जेल नेल पॉलिश के इस केमिकल पर ब्रिटेन में रोक, भारत में ग्राहक कैसे बरतें सावधानी? IFS अधिकारी परवीन कासवान ने किया अलर्ट

Umang | Aug 19, 2026, 12:38 IST
ब्रिटेन में जेल नेल पॉलिश में इस्तेमाल होने वाले टीपीओ रसायन पर चरणबद्ध रोक शुरू हो गई है। ‘इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अगस्त 2026 से टीपीओ वाले नए उत्पादों की बिक्री पर रोक है और मौजूदा स्टॉक को 14 फरवरी 2027 तक हटाना होगा। टीपीओ को प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े संभावित जोखिमों के कारण लेकर चिंता जताई गई है। भारत में भी जेल मैनिक्योर का चलन बढ़ने के बीच आईएफएस अधिकारी परवीन कासवान ने साफ़ लेबल और सुरक्षित विकल्पों की ज़रूरत बताई है।

आजकल जेल नेल पॉलिश और मैनिक्योर का चलन सिर्फ़ भारत के बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी नेल सैलून और जेल मैनिक्योर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इसी बीच ब्रिटेन में जेल नेल पॉलिश में इस्तेमाल होने वाले एक रसायन को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। ब्रिटिश समाचार वेबसाइट 'इंडिपेंडेंट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन ने टीपीओ यानी ट्राइमिथाइलबेंज़ॉयल डाइफेनिलफॉस्फिन ऑक्साइड वाले नए उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी है। यह रसायन जेल नेल पॉलिश को यूवी लैंप की रोशनी में सख़्त करने में मदद करता है, जिससे पॉलिश लंबे समय तक टिकी रहती है।



ब्रिटेन में यह कदम स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच उठाया गया है। यूरोपीय संघ में भी टीपीओ पर सितंबर 2025 से प्रतिबंध लागू है। अब ब्रिटेन में मौजूद पुराने टीपीओ वाले उत्पादों को भी 14 फरवरी 2027 तक सैलून से पूरी तरह हटाना होगा। भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ भी जेल नेल पॉलिश और इससे जुड़े सैलून का इस्तेमाल बढ़ रहा है। भारतीय वन सेवा के अधिकारी परवीन कासवान ने भी इस मुद्दे पर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि उपभोक्ताओं को कॉस्मेटिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की साफ़ जानकारी मिलनी चाहिए और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होने चाहिए।



टीपीओ क्या है और नेल पॉलिश में क्यों इस्तेमाल होता है?

टीपीओ का पूरा नाम ट्राइमिथाइलबेंज़ॉयल डाइफेनिलफॉस्फिन ऑक्साइड है। यह एक ऐसा रसायन है जो जेल नेल पॉलिश को यूवी या एलईडी लैंप की रोशनी में जल्दी सख़्त करने में मदद करता है। साधारण नेल पॉलिश हवा में सूख जाती है, लेकिन जेल नेल पॉलिश को विशेष लैंप के नीचे रखना पड़ता है। टीपीओ इसी प्रक्रिया में मदद करता है। इसकी वजह से जेल पॉलिश नाख़ून पर लंबे समय तक बनी रहती है और चमक भी बरकरार रहती है। हालाँकि, हर जेल नेल पॉलिश में टीपीओ नहीं होता। बाज़ार में पहले से ही टीपीओ-मुक्त जेल उत्पाद उपलब्ध हैं।



क्यों उठे सवाल?

टीपीओ पर कार्रवाई की मुख्य वजह इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पशु अध्ययनों में इस रसायन को प्रजनन स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याओं से जोड़ा गया है। इसी वजह से यूरोपीय संघ ने सितंबर 2025 में टीपीओ को कॉस्मेटिक उत्पादों में प्रतिबंधित कर दिया था। ब्रिटेन में भी 15 अगस्त 2026 से टीपीओ वाले नए उत्पादों की बिक्री और आपूर्ति पर रोक शुरू हो गई है।



इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रिटेन में जेल मैनिक्योर बंद हो जाएगा। रोक सिर्फ़ टीपीओ वाले उत्पादों पर है। ब्रिटेन में जिन सैलून के पास पहले से टीपीओ वाले उत्पाद मौजूद हैं, वे उन्हें 14 फरवरी 2027 तक इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद ऐसे सभी उत्पादों को सैलून से हटाना होगा।



टीपीओ पर अलग राय भी सामने आई

टीपीओ को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंता के बावजूद कॉस्मेटिक उद्योग की ओर से इसके इस्तेमाल के स्तर को लेकर अलग पक्ष भी रखा गया है।



'इंडिपेंडेंट' ने द कॉस्मेटिक, टॉयलेट्री एंड परफ्यूमरी एसोसिएशन की विज्ञान निदेशक कैरोलिन रेन्सफ़ोर्ड के हवाले से कहा कि टीपीओ पर प्रतिबंध इसके ख़तरनाक गुणों और बहुत अधिक मात्रा में शरीर के संपर्क में आने की स्थिति को ध्यान में रखकर लगाया गया है। उनके मुताबिक, कॉस्मेटिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली टीपीओ की मात्रा उस स्तर से 1,000 गुना से भी कम होती है, जिस पर प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जेल उत्पाद नाख़ून पर लगाए जाते हैं, इसलिए शरीर में इनके अवशोषित होने की संभावना भी कम होती है।



भारत में भी बढ़ रहा जेल नेल का चलन, परवीन कासवान ने किया सावधान

भारत में जेल नेल मैनिक्योर और यूवी लैंप वाले नेल सैलून का चलन बढ़ रहा है। ऐसे में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में टीपीओ को लेकर किए गए बदलाव भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी ध्यान देने लायक हैं।



भारतीय वन सेवा के अधिकारी परवीन कासवान ने X पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि कुछ जेल नेल पॉलिश में इस्तेमाल होने वाले टीपीओ रसायन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ में इसे कॉस्मेटिक उत्पादों से चरणबद्ध तरीके से हटाया जा चुका है। कासवान ने उपभोक्ताओं के लिए साफ़ सामग्री लेबल और सुरक्षित विकल्पों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में ऐसे सैलून और इन उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, इसलिए सावधानी ज़रूरी है।




जेल नेल कराने से पहले भारतीय ग्राहक क्या देखें?

अगर आप जेल मैनिक्योर कराने जा रहे हैं तो सैलून में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद की जानकारी माँग सकते हैं। सबसे पहले यह देखें कि उत्पाद के पैकेट पर उसकी सामग्री साफ़-साफ़ लिखी है या नहीं। अगर संभव हो तो टीपीओ-मुक्त उत्पाद के बारे में पूछें। बाज़ार में ऐसे उत्पाद पहले से उपलब्ध हैं।



टीपीओ की जगह कुछ जेल उत्पादों में टीपीओ-एल और बैपो जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी नए रसायन को सिर्फ़ इसलिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानना चाहिए क्योंकि उसमें टीपीओ नहीं है। हर रसायन की अपनी सुरक्षा प्रोफ़ाइल होती है।



यानी ब्रिटेन का यह फैसला भारत में जेल नेल पॉलिश पर प्रतिबंध नहीं है लेकिन इससे भारतीय ग्राहकों के लिए एक बात साफ़ होती है कि मैनिक्योर कराते समय सिर्फ़ नेल पॉलिश की चमक और उसके लंबे समय तक टिकने पर ध्यान न दें, बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों की जानकारी भी ज़रूर लें।

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