Assam Flood 2026: दो हफ़्ते बाद भी बेघर हैं लोग, असम में बाढ़ का ख़ौफ़ बरकरार, जानें 'गाँव कनेक्शन'की टीम ने क्या-क्या देखा
असम के ऊपरी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंज़र पैदा कर दिया है, जिसे यहाँ के निवासियों ने बीते कई दशकों में नहीं देखा। पिछले चार-पांच दिनों से 'गाँव कनेक्शन' की टीम ग्राउंड ज़ीरो से हालात का जायज़ा ले रही है। सड़कों पर गाड़ियों की जगह नावें चल रही हैं और बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति बेहद विभत्स और भयावह बनी हुई है।
ग्राउंड ज़ीरो पर सीनियर कैमरामैन मो. आरिफ के साथ पहुँचे 'गाँव कनेक्शन' के मैनेजिंग एडिटर मनीष मिश्रा ने बताया कि 19 जुलाई को आई इस भीषण बाढ़ को दो हफ़्ते से अधिक (2 अगस्त) बीत चुके हैं, लेकिन हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। पीड़ितों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर छिपाने की है। हालाँकि प्रशासन और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों द्वारा राशन और कपड़े बाँटे जा रहे हैं, लेकिन प्रभावितों के पास रहने के लिए छत नहीं है। राहत कार्य में बनारस समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से आए वालंटियर्स स्थानीय टीम के साथ मिलकर लगातार काम कर रहे हैं। मनीष मिश्रा आगे कहते हैं, "इस तरह की भयानक बाढ़ को कवर करने का मेरा यह पहला अनुभव है। छोटी सी नाव में उफ़नते पानी के बीच जाते हुए डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन जब बेघर हुए लोगों का दर्द देखता हूँ, तो अपना डर छोटा लगने लगता है।"
20 मिनट में बही 20 सालों की गाढ़ी कमाई
शिवसागर ज़िले के नेपालकुटी गाँव पहुँचने पर तबाही का मंज़र साफ़ नज़र आता है। इलाके के सबसे ऊँचे स्थान पर बने एक पेट्रोल पंप पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जलस्तर इतनी तेज़ गति से बढ़ा कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए छतों की ओर भागना पड़ा। पेट्रोल पंप पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिससे भारी नुकसान हुआ है। वहीं, खेतों में खड़ी गाड़ियाँ और मवेशी पानी के प्रचंड बहाव में बह गए।
गाँव के लोगों के अनुसार, नागालैंड की ओर से आने वाली नदी ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि 20 फ़ीट ऊँची सुनामी जैसी लहरें उठने लगीं। ग्रामीणों ने पूरी रात छतों पर खौफ़ के साये में काटी। जिन्हें अपना आशियाना बनाने में 20 साल से अधिक समय लगा था, उनका सब कुछ महज़ 20 मिनट में जलमग्न और तबाह हो गया।
मलबे के नीचे दबे शव, 25-30 लोग अभी भी लापता
बाढ़ के तांडव के बीच नेपालकुटी गाँव से करीब 25 से 30 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि बहकर आई गाद (Silt) और मकानों के मलबे के नीचे कई शव दबे हो सकते हैं। बेज़ुबान मवेशियों का तो कोई हिसाब ही नहीं है। ग्राउंड पर एक पीड़ित ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। वे जिस टूट चुके घर के मलबे पर खड़े थे, उसकी ओर इशारा करते हुए बोले, "इसी मलबे के नीचे मेरी पत्नी की लाश दबी हुई है।"
बाढ़ के पीछे जलवायु परिवर्तन और अवैध खनन बड़े कारण
असम में आई इस अप्रत्याशित बाढ़ के पीछे स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से तीन कारण बताए हैं:
- 1. जलवायु परिवर्तन (Climate Change): नागालैंड की पहाड़ियों में अचानक हुई 15 घंटे की मूसलाधार बारिश ने नदी के जलस्तर को अचानक रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया।
- 2. अवैध खनन (Mining): पहाड़ियों पर हो रहे खनन के कारण पानी के साथ भारी मात्रा में गाद (Silt) बहकर निचले इलाकों में आ गई है।
- 3.घुटनों तक जमी गाद: घरों में जमा हुई गाद इतनी गहरी है कि पैर रखते ही इंसान घुटनों तक धँस जाता है। इसे साफ़ करके दोबारा रहने लायक बनाने में लोगों को 5 से 10 साल लग सकते हैं।