Assam Floods: 'टीवी पर जो दिखता है, हक़ीक़त उससे ज़्यादा दर्दनाक है'... असम बाढ़ देखकर भावुक हुईं भूमि पेडनेकर, लोगों से की ये अपील
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाली भूमि पेडनेकर गुरूवार (6 अगस्त) को असम के भीषण बाढ़ प्रभावित ज़िले शिवसागर पहुँचीं। बाढ़ के पानी और कठिन परिस्थितियों के बीच भूमि ने पूरा दिन प्रभावित इलाकों में बिताया। उन्होंने भारत डिजास्टर रिलीफ फाउंडेशन (BDRF) की टीम और स्थानीय वॉलंटियर्स के साथ मिलकर ज़मीनी स्तर पर राहत सामग्री वितरित की और बाढ़ पीड़ितों का हालचाल जाना।
भीषण तबाही के बाद भी ग्राउंड जीरो पर पहुँचीं भूमि ने पीड़ितों की समस्याओं को करीब से देखा और समझा। कमर तक भरे पानी और कीचड़ के बीच प्रभावित परिवारों से मुलाकात करते हुए उन्होंने हर संभव मदद पहुँचाने की प्रतिबद्धता जताई। दिन के समय राहत बाँटने के साथ-साथ देर रात तक वे क्षेत्र में मुस्तैद रहीं और लोगों को सोलर लाइट सहित अन्य ज़रूरी सामग्री प्रदान की। उन्होंने गाँव कनेक्शन से खास बातचीत की है। आइये जानते हैं कि उन्होंने बाढ़ और प्रभावितों को लेकर क्या कहा।
'ज़मीन पर बने हालात कल्पना से परे'
गाँव कनेक्शन से बातचीत के दौरान भूमि पेडनेकर ने बताया कि टीवी और वीडियो (विजुअल्स) में बाढ़ का दृश्य देखने और खुद ग्राउंड पर आकर स्थिति को महसूस करने में ज़मीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने कहा, "हम अपने घरों में बैठकर खबरें और तस्वीरें देखते हैं, लेकिन जब आप खुद यहाँ आकर देखते हैं, तो हालात ऐसे हैं जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।"
भूमि ने बताया कि बाढ़ आए तीन हफ्ते से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन कई इलाकों में अभी भी कमर तक पानी भरा हुआ है। जहाँ पानी उतर भी रहा है, वहाँ केवल कीचड़, मलबा और तबाही का मंज़र बचा है। लोगों का सब कुछ बह चुका है और उनके सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसके आगे क्या?
फेज़ 2 की ज़रूरतें: राशन के बाद अब पुनर्वास, मेडिकल और शिक्षा पर ध्यान
भूमि ने बाढ़ राहत के अगले चरण (फेज़ 2) पर ज़ोर देते हुए कहा कि शुरुआती दौर में राशन और बुनियादी सामग्री पहुँचना शुरू हो गई है। लेकिन जैसे-जैसे पानी कम हो रहा है प्रभावितों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं। उन्होंने बताया कि इस समय लोगों को मुख्य रूप से बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ, बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था और ढहे हुए मकानों का पुनर्निर्माण और बिजली न होने के कारण सुरक्षा के लिहाज़ से सोलर लाइट्स और रहने के लिए मकानों की सबसे ज्यादा ज़रूरत है। जो भी जितनी मदद कर सकता है इस समय उसे उतनी मदद जरूर करनी चाहिए।
क्लाइमेट चेंज की मार और 'सेवा भावना' का संदेश
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर चिंता जताते हुए भूमि ने कहा कि आज हम जिस दौर में जी रहे हैं, वहाँ ज़्यादातर प्राकृतिक आपदाएँ क्लाइमेट चेंज की वजह से ही तीव्र (Accelerate) हो रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले सालों में भी उन्होंने BDRF, कैटो (Ketto) और स्थानीय टीमों के साथ मिलकर जम्मू, हिमाचल, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में व्यापक स्तर पर आपदा राहत का काम किया है।
देशवासियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा, "हमारे देश की सबसे खूबसूरत बात हमारी 'सेवा भावना' है। मैं सभी नागरिकों से कहूँगी कि आप जितने भी लोगों की मदद कर सकते हैं चाहे एक इंसान की करें या दस की आगे आएँ। असम के लोगों को सच में इस वक्त हमारी ज़रूरत है।"
'माता-पिता से मिली प्रेरणा और वॉलंटियर्स का बढ़ाया हौसला'
जब उनसे पूछा गया कि सोशल इश्यूज़ और आपदा राहत के लिए वे इतनी ऊर्जा कहाँ से लाती हैं तो भूमि ने इसका श्रेय अपने संस्कारों को दिया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता बचपन से ही 'कम्युनिटी सर्विस' (समाज सेवा) में गहरा विश्वास रखते थे, वहीं से उन्हें यह प्रेरणा मिलती है।
ग्राउंड पर आने के अपने मकसद को स्पष्ट करते हुए भूमि ने कहा कि कई हफ्तों से जो वॉलंटियर्स और संस्थाएँ यहाँ दिन-रात काम कर रही हैं, उनका मनोबल बढ़ाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इंटरनेट पर BDRF जैसी कई विश्वसनीय संस्थाओं की जानकारी उपलब्ध है; लोग चाहें तो ऑन-ग्राउंड आकर जुड़ें या डोनेशन के ज़रिये अपना योगदान दें।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
कैमरा: मो. आरिफ