Bihar MSP purchase: बिहार में मसूर की MSP खरीद शुरू होने के बाद चना और सरसों की खरीद को मिली मंजूरी
बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में मसूर की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद शुरू हो गई है। इसके साथ ही जल्द ही चना और सरसों की खरीद भी शुरू की जाएगी। कृषि विभाग, बिहार सरकार ने इसकी जानकारी दी है। इससे दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
चना और सरसों की भी होगी खरीद
राज्य में पहली बार मसूर की MSP पर खरीद 10 अप्रैल से शुरू कर दी गई है। इससे किसानों को खुले बाजार में कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी। सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य पर खरीद होने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मसूर के बाद अब सरकार चना और सरसों की खरीद की तैयारी में है। इससे बिहार के उन किसानों को बड़ा फायदा होगा जो रबी सीजन में दलहन और तिलहन की खेती करते हैं। MSP खरीद शुरू होने से किसानों को उचित मूल्य और बाजार की गारंटी मिलेगी।
खेती का रकबा और उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
बिहार सरकार ने अगले पाँच वर्षों में दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए दलहन फसलों का रकबा बढ़ाने और उत्पादन क्षमता मजबूत करने की योजना बनाई गई है। सरकार की योजना के अनुसार दलहन का क्षेत्रफल 4.48 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 9.19 लाख हेक्टेयर किया जाएगा। वहीं उत्पादन को 3.93 लाख टन से बढ़ाकर 11.27 लाख टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रोसेसिंग यूनिट और बाजार व्यवस्था पर जोर- दलहन प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में दाल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार मिलेगा और फसल बेचने में आसानी होगी।
बीज उत्पादन पर विशेष फोकस
राज्य में दलहन बीज प्रणाली को मजबूत करने के लिए सरकार ने बीज उत्पादन योजना भी तैयार की है। इसके तहत: 45,922 क्विंटल प्रमाणित बीज का उत्पादन, 2,043 क्विंटल आधार बीज तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही 1,15,742 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले बीज किसानों को अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
किसानों को क्या फायदा होगा?
इस योजना से किसानों को कई लाभ मिलेंगे:
- MSP पर फसल बेचने का मौका
- दलहन और तिलहन खेती को बढ़ावा
- बेहतर बाजार और उचित दाम
- बीज पर अनुदान
- आय बढ़ने की संभावना
मसूर, चना और सरसों की MSP खरीद बिहार के किसानों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।