Budget Session: 16 अप्रैल से बजट सत्र होगा शुरू, ‘नारी शक्ति वंदन’ कानून में संशोधन की तैयारी, महिला आरक्षण लागू करने पर जोर
संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल से फिर से शुरू हो रहा है, जिसका मुख्य एजेंडा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना और महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करना है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेण रिजिजू ने इसकी जानकारी दी। सरकार ने गुरुवार को यह फैसला लिया और 16, 17 व 18 अप्रैल को महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े अहम बिल पर चर्चा होगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कानून नई जनगणना के बाद लागू होना था, लेकिन अब सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने का प्रस्ताव कर रही है ताकि प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
महिला आरक्षण कानून को गति देने की तैयारी
सरकार ने 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पेश किया था, जिसे संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पारित किया गया था। इस कानून को लागू करने के लिए दो बिल लाए जाएंगे। एक बिल 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन से संबंधित होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा होगा। इन बिलों को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसके लिए सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है। गृहमंत्री अमित शाह ने वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी, एआईएमआईएम, बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दलों के नेताओं से मुलाकात की है।
सीटों की संख्या में वृद्धि और आरक्षण का प्रावधान
प्रस्ताव के अनुसार, 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। ओबीसी महिलाओं के लिए फिलहाल कोई अलग से प्रावधान शामिल नहीं है। इसी फॉर्मूले को राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी, जो 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में लोकसभा सीटों की संख्या 48 से बढ़कर 72 हो जाएगी, जिसमें 24 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। बिहार में कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती हैं, जिनमें महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है।
महिला आरक्षण का ऐतिहासिक सफर
महिला आरक्षण का मुद्दा पहली बार 1931 में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान उठा था, लेकिन तब प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था। 1993 में, पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। 62 साल की बहस के बाद 1996 में पहली बार लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश हुआ था। महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दे दी थी। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है और इसकी लागू होने की तारीख केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए तय करेगी।
क्या है ‘नारी शक्ति वंदन’ कानून?
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ 2023 में पारित किया गया था, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी था, जिसके कारण इसका लागू होना टलता जा रहा था।
संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार अब इस कानून में संशोधन करके इसे जल्दी लागू करना चाहती है। प्रस्तावित बदलाव के तहत महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने की कोशिश की जा रही है, ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सके। इससे महिलाओं को जल्द राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा और लंबे समय से लंबित इस सुधार को गति मिलेगी। लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए लोकसभा की कुल सीटों को भी बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। वर्तमान में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर लगभग 816 तक किया जा सकता है। इसमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम महिला भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व को भी संतुलित करेगा। राजनीतिक सहमति और विपक्ष की प्रतिक्रियाइस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल भी काफी सक्रिय है।
राजनीतिक सहमति और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सरकार इस संशोधन को सर्वसम्मति से पास कराना चाहती है, वहीं विपक्ष ने इस पर विस्तृत चर्चा और सर्वदलीय बैठक की मांग की है। कुछ विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की टाइमिंग और जल्दबाजी पर सवाल उठाए हैं, जबकि कई नेताओं ने महिलाओं के आरक्षण का समर्थन भी किया है। निष्कर्षसंसद का यह कदम भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। अगर संशोधन पास हो जाता है, तो आने वाले वर्षों में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। इससे न केवल महिलाओं को सशक्तिकरण मिलेगा, बल्कि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया भी अधिक संतुलित और प्रतिनिधिक बनेगी।