Assam Floods: गाद में दबी ज़िंदगियाँ, लापता को अपनों का इंतज़ार, बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुँचे विधायक अखिल गोगोई ने उठाए कई सवाल

Mansi | Aug 04, 2026, 12:40 IST
बाढ़ के बाद कई परिवार अपने प्रियजनों की खोज में भटक रहे हैं। शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने राहत अभियानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई दिनों के बाद भी लापता लोगों का कोई पता नहीं चला है। प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी सहायता नहीं पहुँच रही है, और उन्होंने बाढ़ का एक प्रमुख कारण अवैध खनन को भी बताया है।
असम बाढ़ पर विधायक अखिल गोगोई ने उठाए कई सवाल

किसी का घर उजड़ गया तो किसी का परिवार बिछड़ गया और कई लोगों की ज़िंदगी अब भी अपनों की तलाश में थमी हुई है। बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए हर बीतता दिन एक नई पीड़ा लेकर आ रहा है। मिट्टी और गाद में दबी यादों के बीच लोग अपने घर नहीं, बल्कि अपनी ज़िंदगी के बचे हुए निशान तलाश रहे हैं। कई घरों में चूल्हा नहीं जला, तो कई परिवार अब भी इस उम्मीद में बैठे हैं कि शायद उनका अपना लौट आए।



इन्हीं बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने पहुँचे शिवसागर से विधायक और रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की। गाँव कनेक्शन से बातचीत में उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई परिवार ऐसे हैं, जिनके परिजन बाढ़ में लापता हो गए, लेकिन कई दिनों बाद भी उनका पता नहीं चल पाया है।



'मेरी पत्नी और बच्चा आज तक नहीं मिले'

अखिल गोगोई ने एक ऐसे परिवार का ज़िक्र किया, जिसकी कहानी सुनकर वहाँ मौजूद लोगों की आँखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति की पत्नी और बच्चा बाढ़ के दौरान लापता हो गए। परिवार का कहना है कि आज तक दोनों का कोई पता नहीं चला। कुछ लोगों का मानना है कि तेज़ बहाव के साथ आई गाद में कई शव दब गए, जिससे तलाश का काम और मुश्किल हो गया है। अखिल गोगोई ने कहा कि ऐसे कई परिवार हैं, जो आज भी अपनों का इंतज़ार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, उन्हें जल्द राहत और सहायता मिलनी चाहिए।




'सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों तक मदद नहीं पहुँची'

अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और सरकार की मौजूदगी पर्याप्त नहीं दिखी। उनका कहना था कि शुरुआती दिनों में स्थानीय लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों ने आगे बढ़कर राहत पहुँचाई, जबकि कई प्रभावित परिवार सरकारी मदद का इंतज़ार करते रहे। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और जिनकी खेती-बाड़ी नष्ट हो गई है, उनके पुनर्वास के लिए ठोस योजना बनाई जानी चाहिए।




अवैध खनन पर भी उठाए सवाल

बाढ़ के कारणों पर अपनी राय रखते हुए अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि नागालैंड की पहाड़ियों से लगे इलाक़ों में कथित अवैध कोयला और पत्थर खनन ने स्थिति को और गंभीर बनाया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई की माँग की। हालाँकि, अवैध खनन और बाढ़ के बीच संबंध को लेकर यह अखिल गोगोई का आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।



मुआवज़े और पुनर्वास की माँग

अखिल गोगोई ने केंद्र और राज्य सरकार से माँग की कि जिन परिवारों ने अपने सदस्य खोए हैं या जिनके घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें पर्याप्त मुआवज़ा दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत कार्यों में तेज़ी लाने की ज़रूरत है, ताकि लोग सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। इन गाँवों में अब सबसे ज़्यादा दिखाई देता है सन्नाटा। टूटे घरों के बीच बिखरा सामान, गाद में दबे सपने और अपनों की तलाश में भटकती नज़रें आज भी इस त्रासदी की गवाही दे रही हैं। जिन लोगों ने सब कुछ खो दिया, उनके लिए बाढ़ केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल देने वाला हादसा बन गई है। अब इन लोगों को सिर्फ़ राहत सामग्री नहीं, बल्कि भरोसे, पुनर्वास और समय पर सरकारी सहायता का इंतज़ार है।



रिपोर्ट: मनीष मिश्रा



फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ़

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