Bird Flu Outbreak: आंध्र और तमिलनाडु में मिले एवियन इन्फ्लूएंजा के मामले, मुर्गी पालकों को किया गया सचेत
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में पोल्ट्री में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में कलिंग और निगरानी बढ़ा दी है। पोल्ट्री पालकों से सतर्क रहने और बायो-सिक्योरिटी नियमों का पालन करने की अपील की है। बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रभावित क्षेत्र के सभी पक्षियों को मार दिया जाता है, जिसके लिए अलग-अलग राज्यों के हिसाब से मुआवजा निर्धारित किया है। अगर समय पर कार्रवाई न हो, तो यह बीमारी पूरे क्षेत्र में फैल सकती है और पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
दक्षिण भारत के दो राज्यों तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में बर्ड फ्लू के मामलों ने मुर्गी पालकों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों राज्यों में पक्षियों में असामान्य मौतों के बाद जांच कराई गई, जिसमें एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
आंध्र प्रदेश के अन्नमय्या जिले के दो गाँवों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। यहां पोल्ट्री में अचानक मौतों की खबर मिलने के बाद नमूनों की जांच की गई, जिसमें वायरस की मौजूदगी सामने आई। प्रशासन ने तत्काल प्रभावित क्षेत्रों को नियंत्रण क्षेत्र घोषित कर दिया और पोल्ट्री को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है और टीमों को सर्वेक्षण के लिए तैनात किया गया है।
उधर तमिलनाडु में भी बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। यहाँ पर कौओं की मौत के बाद जाँच की गई, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार H5N1 एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस है जो पक्षियों में एक अत्यधिक संक्रामक, गंभीर श्वसन रोग का कारण बनता है। H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा से इंसानों में संक्रमण के मामले कभी-कभी होते हैं, लेकिन एक इंसान से दूसरे इंसान में संक्रमण मुश्किल होता है। अगर कोई इंसान एवियन इन्फ्लूएंजा सें संक्रमित हो गया तो मृत्यु दर लगभग 60% होती है।
बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रभावित क्षेत्र के सभी पक्षियों को मार दिया जाता है, जिसके लिए अलग-अलग राज्यों के हिसाब से मुआवजा निर्धारित किया है।
क्यों किया जाती है कलिंग (Culling)
बर्ड फ्लू एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खासतौर पर मुर्गियों, बत्तखों और अन्य पालतू पक्षियों को प्रभावित करती है। यदि किसी फार्म में इसका संक्रमण मिलता है, तो वायरस के फैलाव को रोकने के लिए आसपास के पक्षियों को भी मारकर नष्ट किया जाता है। इसे Culling कहा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भले कठोर लगे, लेकिन बड़े पैमाने पर नुकसान और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यही सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। यदि समय पर कार्रवाई न हो, तो यह बीमारी पूरे क्षेत्र में फैल सकती है और पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
पोल्ट्री पालकों के लिए सलाह
दोनों राज्यों में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यदि कहीं भी पक्षियों की असामान्य मौत दिखे, तो तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचना देने को कहा गया है। पोल्ट्री फार्म संचालकों को बायो-सिक्योरिटी नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, जैसे बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित करना, उपकरणों की सफाई और नियमित स्वास्थ्य जांच।
स्वास्थ्य विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है, क्योंकि कुछ मामलों में बर्ड फ्लू इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। प्रभावित इलाकों में पोल्ट्री कर्मियों और स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
सतर्कता ही बचाव
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में सामने आए ये मामले दिखाते हैं कि पोल्ट्री में संक्रमण कितनी तेजी से फैल सकता है। समय पर जांच, कलिंग, निगरानी और जागरूकता ही ऐसे प्रकोपों को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लोगों और पोल्ट्री पालकों की सतर्कता ही इस संक्रमण को फैलने से रोक सकती है।
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