Assam Floods: टीन की छत पर गुज़री पूरी रात, नाव आई तो बची जान... अब कीचड़ में दबी ज़िदगी समेट रहे हैं नेपालकुटी के लोग
बाढ़ के दिनों में सबसे मुश्किल पल वह नहीं होता जब पानी घर में घुसता है, बल्कि वह होता है जब यह समझ आ जाता है कि अब बचने का कोई रास्ता नहीं बचा। असम के नेपाल कुटी गाँव में रहने वाले कई परिवारों ने यही मंजर देखा। रातभर टीन की छत पर बैठे लोग बस एक नाव का इंतज़ार करते रहे। नीचे उफनता पानी था और ऊपर आसमान। उन्हें नहीं पता था कि सुबह होगी भी या नहीं।
गाँव कनेक्शन की टीम जब नेपाल कुटी पहुँची तो बाढ़ का पानी उतर चुका था, लेकिन घरों के भीतर अब भी कीचड़ जमा था। कोई टूटी चारपाई साफ़ कर रहा था, कोई भीगी लकड़ियाँ सुखा रहा था, तो कोई अपने उजड़े घर के बीच खड़ा होकर बस ख़ामोशी से सब देख रहा था।
रात एक बजे नाव आई, तब जाकर जान बची
सिद्धि काले ने बताया कि पानी इतना तेज़ी से बढ़ा कि परिवार को कुछ भी संभालने का समय नहीं मिला। "हम लोग रात एक बजे तक टीन की छत पर बैठे रहे। चारों तरफ़ सिर्फ़ पानी ही पानी था। उसके बाद नाव आई और हम लोगों को वहाँ से निकाला गया। घर से निकलते समय कुछ भी साथ नहीं ले जा सके। "न कपड़े, न बर्तन, न अनाज... सब कुछ पानी में छूट गया।"
घर के अंदर आज भी बाढ़ के निशान
सिद्धि के घर की दीवारों पर आज भी पानी का निशान साफ़ दिखाई देता है। घर के भीतर फिसलन भरी कीचड़ है, रसोई पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और गैस चूल्हा कई दिनों से नहीं जला। वह बताते हैं, "राहत की गाड़ियाँ थोड़ा-बहुत खाना पहुँचा रही हैं, लेकिन पूरा दिन इंतज़ार करना पड़ता है।"
मवेशियों की मौत और लापता लोगों का दर्द
नेपाल कुटी में सिर्फ़ घर ही नहीं उजड़े, कई परिवारों के मवेशी भी बाढ़ में बह गए। ग्रामीण बताते हैं कि आसपास के इलाक़ों में बड़ी संख्या में बकरियाँ और दूसरे जानवर मारे गए। कई लोगों के शव भी अब तक नहीं मिल पाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अब भी कई परिवार अपने लापता रिश्तेदारों का इंतज़ार कर रहे हैं।
15 दिन से कीचड़ हटाकर फिर से घर बनाने की कोशिश
गाँव में माजे माली अपने घर से कीचड़ और लकड़ियाँ निकालते मिले। पेशे से ड्राइवर माजे कहते हैं कि बाढ़ ने उनकी पूरी गृहस्थी तबाह कर दी। "करीब 15 दिन से घर साफ़ कर रहे हैं। हर कदम संभालकर रखना पड़ता है। पता नहीं कीचड़ के नीचे कील है या काँच, पैर कट सकता है।" वह भी उस रात टीन की छत पर ही थे। किसी तरह परिवार के साथ जान बची, लेकिन घर का लगभग सारा सामान बर्बाद हो गया। घर के बाहर निकाली गई भीगी लकड़ियाँ अब दोबारा बिस्तर और घरेलू सामान बनाने के काम आएँगी। टूटा फ़्रिज, खराब बर्तन और मिट्टी में दबा सामान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि बाढ़ सिर्फ़ पानी नहीं लाती, बल्कि वर्षों की मेहनत भी बहा ले जाती है।
राहत मिली, लेकिन ज़िंदगी फिर से बसाना सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल कुटी के लोग कहते हैं कि राहत सामग्री मिल रही है, लेकिन असली लड़ाई अब शुरू हुई है। घरों की सफ़ाई, रहने लायक़ जगह बनाना, रोज़गार शुरू करना और बच्चों की ज़िंदगी पटरी पर लाना आसान नहीं होगा।
गाँव कनेक्शन की इस ग्राउंड रिपोर्ट में सबसे गहरी तस्वीर टूटी दीवारों की नहीं, बल्कि उन लोगों की है जो मौत के इतने क़रीब जाकर लौटे हैं। अब वे हर सुबह अपने घर की कीचड़ साफ़ करते हैं और हर रात यही दुआ करते हैं कि फिर कभी उन्हें टीन की छत पर बैठकर नाव का इंतज़ार न करना पड़े।