Assam Floods 2026: 'मेरी पत्नी और 4 साल का बेटा मेरी आंखों के सामने बह गए', असम बाढ़ की सबसे दर्दनाक कहानियाँ
असम में आई विनाशकारी बाढ़ ने न सिर्फ घर और खेत बहा दिए, बल्कि सैकड़ों परिवारों की खुशियां भी अपने साथ बहा ले गई। कई लोगों ने अपने परिजनों को अपनी आंखों के सामने तेज बहाव में खो दिया। किसी को अपनों का शव मिला तो कई परिवार आज भी अपने प्रियजनों की तलाश में हैं। बाढ़ की तबाही झेल चुके असम के शिवसागर जिले के लोगों की आपबीती सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। ऐसे ही दो पीड़ित परिवारों ने अपनी दर्दभरी कहानी समाचार पोर्टल 'गाँव कनेक्शन' से साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे कुछ ही मिनटों में तेज बहाव ने उनके घर उजाड़ दिए और उनके अपने हमेशा के लिए उनसे बिछड़ गए।
गाँव कनेक्शन से बातचीत में बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इतनी भयावह बाढ़ नहीं देखी थी। अचानक आई पानी की तेज धारा ने देखते ही देखते पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। कई लोग घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हुए, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि मजबूत मकान भी कुछ ही देर में ढह गए। इस हादसे में कई परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए। किसी ने अपनी पत्नी खो दी, किसी का चार साल का मासूम बेटा आज भी लापता है, जबकि एक बच्ची पूरी रात बांस में फंसी रही और अगले दिन उसे सुरक्षित निकाला गया। इन पीड़ितों ने गांव कनेक्शन को उस भयावह मंजर की पूरी कहानी सुनाई।
"मेरी पत्नी और चार साल का बेटा पानी में बह गए"
गाँव कनेक्शन से बातचीत में पीड़ित देवीराम पानिका ने बताया कि हादसे के समय वह घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा, "हम बाहर थे, इसलिए समय पर घर नहीं पहुंच सके। घर की छत पर करीब 25 लोग एक साथ चढ़े हुए थे। मेरी पत्नी और मेरा चार साल का छोटा बेटा भी वहीं थे।" उन्होंने बताया कि पत्नी का शव तो मिल गया लेकिन बच्चे का अभी तक कोई अता-पता नहीं चल रहा है।
देवीराम ने कहा, "इतनी भयानक बाढ़ पहले कभी नहीं देखी, यह सुनामी जैसी थी। हम बचपन से यहीं रह रहे हैं। बाढ़ तो पहले भी आई, लेकिन इतनी बड़ी कभी नहीं आई। इसे सुनामी कह सकते हैं।"
"पत्नी और बेटे का हाथ पकड़ रखा था, लेकिन तेज बहाव ने तीनों को अलग कर दिया"
एक अन्य पीड़ित राजन पानिका ने गाँव कनेक्शन को बताया कि वह दूध बेचने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, "दोपहर करीब एक बजे तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन उसके बाद अचानक समुद्र जैसी ऊंची लहरों की तरह पानी गांव में घुस आया। करीब 2:30 बजे तक पानी आधी दीवार तक पहुंच गया। आसपास के सभी लोग हमारे घर में आ गए। बाद में मकान टूट गया तो हम लोग पुराने घर की छत पर चले गए। उन्होंने बताया कि सभी लोगों ने पुलिस-प्रशासन और परिचितों को फोन किया, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं पहुंच सकी। हमने पुलिस-प्रशासन समेत सभी लोगों को फोन किया, लेकिन किसी का कोई जवाब नहीं आया।"
राजन ने बताया, "कुछ ही देर बाद बड़े-बड़े पेड़ और बांस बहते हुए घर से टकराने लगे। पूरा छप्पर एक साथ टूटकर पानी में चला गया। मैं अपनी पत्नी और बच्चे का हाथ पकड़कर खड़ा था, लेकिन तेज बहाव में तीनों पानी के अंदर चले गए। फिर हाथ छूट गया और सब कुछ आंखों के सामने हो गया। जैसे-तैसे वह पानी से बाहर निकले और एक बांस पकड़कर खुद को बचाया। इसी दौरान उनकी नजर बेटी पर पड़ी। बेटी एक बांस में फंसी हुई दिखाई दी। बेटे को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उसी समय तेज बहाव के साथ लकड़ियां और पेड़ आने लगे। वह उसी में बह गया।"
उन्होंने बताया, "पानी इतना गंदा था कि नीचे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। जहां बच्चा था, वहां जाना जान जोखिम में डालने जैसा था। बाहर निकलने में ही डेढ़ घंटा लग गया। रात भर वहीं फंसे रहे। अगली सुबह गांव के युवकों ने उन्हें बांस से निकालकर एक घर की छत पर पहुंचाया। करीब 25 लोगों में से 21 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन चार लोग पानी में बह गए। पत्नी का शव 11 दिन बाद मिला। 11 दिन बाद पत्नी का शव बांस के पास एक गड्ढे में लकड़ियों के नीचे दबा मिला। पुलिस-प्रशासन आया और नाव से शव निकालकर अंतिम संस्कार कराया।"
पूरी रात बांस में फंसी रही 8 साल की बच्ची
हादसे में बची राजन की 7-8 साल की बच्ची ने गाँव कनेक्शन को बताया कि वह पूरी रात बांस में फंसी रही। सुबह होने पर लोगों ने उसे सुरक्षित निकाला। जब उससे पूछा गया कि क्या उसे मां की याद आती है, तो उसने धीमे स्वर में कहा, "हां, आती है।" बच्ची ने बताया कि हादसे के वक्त परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग हो गए थे।
घरों में जमा मिट्टी तो कुछ समय बाद साफ हो जाएगी, लेकिन जिन्होंने अपने परिवार के लोगों को खोया है, उनके दिलों के घाव भरने में बहुत लंबा समय लगेगा। असम की यह त्रासदी उन परिवारों के लिए ऐसी पीड़ा छोड़ गई है, जिसे शायद समय भी पूरी तरह नहीं भर पाएगा।