Animal Care: बढ़ती गर्मी में भैंसों के शरीर में आते हैं बदलाव, जानिए गर्मियों में कैसे करें भैंसों की देखभाल

Gaon Connection | Mar 06, 2026, 15:32 IST
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गर्मियों में भैंसों को खास देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि उनके काले रंग और कम रोम छिद्रों के कारण शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे गर्भधारण क्षमता और हीट साइकिल प्रभावित होता है। एनिमल एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस दौरान भैंस के शरीर का तापमान 0.9 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ सकता है। इसलिए पशुपालकों को विशेष इंतजाम करने और पशुओं के हीट साइकिल की पूरी जानकारी रखने की सलाह दी जाती है।
<p>गर्मी में भैसों की खास देखभाल<br></p>

गर्मियों का मौसम भैंसों के लिए एक अलग ही तरह की परेशानी लेकर आता है। गर्मियां शुरू होते ही भैंसों के शरीर में गर्मी बढ़ने लगती है। एनिमल एक्सपर्ट डॉ. कुन्द का कहना है, भैंस का काला रंग होने की वजह से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती और भैंस के शरीर में रोम छिद्र भी कम होते हैं, जिससे उसे पसीना कम आता है। और इन्हीं सब के चलते भैंसों के शरीर में गर्मी बढ़ने लगती है। और इसका सबसे बड़ा नुकसान ये होता है कि भैंस की गर्भधारण की क्षमता घटने लगती है। इतना ही नहीं भैंस कब हीट में आ रही है और कब नहीं इस बात की भी जानकारी नहीं हो पाती है। इस सब के चलते भैंस का गर्भधारण और हीट साइकल पूरी तरह से बिगड़ जाता है।



एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि गर्मियों के दौरान भैंस के शरीर का तापमान 0.9 डिग्री फारेनहाइट तक पहुँच जाता है। इसलिए भैंस को इस तरह के हालात से बचाने के लिए गर्मियों के दौरान खास इंतजाम तो करने ही चाहिए। साथ ही पशुओं के हीट साइकल की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए। अगर ऐसा न हो तो पशु को गाभिन करा पाना मुश्किल हो सकता है।



चारे में करें बदलाव

गर्मियों में भैंसों की देखभाल के लिए चारे से लेकर कई तरह के बदलाव जरूरी होते हैं। मौसम के हिसाब से पशु की देखरेख न करने पर उसके गाभिन होने की संभावना बहुत कम हो जाती है और उत्पादकता भी घट जाती है। जहाँ तापमान बढ़ता हुआ महसूस हो, वहाँ पशुपालकों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है।



भैंस का त्वचा को चाहिए छाया और पानी

सबसे पहले पशु को लू से बचाना जरूरी होता है। भैंस का काला रंग होने की वजह से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती और रोम छिद्र कम होने से पसीना कम आता है। इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वो शेड में अपनी भैंस को नहलाने का इंतजाम रखें। अगर मुमकिन हो तो पशुओं को नदी या नहर के पानी में कुछ देर के लिए छोड़ देना चाहिए। वहीं अगर नदी या नहर ना हो तो पशु को हर तीन-चार दिन बाद अच्छी तरह नहलाना चाहिए।



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ठंडी तासीर वाला खाना खिलाएं

गर्मियों के दौरान भैंस को ऐसा आहार देना चाहिए जो हल्का हो और जिसकी तासीर ठंडी हो। अगर पशु को ऐसा आहार दिया जाता है, तो न केवल पशु के शरीर में ठंडक बनी रहती है, बल्कि पाचन क्रिया भी बेहतर हो जाती है। जिसकी वजह से पशु को भोजन पचाने में अधिक मेहनत नहीं पड़ती।



गर्मी में भैंस को शेड में रखें

पशु के लिए एक ऐसे शेड का निर्माण करना चाहिए जहाँ हवा की आवा जाही बेहतर हो। इसके अलावा शेड में पीने के पानी की व्यवस्था भी होनी चाहिए। साथ ही पशु के ऊपर सीधा धूप या सूरज की रोशनी ना पड़े इस बात का भी ख्याल शेड में रखना चाहिए। पशुपालन से जुड़े लोगों को गर्मियों और सर्दियों में पशु की देखभाल अलग-अलग तरीके से करनी चाहिए। इसमें चारे से लेकर कई तरह के बदलाव जरूरी होते हैं। इसके अलावा शेड में पीने के पानी की व्यवस्था भी होनी चाहिए। साथ ही पशु के ऊपर सीधा धूप या सूरज की रोशनी ना पड़े इस बात का भी ख्याल शेड में रखना चाहिए।



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बढ़ते तापमान में घटती है उत्पादकता

अगर मौसम के हिसाब से पशु की देखरेख न की जाए तो पशु के गाभिन होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। इसके अलावा पशु की उत्पादकता भी कम हो जाती है। इसलिए ये जरूरी है कि जहां भी तापमान बढ़ता हुआ नजर आए या यह महसूस हो कि तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है तो वहां पशुपालकों को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।



लू से भैसों/पशुओं को बचाएं

ऐसे में सबसे पहले पशु को लू से बचाना जरूरी होता है। इस दौरान भैंस का खास ख्याल रखना होता है। काला रंग होने की वजह से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती और भैंस के शरीर में रोम छिद्र भी कम होते हैं, जिससे उसे पसीना कम आता है। इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि वो शेड में अपनी भैंस को नहलाने का इंतजाम रखें। अगर मुमकिन हो तो पशुओं को नदी या नहर के पानी में कुछ देर के लिए छोड़ देना चाहिए। वहीं अगर नदी या नहर ना हो तो पशु को हर तीन-चार दिन बाद अच्छी तरह नहलाना चाहिए।

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