जन्म से 18 साल तक सभी बच्चों की होगी मुफ्त डायबिटीज जाँच, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन
Rashtriya Bal Swasthya Karyakram (RBSK 2.0): भारत सरकार ने पहली बार बच्चों में बढ़ते डायबिटीज मामलों को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। अब देशभर में जन्म से लेकर 18 साल तक के सभी बच्चों की मुफ्त डायबिटीज स्क्रीनिंग की जाएगी। केंद्र सरकार ने बच्चों में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज की पहचान, इलाज और लंबे समय तक देखभाल के लिए नई राष्ट्रीय गाइडलाइन जारी की है। यह पहल बच्चों में बीमारी की जल्दी पहचान और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई है।
जन्म से 18 साल तक सभी बच्चों की होगी स्क्रीनिंग
नई गाइडलाइन के तहत बच्चों की जांच आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों और सामुदायिक स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म के जरिए की जाएगी। अगर किसी बच्चे में डायबिटीज के लक्षण दिखते हैं तो उसका तुरंत ब्लड ग्लूकोज टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल या बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाएगा।
मुफ्त इलाज और लाइफटाइम मैनेजमेंट की सुविधा
सरकार ने साफ किया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बच्चों को मुफ्त इलाज मिलेगा। इसमें डायग्नोसिस, इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स और नियमित फॉलोअप जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। गंभीर मामलों में उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज की सुविधा भी दी जाएगी।
RBSK 2.0 के तहत लागू होगी योजना
यह पूरी व्यवस्था Ministry of Health and Family Welfare की संशोधित Rashtriya Bal Swasthya Karyakram (RBSK 2.0) गाइडलाइन के तहत लागू की जाएगी। यह कार्यक्रम पहले से 32 स्वास्थ्य समस्याओं की जाँच करता था, अब इसमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मानसिक स्वास्थ्य और अन्य गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम को भी शामिल किया गया है।
‘4Ts’ संकेतों पर रहेगा फोकस
सरकार ने माता-पिता, शिक्षकों और देखभाल करने वालों को बच्चों में डायबिटीज के शुरुआती संकेत पहचानने के लिए जागरूक करने की बात कही है। इसमें Toilet (बार-बार पेशाब आना), Thirsty (ज्यादा प्यास लगना), Tired (थकान महसूस होना) और Thinner (वजन कम होना) जैसे संकेत शामिल हैं। इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने को कहा गया है।
क्यों जरूरी है यह फैसला?
भारत दुनिया में डायबिटीज मरीजों की बड़ी संख्या वाले देशों में शामिल है और अब बच्चों व किशोरों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। सरकार का मानना है कि समय रहते जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है और बच्चों की जीवन गुणवत्ता बेहतर होगी।