अगस्त में आ सकता है शक्तिशाली अल नीनो, भारत में सूखे का बढ़ेगा खतरा! नए विश्लेषण ने बढ़ाई टेंशन
अगस्त 2026 के अंत तक प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में एक शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि उत्पादन, खाद्य वस्तुओं की कीमतों, ऊर्जा बाज़ार, बीमा उद्योग और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है। खासकर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में सूखे का खतरा बढ़ने से चीनी, कोको और पाम ऑयल जैसी चीज़ों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
'बिजनेस लाइन' में प्रकाशित अमेरिकी वित्तीय रिसर्च और मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी Moby के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) डॉ. माइकल फेरारी के विश्लेषण के अनुसार, पारंपरिक जलवायु मॉडलों की तुलना में उनके MLR-ARX मॉडल ने अल नीनो के तेज़ी से विकसित होने के संकेत पहले ही दे दिए हैं। विश्लेषण में कहा गया है कि यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो भारत और थाईलैंड जैसे देश कृषि उत्पादन पर दबाव को देखते हुए कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध या नियंत्रण जैसे कदम उठा सकते हैं। इससे वैश्विक खाद्य बाज़ार और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
MLR-ARX मॉडल ने अगस्त तक बड़े अल नीनो का जताया अनुमान
डॉ. माइकल फेरारी के विश्लेषण के अनुसार, MLR-ARX मॉडल से संकेत मिले हैं कि प्रशांत महासागर का तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि अगस्त 2026 के अंत तक Niño 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 1.729 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाएगा। यह 1.5 डिग्री सेल्सियस की उस सीमा से ऊपर है, जिसके बाद अल नीनो को बड़ा और ज़्यादा प्रभावशाली माना जाता है।
विश्लेषण में कहा गया है कि पारंपरिक जलवायु मॉडल महासागर की मौजूदा स्थिति पर अधिक निर्भर रहते हैं, जिससे बड़े बदलावों का अनुमान लगाने में अक्सर एक से दो महीने की देरी हो जाती है। वहीं MLR-ARX मॉडल तापमान में महीने-दर-महीने होने वाले बदलाव की गति का भी विश्लेषण करता है। इससे यह आधिकारिक पूर्वानुमानों से लगभग 30 से 60 दिन पहले संभावित बदलाव का संकेत दे सकता है।
MLR-ARX एक डेटा आधारित गणितीय मॉडल है, जो पिछले तापमान और उसमें हो रहे बदलाव की रफ्तार का विश्लेषण करके यह अनुमान लगाता है कि आने वाले महीनों में समुद्र का तापमान किस दिशा में जा सकता है।
भारत, कृषि, ऊर्जा और वैश्विक बाज़ार पर पड़ सकता है असर
विश्लेषण के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत में सूखे का खतरा बढ़ने से चीनी, कोको और पाम ऑयल जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। भारत और थाईलैंड कृषि उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण या प्रतिबंध जैसे कदम उठा सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया में वर्षा आधारित गेहूँ की फसल प्रभावित होने से कीमतें बढ़ सकती हैं, जबकि ब्राज़ील और अर्जेंटीना में अधिक बारिश से सोयाबीन और मक्का का उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो का असर ऊर्जा, बीमा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर भी दिखाई दे सकता है। उत्तरी गोलार्ध में सर्दियाँ अपेक्षाकृत हल्की रहने से हीटिंग की मांग घट सकती है, जबकि दक्षिण अमेरिका में सूखे के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। मध्य अमेरिका में सूखे की वजह से पनामा नहर में जहाज़ों की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
इसके अलावा, कृषि इनपुट और एचवीएसी (HVAC) उपकरण बनाने वाली कंपनियों को लाभ मिल सकता है, जबकि खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बिजली कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि यह मॉडल पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान का विकल्प नहीं है, बल्कि समय रहते जोखिम का आकलन करने वाला एक निर्णय सहायता उपकरण (Decision Tool) है, जो सरकारों, उद्योगों और कारोबारियों को आधिकारिक पुष्टि से पहले तैयारी का अतिरिक्त समय दे सकता है।