'द नीलेश मिसरा फ़ेस्टिवल' का आग़ाज़, कहानियों और सिनेमा के संगम में डूबी चितकारा यूनिवर्सिटी
पंजाब की चितकारा यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को पहले 'द नीलेश मिसरा फ़ेस्टिवल' का आग़ाज़ हुआ। इस आयोजन में छात्रों को कहानी, संगीत, फ़िल्म और रचनात्मक अभिव्यक्ति की दुनिया से जुड़ने का अवसर मिला। लेखक, रेडियो स्टोरीटेलर और गीतकार नीलेश मिसरा की मौजूदगी में आयोजित इस फ़ेस्टिवल में छात्रों ने न केवल उनकी रचनात्मक यात्रा को क़रीब से जाना, बल्कि कहानी कहने और फ़िल्म निर्माण की बारीकियों को भी समझा।
फ़ेस्टिवल की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुई, जहाँ छात्रों ने अपनी संगीत प्रस्तुति से नीलेश मिसरा का स्वागत किया। इसके बाद एक विशेष ऑडियो-विज़ुअल प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से उनकी रचनात्मक यात्रा और विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों को प्रस्तुत किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्रों में उत्साह देखने को मिला और उन्होंने विभिन्न सत्रों में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
स्टोरीटेलिंग वर्कशॉप में छात्रों से साझा किए अनुभव
फ़ेस्टिवल के दौरान आयोजित स्टोरीटेलिंग वर्कशॉप में नीलेश मिसरा ने छात्रों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि किसी भी साधारण-सी घटना को संवेदनशील नज़रिए और प्रभावी प्रस्तुति के ज़रिए यादगार कहानी में बदला जा सकता है। उन्होंने कहानी कहने की प्रक्रिया, पात्रों के निर्माण और वास्तविक जीवन के अनुभवों को रचनात्मक रूप देने के तरीक़ों पर भी चर्चा की। छात्रों ने इस दौरान उनसे कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया।
फ़िल्ममेकिंग सत्र में सीखे कैमरे और कहानी के गुर
कार्यक्रम का अगला चरण फ़िल्ममेकिंग पर केंद्रित रहा। निर्देशक रितम नंदी और डीओपी अभिषेक वर्मा ने छात्रों के साथ फ़िल्म निर्माण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहानी के चयन, पटकथा, कैमरा एंगल, विज़ुअल ट्रीटमेंट और शूटिंग की प्रक्रिया को आसान उदाहरणों के माध्यम से समझाया। इस सत्र में छात्रों ने फ़िल्म निर्माण की तकनीकी और रचनात्मक दोनों पहलुओं की जानकारी हासिल की।
'कूद' और ‘द लास्ट बैट्समैन’ की स्क्रीनिंग के साथ जारी रहा फ़ेस्टिवल
फ़ेस्टिवल में नीलेश मिसरा की पहली फ़िल्म 'कूद' की स्क्रीनिंग आयोजित की गई जहाँ छात्रों ने बड़े पर्दे पर कहानी कहने की कला को क़रीब से अनुभव किया। फ़िल्म प्रदर्शन के बाद भी छात्रों और अतिथियों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहा। इसके अलावा उनकी अपकमिंग फिल्म ‘द लास्ट बैट्समैन’ की भी स्क्रीनिंग हुई। विश्वविद्यालय के अनुसार, दिनभर चलने वाले इस फ़ेस्टिवल में आगे भी कई रचनात्मक और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को साहित्य, संगीत और सिनेमा की दुनिया से जोड़ना है।