Assam Floods: बाढ़ ने छीना घर, अब फिर से आशियाना बसाने की कोशिश, ग्लोबल सिख टीम कर रही मदद
असम के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में राहत सामग्री पहुँचने के बाद अब बेघर परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित जगह पर रहना है। बच्चों और बुज़ुर्गों को पेड़ों के नीचे और तिरपाल के सहारे रात बितानी पड़ रही है। गाँव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट में ग्लोबल सिख टीम के एक सरदार जी ने बताया कि उनकी टीम अब ऐसे परिवारों के लिए घर बनाने में जुटी है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद राहत की ज़रूरत ख़त्म नहीं होती। कई परिवारों के घर पूरी तरह बह गए हैं और उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। ऐसे में राशन और दूसरी ज़रूरी चीज़ें मिलने के बावजूद परिवारों की मुश्किलें बरक़रार हैं। सबसे ज़्यादा परेशानी बच्चों और बुज़ुर्गों को हो रही है, जिन्हें खुले में या तिरपाल के नीचे रहना पड़ रहा है।
गाँव कनेक्शन की टीम ने बाढ़ प्रभावित इलाक़े में राहत कार्य कर रही ग्लोबल सिख टीम के एक सरदार जी से बातचीत की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में राशन, मेडिकल सहायता और बर्तनों जैसी ज़रूरी चीज़ें पहुँचाने के बाद अब टीम का ध्यान उन परिवारों के लिए घर बनाने पर है, जिनके मकान बाढ़ में बह गए हैं।
राशन है, सामान है... लेकिन सिर पर छत नहीं
गाँव कनेक्शन से बातचीत में सरदार जी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राशन और ज़रूरी सामान पहुँच चुका है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी परेशानी अब रहने की जगह को लेकर है। उन्होंने बताया कि कई परिवारों के बच्चे और बुज़ुर्ग पेड़ों के नीचे, खुले में या तिरपाल लगाकर रात बिता रहे हैं। लगातार बारिश और धूप के बीच इस तरह रहना उनके लिए बेहद मुश्किल है। ऐसे में टीम ने तय किया कि जिन परिवारों के घर बाढ़ में पूरी तरह या काफ़ी हद तक बह गए हैं, उनके लिए नए घर बनाए जाएँ। सरदार जी के मुताबिक़, उनकी कोशिश ज़्यादा से ज़्यादा प्रभावित परिवारों तक पहुँचने और उन्हें दोबारा सुरक्षित छत देने की है।
15 से 20 मज़दूर मिलकर बनाते हैं एक घर
ग्लोबल सिख टीम के अनुसार, एक घर बनाने में लगभग 15 से 20 मज़दूर लगते हैं और सामान्य परिस्थितियों में एक दिन में एक घर तैयार किया जा सकता है। जिस इलाक़े में गाँव कनेक्शन की टीम पहुँची, वहाँ करीब 9 से 10 घरों के निर्माण का काम शुरू किया गया है। बाढ़ में जिन लोगों के घर बह गए हैं, वे टीम के पास अपना पंजीकरण करा रहे हैं। इसके बाद टीम के सदस्य ख़ुद मौके पर जाकर नुकसान का आकलन करते हैं। इसी आधार पर यह तय किया जाता है कि किन परिवारों को घर बनाने में मदद की ज़रूरत है। हालाँकि, राहत और निर्माण का काम आसान नहीं है। कई प्रभावित इलाक़ों में सामान्य गाड़ी तक पहुँचाना मुश्किल है। ऐसे में निर्माण सामग्री और मज़दूरों को मौके तक पहुँचाना भी एक बड़ी चुनौती है।
पहले राशन, फिर मेडिकल मदद और अब घर
सरदार जी ने बताया कि उनकी टीम ने बाढ़ के बाद चरणबद्ध तरीके से राहत कार्य किया। शुरुआत में लोगों को राशन पहुँचाया गया। इसके बाद मेडिकल सहायता दी गई और जिन परिवारों को बर्तनों की ज़रूरत थी, उन्हें घरेलू सामान उपलब्ध कराया गया। टीम ने करीब 1,200 स्टील के बर्तनों की किट तैयार की है, जिन्हें प्रभावित परिवारों के बीच बाँटा जा रहा है। बाढ़ में कई लोगों की रसोई का पूरा सामान बह गया है। ऐसे में बर्तन और खाना बनाने का सामान मिलने से परिवारों को दोबारा सामान्य ज़िंदगी शुरू करने में मदद मिल सकती है।
बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए सुरक्षित छत सबसे ज़रूरी
सरदार जी ने बताया कि राहत कार्य के दौरान टीम ने महसूस किया कि कई लोगों को इस समय खाने से ज़्यादा सुरक्षित जगह की ज़रूरत है। बाढ़ में घर और सामान खो चुके परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बच्चों और बुज़ुर्गों की है।
लगातार बारिश के बीच पेड़ों के नीचे या तिरपाल के सहारे रात गुज़ारना उनके लिए बेहद मुश्किल है। इसलिए अब घर बनाने का काम राहत अभियान का अहम हिस्सा बन गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आपदा के समय हर व्यक्ति को सिर्फ़ सामान की ज़रूरत नहीं होती। कई बार लोगों को किसी के पास बैठने, उनका दर्द सुनने और उन्हें यह भरोसा देने की ज़रूरत होती है कि वे अकेले नहीं हैं। ग्लोबल सिख टीम के पास आपदा राहत का करीब 14-15 साल का अनुभव है, जो ज़मीनी स्तर पर लोगों की ज़रूरत समझने में मदद करता है।
स्थानीय प्रशासन और वॉलंटियर्स के साथ मिलकर काम
ग्लोबल सिख टीम अलग-अलग प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्य करती रही है। इस अनुभव के आधार पर टीम प्रभावित इलाक़ों में स्थानीय प्रशासन और वॉलंटियर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। जहाँ सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है, वहाँ पहले पहुँचने और ज़रूरतमंद परिवारों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। टीम के सदस्य घर-घर जाकर स्थिति देखते हैं और फिर परिवार की ज़रूरत के हिसाब से मदद तय करते हैं। सरदार जी ने बताया कि कई बार पीड़ित परिवार अपनी पूरी परेशानी शब्दों में नहीं बता पाते। घर के अंदर जाकर सामान, कपड़े और रसोई की स्थिति देखने पर ही बाढ़ से हुए वास्तविक नुकसान का अंदाज़ा होता है।
बाढ़ के बाद अब ज़िंदगी बसाने की कोशिश
Assam Floods: राशन मिला, लेकिन छत नहीं... पेड़ों के नीचे रात गुज़ार रहे बच्चे और बुज़ुर्ग, अब घर की आसAssam Floods: राशन मिला, लेकिन छत नहीं... पेड़ों के नीचे रात गुज़ार रहे बच्चे और बुज़ुर्ग, अब घर की आसअसम में बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन प्रभावित परिवारों की मुश्किलें अभी ख़त्म नहीं हुई हैं। जिनके घर बह गए, उनके लिए राहत सामग्री के बाद अब पुनर्वास सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है। गाँव कनेक्शन की इस ग्राउंड रिपोर्ट में ग्लोबल सिख टीम के सरदार जी ने बताया कि उनकी कोशिश है कि बाढ़ में घर गंवा चुके ज़्यादा से ज़्यादा परिवारों को फिर से सुरक्षित छत मिल सके। राशन और ज़रूरी सामान ने लोगों को मुश्किल समय में सहारा दिया है, लेकिन अब घर बनना उनके लिए अपनी ज़िंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की पहली शुरुआत है।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
कैमरा: मो. आरिफ