Bihar Fertilizer: आज से 19 जिलों में क्यूआर कोड से मिलेगी खाद, जानिए किसान कैसे कर सकेंगे बुकिंग

Mansi | Sept 01, 2026, 13:27 IST
एक सितंबर से बिहार में खाद की बुकिंग प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी। किसान मोबाइल के जरिये बुकिंग करके क्यूआर कोड से खाद प्राप्त कर सकेंगे। यह नई प्रणाली पहले 19 जिलों में लागू की जाएगी, जिसके बाद इसका विस्तार पूरे राज्य में किया जाएगा। इस डिजिटल व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर काबू पाया जा सकेगा।

बिहार में किसानों को खाद लेने के लिए अब पहले की तरह सिर्फ़ दुकान पर जाकर उपलब्धता का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। राज्य में उर्वरक की बिक्री और वितरण व्यवस्था को डिजिटल बनाने की तैयारी है। 1 सितंबर 2026 से 19 जिलों में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइज़र सेल एप्लीकेशन सिस्टम (FSAS) लागू किया जा रहा है। इसके तहत किसान पहले मोबाइल आधारित व्यवस्था से खाद की जरूरत के मुताबिक बुकिंग कर सकेंगे और फिर क्यूआर कोड के जरिए अधिकृत विक्रेता से खाद ले सकेंगे।



इस नई व्यवस्था का मकसद खाद की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही खाद की कालाबाज़ारी, जमाखोरी और तय कीमत से ज्यादा वसूली जैसी शिकायतों पर निगरानी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। बिहार में इसका पायलट पहले वैशाली और शेखपुरा में किया गया था और अब इसे दूसरे चरण में 19 जिलों तक बढ़ाया जा रहा है।



19 जिलों में शुरू होगी नई व्यवस्था

1 सितंबर से एफएसएएस की नई व्यवस्था पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सारण, सीवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और भागलपुर में लागू की जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे बिहार में लागू करने की योजना है।



किसान ऐसे कर सकेंगे खाद की बुकिंग

नई व्यवस्था में किसान की पहचान और खेती से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल खाद की जरूरत तय करने में किया जाएगा। जिन किसानों की जमीन की जानकारी फार्मर रजिस्ट्री में उपलब्ध है, उनकी जानकारी फार्मर आईडी के जरिए ली जाएगी। जिन किसानों की जानकारी अभी फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज नहीं है, वे एफएसएएस पर पंजीकरण करा सकेंगे। इसके लिए खेत का खाता, खेसरा संख्या, रकबा और फसल जैसी जानकारी देनी होगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर फसल की जरूरत के हिसाब से खाद की मात्रा तय करने में मदद मिलेगी।



बुकिंग के बाद मिलेगा क्यूआर कोड

किसान की खाद की जरूरत और बुकिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक क्यूआर कोड जनरेट होगा। इस कोड को संबंधित अधिकृत उर्वरक विक्रेता के पास दिखाकर किसान अपनी बुक की गई खाद ले सकेगा। क्यूआर कोड की वैधता तीन दिन होगी। यानी कोड मिलने के बाद तय समय के भीतर किसान को संबंधित विक्रेता से खाद लेनी होगी। केंद्र सरकार के एफएफएस प्लेटफॉर्म में भी क्यूआर आधारित बुकिंग और अधिकृत आउटलेट पर इसके इस्तेमाल की व्यवस्था बताई गई है। बिहार में इस डिजिटल व्यवस्था को सीधे पूरे राज्य में लागू करने के बजाय पहले पायलट के तौर पर आजमाया गया। वैशाली और शेखपुरा में इसके इस्तेमाल के बाद इसे आगे बढ़ाया गया और अब दूसरे चरण में 19 जिलों को शामिल किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नई व्यवस्था के जरिए खाद की मांग, उपलब्धता और बिक्री की जानकारी को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सके। इससे अधिकारियों को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किस इलाके में कितनी खाद की जरूरत है और उसकी उपलब्धता कैसी है।



कालाबाज़ारी और जमाखोरी पर रहेगी नजर

नई डिजिटल व्यवस्था के पीछे एक बड़ा उद्देश्य खाद की बिक्री में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगाना भी है। तय कीमत से ज्यादा वसूली, जमाखोरी या कालाबाज़ारी की शिकायत मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कृषि अधिकारियों को सिर्फ़ ऑनलाइन आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहने और जरूरत के मुताबिक दुकानों तथा खेतों में जाकर वास्तविक स्थिति देखने पर भी जोर दिया गया है। इससे कागज़ पर उपलब्ध स्टॉक और जमीन पर मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर पकड़ने में मदद मिल सकती है।



दुकानदारों और अधिकारियों को दी जाएगी ट्रेनिंग

नई व्यवस्था को लागू करने से पहले अधिकारियों, कर्मचारियों और खाद विक्रेताओं को इसके इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही है। जिलों में मास्टर ट्रेनर तैयार करने और उनके जरिए संबंधित कर्मचारियों तथा विक्रेताओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है। खाद की बिक्री में दुकानदारों की अहम भूमिका है, इसलिए उन्हें डिजिटल सिस्टम और क्यूआर कोड से जुड़ी प्रक्रिया समझाना भी जरूरी है। इसका उद्देश्य यह है कि नई व्यवस्था शुरू होने के बाद किसानों को तकनीकी वजह से परेशानी न हो।



किसानों की मदद के लिए हेल्प डेस्क भी

नई व्यवस्था में तकनीकी या पंजीकरण से जुड़ी समस्या आने पर किसानों की मदद के लिए हेल्प डेस्क और कंट्रोल रूम बनाने की भी व्यवस्था की जा रही है। इसका मकसद यह है कि किसी किसान की जमीन, रजिस्ट्रेशन या बुकिंग से जुड़ी समस्या लंबे समय तक अटकी न रहे। किसानों के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि खाद की जरूरत फसल के समय पर निर्भर करती है। अगर डिजिटल प्रक्रिया आसान रही और खाद की उपलब्धता सही समय पर सुनिश्चित हुई, तो किसानों को दुकान-दुकान भटकने की परेशानी कम हो सकती है।



2 अक्टूबर से पूरे बिहार में लागू करने की योजना

19 जिलों में 1 सितंबर से दूसरे चरण की शुरुआत के बाद 2 अक्टूबर 2026 से पूरे बिहार में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू करने की योजना है। पहले चरणों से मिलने वाले अनुभव के आधार पर आगे की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी। सरकार की कोशिश सिर्फ़ खाद की बिक्री को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य यह है कि किसान की जरूरत, खाद की उपलब्धता और बिक्री की जानकारी एक डिजिटल व्यवस्था में जुड़े, ताकि सही मात्रा में खाद सही किसान तक पहुँच सके और वितरण व्यवस्था पर निगरानी भी मजबूत हो।

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