Mango Harvesting Alert: आम उत्पादक हो जाएं सतर्क, 44 डिग्री तक पहुँचेगा तापमान, बढ़ेगा कीटों का ख़तरा, अपनाएं ये ज़रूरी सावधानियाँ
उत्तर प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ किसानों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन मौसम अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो सप्ताह तक राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है।
पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस, जबकि कुछ स्थानों पर 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। ऐसे में आम के बागों पर गर्मी और बदलते मौसम का दोहरा दबाव पड़ सकता है।
तेज गर्मी, बढ़ती उमस और मानसून पूर्व की छिटपुट बारिश आम के फलों की गुणवत्ता, उत्पादन और भंडारण क्षमता को प्रभावित कर सकती है। फलमक्खी, शोल्डर ब्राउनिंग और अन्य कीट-रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।
यही वजह है कि Uttar Pradesh Council of Agricultural Research ने आम उत्पादकों को बागों की नियमित निगरानी करने, समय पर तुड़ाई करने और मौसम आधारित वैज्ञानिक सलाह अपनाने की को कहा है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
तेज गर्मी और बारिश से आम को क्या नुकसान हो सकता है?
क्रॉप वेदर वाॉच ग्रुप की हालिया रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक तापमान और अचानक होने वाली बारिश आम के फलों में कई समस्याएं पैदा कर सकती है। अधिक गर्मी के कारण फलों में नमी की कमी हो सकती है, जिससे उनका आकार और गुणवत्ता प्रभावित होती है। वहीं बारिश और बढ़ी हुई नमी के कारण फल सड़न, शोल्डर ब्राउनिंग, फलमक्खी और अन्य कीट-रोगों का खतरा बढ़ जाता है। तेज हवाओं और आंधी से फलों के गिरने तथा शाखाओं के टूटने की समस्या भी सामने आ सकती है।
आम की तुड़ाई सुबह या शाम को ही करें
यूपीसीएआर ने सलाह दी है कि आम की तुड़ाई सुबह जल्दी या देर शाम के समय की जाए। दोपहर की तेज गर्मी में तुड़ाई करने से फलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। फलों को हाथ से या विशेष आम तोड़क यंत्र की सहायता से सावधानीपूर्वक तोड़ना चाहिए ताकि उनमें चोट न लगे। तुड़ाई के बाद फलों को सीधे मिट्टी के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए।
फलमक्खी का बढ़ सकता है प्रकोप
मौसम में नमी बढ़ने के साथ आम और अमरूद के बागों में फलमक्खी का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने बागवानों को मिथाइल यूजिनॉल और क्यू-ल्योर ट्रैप 20 से 25 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाने की सलाह दी है। साथ ही नीम सीड कर्नेल एक्सट्रैक्ट का घोल बनाकर 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करने की भी सिफारिश की गई है। जमीन पर गिरे और कीटग्रस्त फलों को तुरंत एकत्र कर नष्ट कर देना चाहिए ताकि संक्रमण न फैले।
शोल्डर ब्राउनिंग रोग से ऐसे करें बचाव
मानसून पूर्व और शुरुआती बारिश के दौरान आम में शोल्डर ब्राउनिंग रोग का खतरा बढ़ जाता है। यह रोग फलों की बाहरी गुणवत्ता को खराब कर देता है और बाजार मूल्य घटा सकता है। बैठक में वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि फल के पकने से पहले फफूंदनाशकों का छिड़काव किया जाए, ताकि रोग का प्रकोप कम हो सके।
कैटरपिलर और कटर कीट से रहें सतर्क
गर्मी और नमी वाले मौसम में आम के बागों में कैटरपिलर (कटर कीट) का हमला भी बढ़ सकता है। यह कीट नई पत्तियों और फलों को नुकसान पहुंचाता है। वैज्ञानिकों ने समय-समय पर बाग की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करने की सलाह दी है।
नए बाग लगाने वालों के लिए भी सलाह
जिन किसानों ने अभी तक नए आम या अन्य फलदार पौधों के लिए गड्ढे तैयार नहीं किए हैं, उन्हें यह कार्य जल्द पूरा कर लेना चाहिए। गड्ढों की भराई करते समय ऊपरी उपजाऊ मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने की सलाह दी गई है, जिससे पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर हो सके।
मौसम आधारित प्रबंधन से बचाया जा सकता है नुकसान
जून महीने में मौसम तेजी से बदलता है। कभी तेज गर्मी तो कभी अचानक बारिश बागवानी फसलों के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में मौसम आधारित प्रबंधन, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक सलाह का पालन करके आम उत्पादक फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।