आम खाने से पहले हो जाएं सावधान! सड़े, फफूंद वाले आमों से बन रहा मैंगो जूस, केमिकल से पकाए आमों का बढ़ रहा ख़तरा
गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार आ जाती है। लोग न केवल आम को फल के रूप में खाना पसंद करते हैं, बल्कि आम का जूस, शेक और अन्य पेय पदार्थों की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। सड़क किनारे लगने वाले जूस सेंटरों से लेकर बड़े प्रोसेसिंग यूनिट तक, हर जगह आम की खपत बढ़ जाती है। लेकिन इसी बढ़ती मांग के साथ फलों और जूस के कारोबार में मिलावट तथा खाद्य सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बढ़ने लगते हैं।
सड़े-गले आमों से जूस बनाने की कोशिश
हाल ही में गुजरात में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसे आम बरामद किए गए, जिन्हें जूस बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। जांच में पाया गया कि कई आम सड़े हुए थे, उनमें कीड़े लगे हुए थे और उन पर फफूंद भी लगी हुई थी। ऐसे फलों का इस्तेमाल यदि जूस या अन्य खाद्य उत्पादों में किया जाए तो यह उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
कैल्शियम कार्बाइड से पकाए जा रहे थे आम
इसी तरह असम के गुवाहाटी स्थित फैंसी बाजार में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की छापेमारी के दौरान आमों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल का मामला सामने आया। अधिकारियों ने पूरे स्टॉक को जब्त कर नष्ट कर दिया। कैल्शियम कार्बाइड एक प्रतिबंधित रसायन है, जिसका उपयोग फलों को जल्दी पकाने के लिए किया जाता है। इससे फल देखने में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इनके सेवन से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
जूस पीते समय और फल खरीदते समय रखें ये सावधानियां
अगर आप भी बाजार से चमचमाते फल और एकदम ताज़ा दिखने वाली सब्जियां खरीदकर यह सोचते हैं कि आप अपने परिवार को हेल्दी भोजन दे रहे हैं, तो थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। आजकल फलों और सब्जियों को आकर्षक दिखाने, जल्दी पकाने और लंबे समय तक ताज़ा बनाए रखने के लिए कई तरह के रसायनों और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। ये हानिकारक तत्व भोजन के जरिए हमारे शरीर में पहुंचकर धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
इसी मुद्दे पर सीएसआईआर-भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (IITR) के पूर्व निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक धवन कहते हैं, "फल और सब्जियों पर मौजूद रासायनिक अवशेषों का प्रभाव हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता। कई बार ये शरीर में धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं और लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिए और फलों-सब्जियों को अच्छी तरह साफ करके ही इस्तेमाल करना चाहिए।"
बाहरी चमक देख न खरीदें फल
बाजार में बढ़ती मिलावट और रासायनिक उपयोग के बीच यह जरूरी हो जाता है कि उपभोक्ता केवल फल और सब्जियों की बाहरी चमक देखकर फैसला न करें, बल्कि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान दें। डॉ. आलोक धवन ने सुझाव दिया, उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे आम या अन्य फल खरीदते समय उनकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें।
- बहुत अधिक चमकीले, एक समान रंग वाले या असामान्य रूप से जल्दी पके हुए फल खरीदने से बचें। फलों को खाने से पहले अच्छी तरह चलते साफ पानी या फिर गुनगुने पानी से धोएं।
- पानी से अच्छे से धोने के बाद कम से कम कोशिश करें की एक दिन तक फलों को रख दें, अगले दिन खाएं ताकि फलों की त्वचा पर लगे कैमिकल लगभग खत्म हो जाएं।
- जहां तक संभव हो विश्वसनीय दुकानों या विक्रेताओं से ही खरीदारी करें। सड़क किनारे बिकने वाले जूस का सेवन करते समय भी साफ-सफाई और इस्तेमाल किए जा रहे फलों की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।
सेहत के लिए कितना खतरनाक है ऐसा फल?
डॉ. आलोक धवन कहते हैं, सड़े, फफूंद लगे या कीड़ों से प्रभावित फलों में हानिकारक सूक्ष्मजीव और विषैले तत्व विकसित हो सकते हैं। ऐसे फलों से बने जूस या खाद्य पदार्थ खाने से फूड पॉइजनिंग, पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी, दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। वहीं रसायनों से पकाए गए फलों का लंबे समय तक सेवन शरीर के लिए और भी अधिक नुकसानदायक साबित हो सकता है।