बिहार के मछली पालकों को बीमा में राहत, प्रीमियम पर मिलेगा 40% तक प्रोत्साहन; जानिए क्या है पूरी योजना
बिहार में मछली पालन करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। मछली पालन के दौरान बाढ़, सूखा, चक्रवात, पानी के प्रदूषण या मछलियों में बीमारी जैसी वजहों से होने वाले नुकसान से अब किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के तहत जलीय कृषि बीमा लेने वाले किसानों को बीमा प्रीमियम पर 40% तक का एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाता है। सामान्य स्थिति में यह प्रोत्साहन अधिकतम ₹1 लाख तक हो सकता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों के लिए इसमें अतिरिक्त 10% प्रोत्साहन का प्रावधान है।
बिहार में इसी योजना के बारे में मत्स्य किसानों और अधिकारियों को जानकारी देने के लिए पटना के मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन में जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इसका आयोजन बिहार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के सहयोग से किया। कार्यशाला में मत्स्य किसानों और विभागीय अधिकारियों को बीमा योजना की शर्तों, पात्रता और अलग-अलग तरह के बीमा कवर के बारे में जानकारी दी गई। दरअसल, मछली पालन में किसान की बड़ी पूंजी तालाब, पानी, मछली बीज, चारा और दूसरे इनपुट में लगती है। ऐसे में अचानक आई बाढ़ या बीमारी पूरी फसल को प्रभावित कर सकती है। बीमा ऐसी स्थिति में किसान के आर्थिक जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
बिहार में बढ़ रहा है मछली उत्पादन
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में मछली उत्पादन बढ़ा है। कार्यशाला में दी गई जानकारी के मुताबिक, राज्य में मछली उत्पादन 2024-25 में 9.69 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 10.28 लाख मीट्रिक टन हो गया। उत्पादन बढ़ने के साथ मछली पालकों के निवेश और जोखिम दोनों बढ़ते हैं। खासकर बिहार जैसे राज्य में, जहाँ कई इलाक़ों में बाढ़ और जलभराव की समस्या रहती है, तालाबों में पाली जा रही मछलियों को प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान हो सकता है। इसी वजह से जलीय कृषि बीमा को किसानों के लिए एक अहम सुरक्षा कवच माना जा रहा है। PM-MKSSY के तहत देशभर में एक लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र को जलीय कृषि बीमा के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का लाभ केवल सामान्य तालाबों तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), केज, बायोफ्लॉक और रेसवे जैसी आधुनिक जलीय कृषि प्रणालियाँ भी शामिल हैं।
दो तरह की बीमा पॉलिसी का विकल्प
योजना के तहत किसानों को अपनी ज़रूरत के अनुसार बेसिक और व्यापक बीमा कवर का विकल्प मिल सकता है। बेसिक कवर में बाढ़, चक्रवात, प्रदूषण, सूखा और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े जोखिम शामिल होते हैं। वहीं व्यापक बीमा कवर में इन जोखिमों के साथ मछलियों में होने वाली बीमारियों जैसे अतिरिक्त जोखिमों को भी शामिल किया जा सकता है। बीमा लेने वाले किसान को प्रीमियम की लागत पर 40% तक एकमुश्त प्रोत्साहन मिल सकता है। सामान्य जलीय कृषि प्रणालियों के लिए यह सहायता ₹25,000 प्रति हेक्टेयर जल क्षेत्र की सीमा के साथ अधिकतम ₹1 लाख तक है। यानी पात्र किसान को चार हेक्टेयर तक के जल क्षेत्र के लिए इस प्रोत्साहन का लाभ मिल सकता है।
SC, ST और महिला किसानों को अतिरिक्त लाभ
इस योजना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी है। इन्हें सामान्य 40% प्रोत्साहन के अलावा 10% अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है। इस तरह पात्र लाभार्थियों के लिए अधिकतम प्रोत्साहन ₹1.10 लाख तक पहुँच सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ बीमा प्रीमियम और योजना में तय पात्रता के आधार पर निर्धारित होगा। बीमा कवर की राशि ₹20 लाख तक हो सकती है, लेकिन अधिक बीमा कवर लेने पर किसान को उसी के अनुसार प्रीमियम भी देना होगा। गहन जलीय कृषि प्रणालियों के लिए भी योजना में अलग प्रावधान हैं और निर्धारित सीमा के भीतर RAS, केज, बायोफ्लॉक और रेसवे जैसी प्रणालियों को बीमा प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
बिहार में बढ़ रहा है मत्स्य पालन का आधार
राज्य में मत्स्य पालन के बुनियादी ढाँचे को भी बढ़ाया जा रहा है। कार्यशाला में साझा किए गए आँकड़ों के मुताबिक, बिहार में 7,990 हेक्टेयर नया जल क्षेत्र विकसित किया गया है। चौर भूमि पर 2,721 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक तालाब बनाए गए हैं और 5,264 ट्यूबवेल लगाए गए हैं। राज्य में 233 मत्स्य बीज हैचरी हैं, जो लगभग 70 प्रतिशत मत्स्य बीज की ज़रूरत पूरी करती हैं। वर्ष 2025-26 में इन हैचरियों से करीब 2,753.45 मिलियन मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ। इसके अलावा राज्य में 89 फिश फीड मिलें हैं, जिनसे लगभग 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन किया जा रहा है।
किसानों के लिए ज़रूरी है सही जानकारी
सरकार की कोशिश है कि जलीय कृषि बीमा की जानकारी केवल कार्यशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ज़मीनी स्तर पर मछली पालकों तक पहुँचे। किसान बीमा लेने से पहले पॉलिसी में शामिल जोखिम, प्रीमियम, बीमा राशि, दावा प्रक्रिया और अपनी पात्रता की शर्तों को अच्छी तरह समझें। ख़ास तौर पर यह देखना ज़रूरी है कि उनकी जलीय कृषि प्रणाली और जल क्षेत्र योजना के नियमों के तहत आती है या नहीं। बिहार में मछली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के साथ किसान की लगाई पूंजी को जोखिम से बचाना भी महत्वपूर्ण है। PM-MKSSY के तहत जलीय कृषि बीमा पर मिलने वाला 40 प्रतिशत तक का एकमुश्त प्रोत्साहन किसानों के लिए बीमा की लागत कम करने में मदद कर सकता है। बिहार में आयोजित जागरूकता कार्यशाला को इसी दिशा में किसानों तक योजना की जानकारी पहुँचाने की पहल के तौर पर देखा जा सकता है।