भारतीय सीफूड उद्योग को बड़ी राहत, EU ने एक्वाकल्चर निर्यात के लिए भारत को संशोधित सूची में किया शामिल, जानें क्या होते हैं एक्वाकल्चर उत्पाद
भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यूरोपीय संघ (EU) ने भारत को एक्वाकल्चर उत्पादों के निर्यात के लिए अपनी संशोधित ड्राफ्ट सूची में शामिल कर लिया है। इस फैसले से सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय समुद्री उत्पादों का यूरोपीय देशों को निर्यात बिना रुकावट जारी रहने की उम्मीद बढ़ गई है। यूरोपीय संघ ने 12 मई को यह संशोधित सूची जारी की। इसमें उन देशों को शामिल किया गया है जिन्होंने खाद्य उत्पादों में एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के उपयोग को लेकर यूरोपीय नियमों का पालन किया है। भारत ने भी यूरोपीय आयोग के नियमों के अनुरूप कई जरूरी कदम उठाए जिसके बाद उसे इस सूची में जगह मिली।
पहले सूची से बाहर हो गया था भारत
दरअसल, अक्टूबर 2024 में यूरोपीय संघ द्वारा जारी एक नियम में भारत को उन देशों की सूची में शामिल नहीं किया गया था जिन्हें सितंबर 2026 के बाद पशु मूल के खाद्य उत्पादों का निर्यात करने की अनुमति होती। इससे भारतीय सीफूड उद्योग में चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अब यूरोपीय संघ ने भारत की निगरानी व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा मानकों और एंटीबायोटिक नियंत्रण प्रणाली पर भरोसा जताते हुए संशोधित सूची में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह भारतीय समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र के लिए बेहद सकारात्मक विकास है।
भारतीय झींगा और समुद्री उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
यूरोपीय संघ भारतीय समुद्री उत्पादों के लिए प्रमुख बाजारों में से एक है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय सीफूड निर्यात में EU तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा। कुल निर्यात मूल्य में इसकी हिस्सेदारी करीब 18.94 फीसदी रही, जो लगभग 1.59 अरब डॉलर के बराबर है। पिछले वित्त वर्ष में यूरोपीय संघ को होने वाले भारतीय समुद्री उत्पादों के निर्यात में मूल्य के हिसाब से 41.45 फीसदी और मात्रा के हिसाब से 38.29 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा फार्म में तैयार किए गए झींगा यानी फार्म्ड श्रिम्प का रहा।
एंटीबायोटिक नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को मिली मान्यता
यूरोपीय आयोग ने कहा है कि भारत ने खाद्य उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले जानवरों में एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के उपयोग पर यूरोपीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया है। भारत ने इसके लिए जरूरी गारंटी और आश्वासन भी दिए हैं। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) और एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल जैसी संस्थाओं ने नियामकीय अनुपालन मजबूत करने और जिम्मेदार एक्वाकल्चर प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया है। इसके अलावा राष्ट्रीय अवशेष नियंत्रण कार्यक्रम, पोस्ट हार्वेस्ट टेस्टिंग, प्रतिबंधित एंटीबायोटिक की निगरानी और जागरूकता कार्यक्रमों ने भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया है।
क्या होते हैं एक्वाकल्चर उत्पाद?
एक्वाकल्चर उत्पाद वे समुद्री या जलीय उत्पाद होते हैं जिन्हें तालाब, झील या नियंत्रित जल क्षेत्रों में तैयार किया जाता है न कि समुद्र या नदियों से सीधे पकड़ा जाता है। इनमें झींगा, प्रॉन, तिलापिया, पंगासियस, सैल्मन, सी-बास, केकड़े, लॉब्स्टर, ऑयस्टर, समुद्री शैवाल और एल्गी जैसे उत्पाद शामिल हैं।