Banana Stem-A Green Solution: बेकार समझा जाता था केले का तना, आज विश्व भर में बन रहा है हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

Gaon Connection | Apr 26, 2026, 18:22 IST
Image credit : Gaon Connection Network
केले के तनों को अब फेंकने का सामान नहीं समझा जाएगा, बल्कि यह हमारे पर्यावरण के लिए एक नई दिशा दिखा सकते हैं। भारत जैसे देशों में इनसे उत्कृष्ट कपड़े और शानदार कागज बनाया जा सकता है। इससे वनों की कटाई को रोकने में मदद मिलेगी और प्रदूषण का स्तर भी घटेगा।
<p>केले से बना कपड़ा<br></p>

दुनिया वर्तमान में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है, जो संसाधन की कमी, पर्यावरणीय गिरावट और जलवायु परिवर्तन जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रही है। इन मुद्दों के लिए पारंपरिक विकास मॉडल के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। इस संदर्भ में, एक सामान्य कृषि उप-उत्पाद, केले का तना, एक उल्लेखनीय वैज्ञानिक संसाधन के रूप में उभर रहा है जिसमें 'हरित अर्थव्यवस्था' में योगदान करने की क्षमता है।



केले के तने में छिपा है बड़ा संसाधन

केले का तना पत्तियों की परतों से बना होता है और इसमें पानी, सेलूलोज़ तथा लिग्निन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ताज़े तनों में लगभग 80-90% पानी, जबकि सूखे तनों में 60-65% सेलूलोज़ होता है। यही कारण है कि यह फाइबर उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है।



भारत के लिए बड़ा अवसर

भारत दुनिया के प्रमुख केला उत्पादक देशों में शामिल है, जहां हर साल करीब 3.4 से 3.5 करोड़ टन केले का उत्पादन होता है। इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्ध तनों को यदि उद्योगों में इस्तेमाल किया जाए, तो यह किसानों और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।



कपड़ा उद्योग में बढ़ती मांग

Image credit : Gaon Connection Network

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि केले के तने से निकाले गए फाइबर की मजबूती जूट और सन के बराबर होती है। इससे बने वस्त्र हल्के, मजबूत और बायोडिग्रेडेबल होते हैं। साथ ही यह हाइपोएलर्जेनिक भी है, जिससे संवेदनशील त्वचा वालों के लिए बेहतर विकल्प बनता है।



कागज उद्योग को मिलेगा नया विकल्प

कागज उद्योग में केले के तनों का उपयोग बढ़ने से पेड़ों की कटाई कम हो सकती है। यदि लकड़ी आधारित कच्चे माल की जगह कृषि अपशिष्ट का उपयोग हो, तो जंगलों पर दबाव घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।



ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी

आमतौर पर केले के तनों को खेतों में जला दिया जाता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी गैसें निकलती हैं। लेकिन इन्हें उद्योगों में इस्तेमाल करने से यह प्रदूषण रोका जा सकता है। अनुमान है कि एक टन प्राकृतिक फाइबर का उपयोग लगभग 1.5 से 2 टन CO₂ उत्सर्जन बचा सकता है।



वैश्विक बाजार में बढ़ेगी मांग

दुनिया भर के उपभोक्ता अब पर्यावरण-अनुकूल और कम कार्बन फुटप्रिंट वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में केले के फाइबर से बने उत्पाद वैश्विक बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो सकते हैं। जिस केले के तने को कभी कृषि अपशिष्ट समझा जाता था, वही अब हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन सकता है। कपड़ा, कागज और अन्य उद्योगों में इसका उपयोग पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय और टिकाऊ विकास—तीनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। Agriculture Department, Govt. of Bihar की तरफ से ये जानकारी साझा की गई है।

Tags:
  • banana stem fiber
  • banana stem paper industry
  • banana fiber textile
  • green economy India
  • sustainable agriculture waste
  • eco friendly fabric
  • greenhouse gas reduction
  • banana farming India
  • banana stem benefits
  • climate friendly industries