगभग 2,000 ऑटोमैटिक रेन गेज और 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन शामिल हैं। इनके अलावा IMD के अपने स्टेशन और मैनुअल ऑब्जर्वेशन भी सिस्टम में शामिल किए गए हैं।
140 करोड़ रुपये से तैयार हुआ नेटवर्क
जानकारी के मुताबिक इन 2,450 ऑब्जर्वेशन स्टेशनों के लिए उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने करीब 140 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हालांकि AI आधारित फोरकास्ट मॉडल का विकास केंद्रीय वैज्ञानिक संस्थानों ने किया है। यह मॉडल दिल्ली से संचालित होगा, जबकि इसकी मौसम रिपोर्ट लखनऊ स्थित मौसम केंद्र को भेजी जाएगी, जहां से पूरे प्रदेश में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी होगी ज्यादा सटीक
IMD अधिकारियों के मुताबिक HSRRF सिस्टम कम समय तक चलने वाली मौसम घटनाओं जैसे आंधी-तूफान और तेज बारिश का ज्यादा सटीक पूर्वानुमान लगाने में मदद करेगा। अधिकारियों ने कहा कि कई बार आंधी या तेज बारिश सिर्फ 30 मिनट तक रहती है, ऐसे में इस तरह की घटनाओं का सटीक अनुमान पहले लगाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। नई तकनीक से बिजली गिरने और भारी बारिश की चेतावनी पहले से ज्यादा सटीक तरीके से जारी की जा सकेगी।
किसानों और आपदा प्रबंधन को होगा बड़ा फायदा
उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद ने कहा कि यह सिस्टम खेती, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी जैसे कई क्षेत्रों में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि किसान 10 दिन पहले मिलने वाले स्थानीय बारिश पूर्वानुमान के आधार पर बुवाई, सिंचाई और फसल कटाई की बेहतर योजना बना सकेंगे। वहीं प्रशासन बाढ़ और दूसरी आपदाओं की तैयारी पहले से कर सकेगा।
पांच नए डॉप्लर रडार भी लगाए जाएंगे
मौसम विभाग ने बताया कि भविष्य में इस सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में पांच नए डॉप्लर वेदर रडार लगाए जाएंगे। इन रडार से मिलने वाला डेटा भी HSRRF मॉडल में जोड़ा जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश में बारिश के पूर्वानुमान की सटीकता और बढ़ने की उम्मीद है।