Assam Floods: 6 तस्वीरों से समझें असम के बाढ़ पीड़ितों का दर्द, तिरपाल के नीचे ज़िंदगी सहेजने की जद्दोजहद में नेपालीखुटी के लोग
असम के शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिले इस समय बाढ़ की भारी विभीषिका से जूझ रहे हैं। हजारों लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों और ऊँचे स्थानों पर बने अस्थायी टेंटों में शरण लेने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का वितरण और मदद पहुँचाने का काम जारी है, लेकिन धानसिरी जैसी प्रमुख नदियों का खतरे के निशान से ऊपर बहना स्थिति को लगातार गंभीर बनाए हुए है।
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 82 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से अकेले शिवसागर जिले से 45 मौतें दर्ज की गई हैं। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने के बाद भी शिवसागर के नेपालीखुटी गाँव में संकट खत्म नहीं हुआ है। चारों तरफ फैला कीचड़ और गंदगी अब बीमारियों का नया खतरा बनकर उभरी है, जबकि लापता लोगों का सटीक आँकड़ा जुटाना अब भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पानी उतरने के बाद गाँव के आंगन में मोटी कीचड़ की परत, बिखरा सामान और टूटे-फूटे घर नजर आ रहे हैं। खुले आसमान के नीचे सूखते कपड़े और उजड़ा हुआ माहौल तबाही के खौफनाक मंजर की गवाही दे रहा है।
बाढ़ से बेघर हुए ग्रामीण ऊँचे स्थानों पर नीले और पीले तिरपाल के अस्थायी टेंट बनाकर रहने को मजबूर हैं। बेबसी और अनिश्चितता के बीच एक व्यक्ति टेंट के बाहर बैठकर अपने उजड़े आशियाने को निहार रहा है।
बाढ़ के बाद घरों के बाहर जमा मलबे और कीचड़ के बीच ग्रामीण अपने बचे-कुचे सामान को सहेजने की कोशिश कर रहे हैं। बुनियादी ढाँचे को पहुँचे नुकसान के कारण लोगों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।
बाढ़ के बाद फैलने वाले संक्रमण और जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मोबाइल मेडिकल यूनिट गाँव में पहुँची है। स्वास्थ्यकर्मी खुले मैदान में टेबल लगाकर प्रभावित ग्रामीणों की जाँच कर रहे हैं और दवाएँ बाँट रहे हैं।
मेडिकल वैन के आसपास जमा हुए ग्रामीण अपनी बारी और इलाज का इंतजार कर रहे हैं। भीषण तबाही के बाद अब लोगों का पूरा ध्यान अपने परिवार को बीमारियों से सुरक्षित रखने पर टिका हुआ है।
विशाल बरगद के पेड़ की छाँव और मिट्टी के टीले पर एकत्र हुए ग्रामीण आपस में आपदा के प्रभाव और राहत कार्यों पर चर्चा करते दिख रहे हैं। अनिश्चित माहौल के बीच गाँव के बुजुर्ग, युवा और बच्चे बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद में एक साथ मौजूद हैं।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
तस्वीरें: मों आरिफ