दुर्लभ कटहल लेने विदेश गया किसान, फ्लाइट लेट हाेने से सूखा पौधा, अब एयरलाइन को देना होगा ₹90000 मुआवज़ा
खेती-किसानी में नए प्रयोग करने की चाह एक किसान को हजारों किलोमीटर दूर इंडोनेशिया तक ले गई, लेकिन वापसी में फ्लाइट की देरी ने उसकी मेहनत पर पानी फेर दिया। दुर्लभ हाइब्रिड कटहल का पौधा लेकर लौट रहे किसान का पौधा एयरलाइन की लापरवाही के कारण खराब हो गया। Bar & Bench की रिपोर्ट के अनुसार, अब केरल के पलक्कड़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एयरएशिया इंडिया लिमिटेड को किसान को ₹90,750 का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि एयरलाइन की सेवा में कमी (Deficiency in Service) के कारण किसान को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी।
दुर्लभ पौधे के लिए इंडोनेशिया तक पहुंचा किसान
मामला पलक्कड़ के एक किसान अब्दुल अजीज से जुड़ा है जो हाइब्रिड फल प्रजातियों की खेती और शोध से जुड़े हैं। अगस्त 2025 में वह अपने फार्म के लिए एक विशेष हाइब्रिड कटहल का पौधा खरीदने इंडोनेशिया गए थे। यात्रा के दौरान उन्होंने कोच्चि से कुआलालंपुर होते हुए इंडोनेशिया का सफर किया और दुर्लभ पौधा खरीदने के बाद वापस लौट रहे थे। लेकिन वापसी में मेदान-कुआलानामू से कुआलालंपुर जाने वाली एयरएशिया की फ्लाइट कई घंटे देर से पहुंची।
कनेक्टिंग फ्लाइट छूटी, तीन दिन इंतजार को कहा
फ्लाइट में देरी के कारण किसान की कोच्चि जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई, जबकि दोनों उड़ानों के बीच तीन घंटे से अधिक का अंतर था। किसान का आरोप था कि उन्होंने कुआलालंपुर पहुंचकर एयरलाइन अधिकारियों से तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास एक संवेदनशील और दुर्लभ पौधा है तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि देने की भी पेशकश की। इसके बावजूद एयरलाइन अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि कोच्चि के लिए अगली उपलब्ध उड़ान तीन दिन बाद है।
खुद टिकट लेकर अगले दिन पहुंचा भारत
किसान ने आयोग को बताया कि बाद में उसने खुद प्रयास कर एयरएशिया की ही एक अन्य फ्लाइट में अगले दिन सीट हासिल कर ली। इससे यह साबित हुआ कि एयरलाइन द्वारा दी गई जानकारी सही नहीं थी। देरी और समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण हाइब्रिड कटहल का पौधा खराब हो गया और उसकी पूरी यात्रा का उद्देश्य ही विफल हो गया। इसके अलावा किसान को अतिरिक्त यात्रा और होटल खर्च भी उठाना पड़ा।
सुनवाई में नहीं पहुंची एयरलाइन
उपभोक्ता आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने के बावजूद एयरएशिया की ओर से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ और न ही कोई जवाब दाखिल किया गया। इसके बाद आयोग ने एकतरफा (Ex-Parte) सुनवाई करते हुए मामले का निपटारा किया। फ्लाइट टिकट, यात्रा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच के बाद आयोग ने माना कि एयरलाइन की देरी और यात्री को समय पर सहायता न देना सेवा में कमी का स्पष्ट मामला है।
आयोग ने दिया मुआवजे का आदेश
आयोग ने एयरएशिया को निर्देश दिया कि वह किसान को:
- ₹30,750 टिकट किराए की वापसी के रूप में दे
- ₹25,000 अतिरिक्त यात्रा और ठहरने के खर्च के लिए दे
- ₹25,000 सेवा में कमी के लिए मुआवजे के रूप में दे
- ₹10,000 मुकदमे के खर्च के रूप में दे
इस प्रकार कुल ₹90,750 की राशि किसान को चुकानी होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो एयरलाइन को अतिरिक्त दंड का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला उन किसानों और उद्यमियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो नई किस्मों, पौधों और कृषि नवाचारों के लिए देश-विदेश का रुख करते हैं। आयोग ने साफ किया कि यदि किसी सेवा प्रदाता की लापरवाही से ग्राहक को नुकसान होता है, तो उसे उसकी भरपाई करनी होगी।