Gaon Se: बिजनौर का नगीना वुड क्राफ्ट, पाँच पीढ़ियों की मेहनत से बना कारीगरों का पूरा उद्योग

Gaon Connection | Mar 10, 2026, 17:24 IST
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नगीना, बिजनौर का एक छोटा सा शहर, लकड़ी की नक्काशी के लिए मशहूर है, जिसने सैकड़ों परिवारों की किस्मत बदली है। 18वीं सदी की इस परंपरा ने कारीगरों को वैश्विक पहचान दिलाई है। शीशम और हल्दू जैसी प्राचीन लकड़ी से निर्मित अद्भुत कलाकृतियां, अब न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने खास मुकाम बना रही हैं।
<p><em>लकड़ी की कला जिसने बदली सैकड़ों परिवारों की किस्मत</em><br></p>

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का नगीना सिर्फ एक कस्बा नहीं, बल्कि लकड़ी की नक्काशी की एक जीवित परंपरा है। यहाँ एक परिवार ने वर्षों पहले लकड़ी से कलाकृतियाँ बनाने की शुरुआत की और धीरे-धीरे यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती गई। आज स्थिति यह है कि इस काम को देखकर आसपास के परिवारों और मोहल्लों ने भी इसे अपनाया और देखते-देखते यह एक बड़े उद्योग का रूप ले गया। अब नगीना की काष्ठ शिल्प कला हजारों लोगों के लिए रोजगार का जरिया बन चुकी है और सैकड़ों परिवारों की जिंदगी इससे बदल चुकी है।



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जंगल से कारीगर तक की कहानी

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जंगल इंसानों को बहुत कुछ देता है बाँस की बांसुरियांँ, घास की टोकरियाँ, पत्तों के दोने और घर-फर्नीचर के लिए लकड़ी। इसी जंगल की लकड़ी से बिजनौर के कारीगर एक अलग ही कहानी गढ़ रहे हैं। यहाँ के कलाकार शीशम, हल्दू और दूसरी मजबूत लकड़ियों से सुंदर और उपयोगी कलाकृतियाँ तैयार करते हैं। ये सिर्फ सामान नहीं बल्कि कला और मेहनत का संगम होते हैं, जो घरों की सजावट से लेकर रोजमर्रा के उपयोग तक हर जगह अपनी जगह बना रहे हैं।



18वीं सदी से शुरू हुई नगीना की पहचान

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नगीना की लकड़ी पर नक्काशी का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा हुआ है। इश्तियाक़ अहमद जो शफ़ीक हैंडीक्राफ्ट के संस्थापक बताते हैं, "उस समय स्थानीय कारीगरों ने शीशम की लकड़ी पर हाथ से नक्काशी कर सजावटी सामान बनाना शुरू किया था। मुगल और ब्रिटिश काल में यहाँ बने लकड़ी के बॉक्स और सजावटी वस्तुओं की काफी माँग रहती थी। उस दौर में Ebony wood से बने ब्रेसलेट बॉक्स और कंघियाँ भी काफी मशहूर थीं। धीरे-धीरे यह काम एक पहचान बन गया और नगीना काष्ठ शिल्प के लिए जाना जाने लगा।"



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इश्तियाक़ अहमद बताते हैं, "नगीना के काष्ठ शिल्प को देशभर में पहचान दिलाने में कुछ कारीगरों की बड़ी भूमिका रही। इन्हीं में से एक थे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कारीगर अब्दुल रशीद। उन्होंने लकड़ी की कंघियों पर अपनी बेहतरीन कारीगरी से राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया। इस उपलब्धि ने नगीना के कारीगरों को नई पहचान दी और यहां के हस्तशिल्प को देश-विदेश में प्रसिद्ध करने में अहम भूमिका निभाई।"



बारीकी और धैर्य का काम

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लकड़ी की नक्काशी का काम आसान नहीं होता। इसमें बेहद बारीकी और धैर्य की जरूरत होती है। सबसे पहले लकड़ी को काटकर 10 से 15 दिनों तक सुखाया जाता है ताकि उसमें नमी न रहे। इसके बाद कारीगर छेनी, हथौड़ी और carving tools की मदद से लकड़ी पर बारीक डिजाइन उकेरते हैं। एक छोटा सा डिब्बा या सजावटी वस्तु तैयार करने में 10 से 40 घंटे तक लग सकते हैं, यह पूरी तरह डिजाइन की जटिलता पर निर्भर करता है।



नगीना में बनते हैं कई तरह के उत्पाद

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नगीना के कारीगरों की कला सिर्फ सजावटी सामान तक सीमित नहीं है। यहाँ लकड़ी की चूड़ियां, झुमके, हैंडबैग, कोस्टर, चेस बोर्ड, लूडो और साँप-सीढ़ी जैसे खेल भी बनाए जाते हैं। इसके अलावा सजावटी बॉक्स, हैंडल और कई तरह के घरेलू उपयोग के सामान भी तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों में पारंपरिक डिजाइन और आधुनिक जरूरतों का अनोखा मेल देखने को मिलता है।



आज नगीना में करीब 30 हजार परिवार इस काष्ठ शिल्प से जुड़े हुए हैं। कई कारीगरों ने अपने घरों या छोटी वर्कशॉप से काम शुरू किया और धीरे-धीरे इसे रोजगार का बड़ा माध्यम बना लिया। कई कारीगर बताते हैं कि उन्होंने आसपास के युवाओं को भी यह हुनर सिखाया, जो आज कुशल कारीगर बनकर हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं।



GI टैग से बढ़ी वैश्विक उम्मीद

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मोहम्मद आमिर, कारीगर बताते हैं, "हाल के वर्षों में नगीना के लकड़ी के उत्पादों को GI टैग (Geographical Indication) भी मिला है। इससे इस पारंपरिक कला को नई पहचान मिली है और कारीगरों को उम्मीद है कि अब उनके उत्पाद वैश्विक बाजार तक पहुंच पाएंगे। कारीगरों का मानना है कि अगर सही मार्केटिंग और समर्थन मिले तो नगीना का वुड क्राफ्ट दुनिया के बड़े हस्तशिल्प बाजारों में अपनी जगह बना सकता है।"



जब भी आप कोई खूबसूरत लकड़ी का सामान देखें, तो याद रखिए कि उसमें सिर्फ लकड़ी नहीं बल्कि जंगलों का उपहार और हजारों कारीगरों की मेहनत छुपी होती है। नगीना का यह वुड क्राफ्ट सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि परंपरा, कला और मेहनत की वह कहानी है जिसने एक छोटे कस्बे को दुनिया के नक्शे पर पहचान दिलाई है।

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