बदलने वाली है स्कूलों की व्यवस्था? नई SMC Guidelines 2026 में शिक्षा मंत्रालय ने बदले कई नियम, जानें अभिभावकों को मिलेंगे कौनसे अधिकार?
देश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने नई School Management Committee (SMC) Guidelines 2026 जारी की हैं, जिनका मकसद स्कूलों में समुदाय और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाना, बच्चों की पढ़ाई पर निगरानी मजबूत करना और स्कूल प्रबंधन को ज्यादा जवाबदेह बनाना है।
नई गाइडलाइंस लागू होने के बाद सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में स्कूल प्रबंधन का ढांचा काफी बदल सकता है। हालांकि निजी स्कूलों के विरोध के बाद केंद्र सरकार को अलग से स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों पर ये नियम अनिवार्य नहीं होंगे।
क्या है SMC और क्यों अहम है?
SMC यानी School Management Committee एक ऐसी समिति होती है जिसमें अभिभावक, शिक्षक, स्थानीय प्रतिनिधि और समुदाय के सदस्य शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य स्कूलों के कामकाज, बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और विकास योजनाओं की निगरानी करना होता है।सरकार का मानना है कि अगर अभिभावक और समुदाय सीधे स्कूल प्रबंधन से जुड़ेंगे तो शिक्षा व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और जिम्मेदार बनेगी।
नई गाइडलाइंस में क्या-क्या बदला?
नई SMC Guidelines 2026 में कई बड़े बदलाव किए गए हैं।
1) अब स्कूलों में SMC का गठन शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर करना होगा। समिति की पहली बैठक गठन के एक सप्ताह के भीतर आयोजित करना अनिवार्य होगा।
2) गाइडलाइंस के अनुसार अब SMC केवल प्राथमिक स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 12 तक लागू की जाएगी। कई राज्यों में पहले जो School Management Development Committees (SMDCs) चलती थीं, उन्हें अब SMC के तहत लाया जाएगा।
3) सरकार ने समिति के आकार को भी छात्र संख्या से जोड़ दिया है। 100 तक छात्रों वाले स्कूलों में 12 से 15 सदस्य, 100 से 500 छात्रों वाले स्कूलों में 15 से 20 सदस्य और 500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों में 20 से 25 सदस्य रखे जा सकेंगे।
4) नई गाइडलाइंस में हर महीने नियमित बैठक अनिवार्य की गई है। साथ ही स्कूलों को तीन साल का School Development Plan तैयार करना होगा, जिसे हर साल अपडेट किया जाएगा। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल शिक्षा, बच्चों की सीखने की क्षमता और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम होगा।
बच्चों की सुरक्षा और उपस्थिति पर खास फोकस
नई नीति में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और नियमित उपस्थिति पर भी जोर दिया गया है। मंत्रालय ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों की उपस्थिति और शिक्षकों की सक्रियता पर लगातार निगरानी रखें ताकि सीखने के परिणाम बेहतर हो सकें।
निजी स्कूलों में क्यों हुआ विवाद?
नई गाइडलाइंस जारी होने के बाद निजी स्कूल संगठनों ने चिंता जताई कि क्या अब सभी निजी स्कूलों में भी SMC बनाना अनिवार्य होगा। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि RTE Act की धारा 2(n)(iv) के तहत आने वाले निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल, जिन्हें सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती, इन नियमों से बाहर रहेंगे। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि ऐसे स्कूल स्वेच्छा से SMC बना सकते हैं ताकि पारदर्शिता और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ सके।
नई व्यवस्था के तहत माता-पिता को मिलेंगे कौनसे अधिकार?
नई SMC Guidelines 2026 के बाद स्कूलों और अभिभावकों के रिश्ते में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब स्कूल सिर्फ अभिभावकों को “फीस देने वाला” पक्ष मानकर नहीं चल सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत माता-पिता सीधे School Management Committee (SMC) का हिस्सा बन सकेंगे और स्कूल प्रशासन से सुरक्षा, बुलिंग, साफ-सफाई, पारदर्शिता और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सवाल पूछ सकेंगे।
गाइडलाइंस में पहली बार बच्चों की emotional safety और mental well-being को भी औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। इसके अलावा समुदाय की भागीदारी को भी स्कूल प्रशासन का अहम हिस्सा बनाया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि SMC में करीब 75 प्रतिशत सदस्य माता-पिता या अभिभावक होंगे, जिससे स्कूल प्रबंधन में उनकी सीधी भूमिका और प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा।
सरकार का बड़ा उद्देश्य क्या है?
सरकार इन गाइडलाइंस को National Education Policy 2020 से जोड़कर देख रही है। उद्देश्य यह है कि स्कूल सिर्फ प्रशासनिक संस्थान न रहें, बल्कि समुदाय आधारित शिक्षा मॉडल विकसित हो, जहाँ अभिभावक भी फैसलों का हिस्सा बनें। शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि अगर SMC सही तरीके से काम करती हैं तो सरकारी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ सकती है, ड्रॉपआउट कम हो सकते हैं और बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।