अल नीनो से प्रभावित हो सकते हैं देश के 315 ज़िले, तैयार हुआ एक्शन प्लान, कृषि मंत्री शिवराज ने संभाली कमान

Gaon Connection | Jun 23, 2026, 17:24 IST
अल नीनो और कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने 315 ज़िलों को चिन्हित कर निगरानी बढ़ा दी है। इनमें 111 ज़िले उच्च प्राथमिकता वाले हैं, जहाँ सिंचाई सुविधाएँ सीमित हैं। कृषि मंत्रालय ने अल नीनो मॉनिटरिंग सेल बनाया है और जल संरक्षण, आकस्मिक कृषि योजनाओं, बीज-उर्वरक उपलब्धता तथा किसानों को समय पर सलाह देने पर ज़ोर दिया है।

देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ़्तार अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँची है, वहीं अल नीनो के सक्रिय होने की आशंकाओं ने कृषि क्षेत्र की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ़ सीज़न की तैयारियों की समीक्षा तेज़ कर दी है। कृषि मंत्रालय ने उन क्षेत्रों की पहचान शुरू कर दी है जहाँ बारिश की कमी फसलों और किसानों पर अधिक असर डाल सकती है। इसके लिए केंद्र स्तर पर लगातार निगरानी की व्यवस्था भी बनाई गई है।



केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थिति की समीक्षा के बाद बताया कि कृषि मंत्रालय ने अल नीनो की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग सेल सक्रिय किया है। मंत्रालय के आकलन के अनुसार देश के 315 ज़िलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। इनमें 111 ज़िलों को उच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है, जहाँ सिंचाई सुविधाएँ सीमित हैं और खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर है।



12 राज्यों में अधिक असर की आशंका

कृषि मंत्रालय के अनुसार अल नीनो का सबसे अधिक प्रभाव मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में देखने को मिल सकता है। मंत्रालय ने बताया कि अब तक हुई वर्षा सामान्य से काफ़ी कम रही है और कई इलाकों में बारिश की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में खरीफ़ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार पर विशेष नज़र रखी जा रही है।



हालात पर नज़र रखेगा मॉनिटरिंग सेल

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अल नीनो मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप लगातार मौसम और फसलों से जुड़े हालात की निगरानी करेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्री के स्तर पर भी नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएँगी, ताकि बदलती परिस्थितियों के अनुसार समय रहते निर्णय लिए जा सकें।



संवेदनशील ज़िलों के लिए तैयार की गई विशेष रणनीति

कम वर्षा और सीमित सिंचाई वाले ज़िलों के लिए अलग कार्ययोजना तैयार की गई है। जिला कृषि आकस्मिकता योजना (DACP) को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अद्यतन कर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सके।



जल संरक्षण पर रहेगा विशेष ज़ोर

बैठक में जल संरक्षण को सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। तालाब, चेक डैम और खेत-तालाब जैसी जल संरचनाओं को मज़बूत करने तथा मनरेगा के तहत जल संरक्षण कार्यों में तेज़ी लाने पर बल दिया गया। किसानों को कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण बढ़ाने की सलाह भी दी गई है।



बीज, उर्वरक और बाज़ार व्यवस्था की तैयारी

सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही मंडियों और खुदरा बाज़ारों में मूल्य स्थिति पर नज़र रखने तथा जमाखोरी एवं कालाबाज़ारी रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।



किसानों को समय पर मिलेगी सलाह

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), एग्रो-मौसम इकाइयों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से किसानों तक मौसम और खेती से जुड़ी सलाह समय पर पहुँचाई जाएगी। किसानों से यह भी अपील की गई है कि पर्याप्त वर्षा और खेतों में नमी बनने से पहले जल्दबाज़ी में बुवाई न करें।



पशुधन और खाद्य सुरक्षा पर भी फोकस

बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम-किसान जैसी योजनाओं को किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बताया गया। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर किसानों तक ऋण, सहायता और राहत समय पर पहुँचाई जाए। संभावित चारा संकट को देखते हुए पशुधन के लिए अग्रिम व्यवस्था करने और आवश्यक भंडारण बनाए रखने पर भी ज़ोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि पहले से की गई तैयारियों के कारण खाद्य सुरक्षा और आवश्यक आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

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