इस राज्य में 26 साल बाद बढ़ी KCC लोन लिमिट, डेयरी और मत्स्य पालन की बढ़ी ऋण सीमा, मक्का, मूंगफली और फूलों की खेती को मिलगा लाभ
पंजाब सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत ऋण सीमा में बढ़ोतरी की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस फैसले को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि एवं पशुपालन गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की दिशा में अहम कदम बताया है। खास बात यह है कि 26 वर्षों बाद कई क्षेत्रों में ऋण सीमा को संशोधित किया गया है और पहली बार कुछ नई फसलों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है।
26 साल बाद KCC लोन लिमिट में संशोधन
पंजाब सरकार के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत कई गतिविधियों के लिए निर्धारित ऋण सीमाओं की लंबे समय से समीक्षा नहीं हुई थी। बदलती लागत और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए अब इन सीमाओं को संशोधित किया गया है ताकि किसानों को वास्तविक जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता मिल सके।
पशुपालकों को मिलेगा लाभ
विदेशी नस्ल की गायों के पालन-पोषण की बढ़ती लागत को देखते हुए सरकार ने इस श्रेणी में ऋण सीमा ₹70,000 से बढ़ाकर ₹87,591 कर दी है। इससे डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों और पशुपालकों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
मत्स्य पालन क्षेत्र को भी प्रोत्साहन
झींगा मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर ऋण सीमा ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और किसानों को आय के नए अवसर मिलेंगे।
नई फसलों को मिला पहली बार स्थान
इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि पहली बार मूंगफली, फूलों की खेती, हरा चारा, मक्का और तिलहन फसलों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना में शामिल किया गया है। इससे इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को भी आसान ऋण सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
कृषि विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
पंजाब लंबे समय से गेहूं-धान आधारित खेती पर निर्भर रहा है। सरकार का मानना है कि नई फसलों को योजना में शामिल करने से किसान फसल विविधीकरण की ओर बढ़ेंगे, जिससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी और किसानों की आय के स्रोत भी बढ़ेंगे।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उत्पादन लागत, पशुपालन खर्च और कृषि निवेश की जरूरतों को देखते हुए ऋण सीमा में बढ़ोतरी किसानों को वित्तीय दबाव से राहत दे सकती है। साथ ही नई फसलों और कृषि गतिविधियों को शामिल करने से किसानों को खेती के नए विकल्प अपनाने में मदद मिलेगी। बढ़ी हुई ऋण सीमा और नई फसलों को शामिल करने से किसानों को सस्ती वित्तीय सहायता मिलने के साथ-साथ कृषि विविधीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।