सहकारिता को मिला डिजिटल बूस्ट, 50 हजार PACS हुए ई-PACS; अमित शाह ने लॉन्च कीं कई राष्ट्रीय परियोजनाएँ
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार, 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित सहकारिता मंत्रालय के पाँचवें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ा प्रश्न सदैव नेतृत्व और संस्थागत स्थायित्व का रहा है। इसी कारण सरकार ने भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO), कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (KRIBHCO), अमूल, विभिन्न राज्यों की दुग्ध सहकारी समितियों और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) जैसे सफल सहकारी मॉडलों का गहन अध्ययन किया। इन संस्थाओं की सफलता का कारण यह है कि इनका नेतृत्व सहकारिता से जुड़े लोगों के हाथ में रहा, जबकि इनके प्रशासन और गवर्नेंस का संचालन पेशेवर तरीके से किया गया।
अमित शाह ने कहा कि इसी सफल मॉडल को पूरे देश में लागू करने के उद्देश्य से त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय बैंकिंग, डेयरी, कृषि, विपणन, उर्वरक और सहकारिता के अन्य क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करेगा। इनकी नियुक्ति योग्यता के आधार पर होगी, जिससे प्राथमिक सहकारी समितियों से लेकर शीर्ष संस्थाओं तक चरणबद्ध तरीके से प्रोफेशनल मैनेजमेंट लागू किया जा सकेगा। इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यकुशलता में सुधार होगा और नियुक्तियों से जुड़े भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में सहकारी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। पहले सहकारिता मुख्य रूप से प्राथमिक स्तर तक सीमित थी, लेकिन अब इसे कृषि ऋण, डेयरी, उर्वरक वितरण, ग्रामीण सेवाओं के साथ-साथ द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों तक विस्तार दिया गया है।
50 हजार पैक्स बने ई-पैक्स, अन्न भंडारण से लेकर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तक कई परियोजनाओं का शुभारंभ
समारोह के दौरान विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत 135 अन्न भंडारण गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण और 47 नए गोदामों का शिलान्यास किया गया। अमूल और एनसीसीएफ (NCCF) की ओर से 64 एकड़ में विकसित किए जाने वाले सहकारी वनीकरण प्रोजेक्ट ‘सहकार वन’ का भूमि पूजन भी किया गया।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जळगाँव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन किया गया। इन केंद्रों पर आलू, पपीता और केला जैसी फसलों के टिश्यू कल्चर के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने का कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर एनसीडी (NCD) 3.0, जियो-टैग मोबाइल एप्लिकेशन और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के दूध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल का शुभारंभ किया गया। शहरी सहकारी बैंकों के लिए राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (NUCFDC) की दो डिजिटल पहल-सहकार सीबीएस (CBS) और सहकार सहयोगी का भी अनावरण किया गया। इसके अलावा कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी-स्टेट लिमिटेड तथा गोमय सहकारी समिति मल्टी-स्टेट लिमिटेड का उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान 50 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को ई-पैक्स में परिवर्तित किया गया। साथ ही बीज प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए बीबीएसएसएल (BBSSL) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। डेयरी सहकारी समितियों के लिए आदर्श उप-विधियाँ भी जारी की गईं तथा सहकारिता मंत्रालय की पाँच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया।
तीन साल में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनेगी राष्ट्रीय सहकारी समिति
अमित शाह ने कहा कि बीज उत्पादन के क्षेत्र में गठित राष्ट्रीय सहकारी समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन संस्था बनकर उभरेगी। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों को शुद्ध और मिलावट-मुक्त बीज उपलब्ध कराना, अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बीज किस्मों का विकास एवं वितरण करना और भारतीय पारंपरिक बीजों का संरक्षण करना तीन प्रमुख उद्देश्य हैं।
उन्होंने कहा कि इसी वर्ष सहकारी संस्थाओं के लिए रैंकिंग फ्रेमवर्क भी शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली शीर्ष पाँच सहकारी समितियों की पहचान कर उन्हें रैंकिंग दी जाएगी और उनके कार्यों को अन्य संस्थाओं के लिए प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना ने सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा दी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को मज़बूत करने का काम किया है।