₹10/लीटर में खरीदा जा रहा गोमूत्र, महिलाओं को हर लीटर पर मिल रहा इतना कमीशन; जानें यूपी के किस ज़िले में शुरू हुई पहल

Gaon Connection | Aug 12, 2026, 17:45 IST
बुलंदशहर में गोमूत्र खरीद की एक नई पहल शुरू की गई है। यह परियोजना किसानों और पशुपालकों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत प्रदान करेगी। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने की योजना भी बनाई गई है। यह मॉडल गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास है।

उत्तर प्रदेश में पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। बुलंदशहर में किसानों और पशुपालकों से गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है, जिसमें फिलहाल 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। इस पहल का मकसद पशुपालकों के लिए दूध के अलावा आमदनी का एक और स्रोत तैयार करना, गाँवों में महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर भी इस पहल की जानकारी साझा की है।



बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गाँव से शुरू हुए इस मॉडल को फिलहाल आसपास के 15 गाँवों से जोड़ा गया है। गाँवों में गोमूत्र संग्रह के लिए स्थानीय केंद्र बनाए गए हैं, जहां से रोज़ाना करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किए जाने की जानकारी सामने आई है। गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं, ताकि पशुपालकों को दूर जाकर गोमूत्र बेचने की जरूरत न पड़े। इस मॉडल में महिलाओं की भागीदारी भी रखी गई है और संग्रह में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर 2 रुपये कमीशन देने की व्यवस्था है। शुरुआती चरण में करीब 300 महिलाओं को इससे जोड़ने की बात कही गई है। योजना के तहत एकत्र गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।



गाँवों में ही होगी गोमूत्र की खरीद


इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत पशुपालकों के लिए गाँव के स्तर पर ही संग्रह केंद्र बनाए गए हैं। इससे उन्हें गोमूत्र बेचने के लिए दूर के बाजार या किसी बड़े केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल 10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद की जा रही है और भविष्य में खरीद मूल्य को 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने की योजना पर भी चर्चा है।



स्याना तहसील के नरसेना गांव में किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू किए गए इस मॉडल को आसपास के 15 गांवों तक पहुंचाया गया है। वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र होने की जानकारी दी गई है। व्यवस्था को विस्तार मिलने पर अधिक पशुपालकों को इससे जोड़ने की तैयारी है।



महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण महिलाओं को सीधे आर्थिक गतिविधि से जोड़ना है। गोमूत्र संग्रह में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रत्येक लीटर पर 2 रुपये कमीशन देने की व्यवस्था की गई है। शुरुआत में करीब 300 महिलाओं को इस मॉडल से जोड़ने की बात कही गई है और उन्हें इसमें हिस्सेदार बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है।



इससे गाँव की महिलाओं के लिए घर के आसपास रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का अवसर तैयार हो सकता है। योजना से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के व्यापक मॉडल के रूप में विकसित करने की कोशिश है।



गोमूत्र से तैयार होंगे कृषि उपयोगी उत्पाद

एकत्र किए गए गोमूत्र को कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद तैयार करने के लिए कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए इसमें विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि उपयोगी मिश्रण और अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।



इस पहल के पीछे प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य भी बताया गया है। सरकार और परियोजना से जुड़े लोगों की योजना गोमूत्र आधारित उत्पादों के जरिए खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प विकसित करने की है। हालांकि, इन उत्पादों की प्रभावशीलता और उपयोगिता का आकलन पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों के आधार पर आगे किया जाएगा।



गो-संरक्षण से ग्रामीण कमाई तक जोड़ने की कोशिश

इस मॉडल में गो-संरक्षण को ग्रामीण आय और रोजगार के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। खास तौर पर उन पशुओं के संदर्भ में यह पहल अतिरिक्त आर्थिक उपयोगिता पैदा करने की कोशिश है, जिनसे अब दूध नहीं मिलता। पशुपालक परिवारों को दूध और डेयरी उत्पादों के अलावा गोमूत्र से भी आमदनी का अवसर देने का लक्ष्य रखा गया है।



एकत्रीकरण से लेकर कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने और उन्हें सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने तक स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का चक्र तैयार करने की कोशिश है। फिलहाल यह बुलंदशहर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है। परियोजना के परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में विस्तार देने की दिशा में आगे की नीति तैयार की जा सकती है।

Tags:
  • Cow Urine Purchase
  • Cow Urine Pilot Project
  • Uttar Pradesh Farmers
  • Bulandshahr
  • Yogi Adityanath
  • Rural Economy
  • Women Empowerment
  • Organic Farming
  • Cow Protection
  • गोमूत्र खरीद