18 लाख किसान परिवारों का मॉडल बना दुनिया के लिए मिसाल, आंध्र प्रदेश की प्राकृतिक खेती को मिला Food Planet Prize 2026
रासायनिक उर्वरकों और बढ़ती खेती लागत के बीच आंध्र प्रदेश का एक कृषि मॉडल अब वैश्विक पहचान हासिल कर चुका है। राज्य के Andhra Pradesh Community Managed Natural Farming (APCNF) कार्यक्रम को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित Food Planet Prize मिला है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े खाद्य और पर्यावरण पुरस्कारों में गिना जाता है। स्वीडन की Curt Bergfors Foundation द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार के तहत 1.5 मिलियन डॉलर की राशि प्रदान की गई। यह सम्मान ऐसे समय में मिला है जब दुनिया भर में टिकाऊ कृषि, मिट्टी के स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ रही है।
क्या है APCNF मॉडल?
आंध्र प्रदेश कम्युनिटी मैनेज्ड नेचुरल फार्मिंग (APCNF) की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों और बाहरी कृषि इनपुट्स पर निर्भरता कम करने में मदद करना था। यह कार्यक्रम आज 18 लाख किसान परिवारों और 3.4 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ काम कर रहा है। कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता किसान-से-किसान सीखने की प्रणाली है, जिसमें स्थानीय स्तर पर सफल किसान अन्य किसानों को प्रशिक्षित करते हैं।
क्यों मिला यह वैश्विक सम्मान?
Food Planet Prize की जूरी ने APCNF को ऐसे मॉडल के रूप में मान्यता दी जो खेती को प्रकृति के साथ जोड़ने का प्रयास करता है। पुरस्कार के लिए जारी प्रशस्ति में कहा गया कि यह पहल मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव विविधता और कृषि की जलवायु सहनशीलता को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की लागत कम करने में मदद करती है। इस वर्ष पुरस्कार के लिए दुनिया भर से एक हजार से अधिक नामांकन प्राप्त हुए थे। इनमें से 19 देशों और छह महाद्वीपों की 35 पहलों को लंबी सूची में शामिल किया गया था। APCNF चार अंतिम दावेदारों में जगह बनाने के बाद
विजेता घोषित हुआ।
महिलाओं की बड़ी भूमिका
कार्यक्रम से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि किसानों को प्रशिक्षण देने वाले सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों में 60 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राकृतिक खेती के विस्तार और किसानों तक जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाला माना जाता है।
सीमाओं से बाहर पहुंचा मॉडल
आंध्र प्रदेश में शुरू हुआ यह मॉडल अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इसकी कार्यप्रणाली को भारत के 22 राज्यों में साझा किया जा रहा है। इसके अलावा श्रीलंका और जाम्बिया जैसे देशों में भी इस मॉडल के अनुभवों का उपयोग किया जा रहा है।
किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह पुरस्कार?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान केवल एक सरकारी कार्यक्रम की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन लाखों किसानों की मेहनत की पहचान है जिन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाया। कार्यक्रम से जुड़े किसान बताते हैं कि रासायनिक इनपुट्स पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटाने और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिली है।
APCNF के अधिकारियों का कहना है कि यह पुरस्कार 18 लाख किसान परिवारों, सात लाख कृषि मजदूर परिवारों और उन महिला समूहों को समर्पित है जो इस परिवर्तन का हिस्सा बने हैं।
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ता वैश्विक ध्यान
Food Planet Prize 2026 ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि भविष्य की कृषि केवल अधिक उत्पादन पर नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और किसानों की आय के बीच संतुलन बनाने पर भी निर्भर करेगी। आंध्र प्रदेश का यह मॉडल अब दुनिया के सामने एक ऐसे प्रयोग के रूप में उभरा है, जिसे टिकाऊ कृषि के संभावित रास्तों में शामिल किया जा रहा है।