अगर नहीं बदला खेती का तरीका तो बढ़ सकती है खाद्य संकट की चुनौती, क्लाइमेट ग्रुप की चेतावनी
भारत के कृषि क्षेत्र और खाद्य उद्योग को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से बचाने के लिए तेजी से बदलाव और अनुकूलन की जरूरत है। क्लाइमेट ग्रुप की इंडिया एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दिव्या शर्मा ने कहा कि बढ़ती गर्मी, अनिश्चित मानसून और भूजल संकट अब खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह बात सिंगापुर में आयोजित क्लाइमेट ग्रुप एशिया एक्शन समिट और फिलैंथ्रॉपी एशिया समिट के दौरान कही।
बढ़ती गर्मी और अनिश्चित मानसून से खेती पर बढ़ा दबाव
दिव्या शर्मा ने कहा कि देश में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी, अनियमित मानसून और गंभीर भूजल संकट की वजह से कृषि और खाद्य क्षेत्र पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए अब तेजी से कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खेती और खाद्य क्षेत्र को जलवायु प्रभावों से बचाने के लिए केवल सरकार ही नहीं बल्कि किसानों, बड़ी कंपनियों, उद्योग संगठनों और निजी क्षेत्र सभी को मिलकर काम करना होगा।
टिकाऊ और कम उत्सर्जन वाले खाद्य उत्पादों पर जोर
क्लाइमेट ग्रुप के समर्थन से एक उद्योग आधारित गठबंधन तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टिकाऊ, पोषणयुक्त और कम कार्बन उत्सर्जन वाले खाद्य उत्पादों की मांग और आपूर्ति को बढ़ाना है। दिव्या शर्मा ने कहा कि यह गठबंधन विभिन्न उद्योग संगठनों और कंपनियों को एक मंच पर लाकर खाद्य क्षेत्र में तेजी से बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है। इसका मकसद ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देना है जो पर्यावरण पर कम असर डालें और भविष्य के लिए टिकाऊ साबित हों।
जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल भारत
क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स के अनुसार भारत जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में नौवें स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव का असर खेती, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा पर साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में खाद्य उत्पादन और किसानों की आय दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों में भारत की बड़ी प्रगति
दिव्या शर्मा ने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने में वैश्विक स्तर पर मजबूत नेतृत्व दिखाया है। उन्होंने कहा कि देश वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट बिजली नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पैदा करने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए वैश्विक सहयोग को भी मजबूत करने का प्रयास किया है। इससे यह साफ है कि भारत केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी जलवायु परिवर्तन से लड़ने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
इस्पात और सीमेंट उद्योग के सामने भी चुनौती
दिव्या शर्मा ने कहा कि भारत के इस्पात और सीमेंट उद्योगों के सामने भी कार्बन उत्सर्जन कम करने की बड़ी चुनौती है। देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए इन उद्योगों पर उत्पादन बढ़ाने का दबाव बना हुआ है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करना भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
2070 से पहले नेट जीरो लक्ष्य हासिल कर सकता है भारत
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को डीकार्बोनाइज करना बेहद जरूरी है। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि मौजूदा प्रगति को देखते हुए भारत वर्ष 2070 से पहले नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने की क्षमता रखता है।
16 साल से भारत में सक्रिय है क्लाइमेट ग्रुप
क्लाइमेट ग्रुप पिछले 16 वर्षों से भारत में काम कर रहा है और कई वैश्विक अभियानों के जरिए उद्योगों के साथ मिलकर जलवायु संबंधी पहलों को आगे बढ़ा रहा है। इनमें आरई100, ईवी100, स्मार्ट एनर्जी कोएलिशन, स्टील जीरो और कंक्रीट जीरो जैसे अभियान शामिल हैं।