CM Yogi: मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का होगा विस्तार, कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण पर ज़ोर

Mansi | Jul 31, 2026, 19:30 IST
किसान कल्याण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार कई नई योजनाएँ लेकर आ रही है। मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का फलक विस्तारित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इसे प्राप्त कर सकें। कृषि मंडियों को आधुनिक बनाया जाएगा और उत्पादन प्रक्रिया के लिए पीपीपी मॉडल के तहत नई इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी। किसानों की सुरक्षा के लिए दुर्घटना और अग्निकांड सहायता योजनाओं का कार्यकाल बढ़ाया गया है।
छात्रवृत्ति योजना का होगा विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि बाज़ारों को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 172वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें किसानों के हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए गए, ताकि अधिक से अधिक किसान परिवारों के बच्चों को इसका लाभ मिल सके।



इसके अलावा कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, पीपीपी (PPP) मॉडल पर कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, किसानों के लिए दुर्घटना और अग्निकांड सहायता योजनाओं की अवधि बढ़ाने, ई-नाम (e-NAM) प्लेटफ़ॉर्म के विस्तार और जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे कई अहम प्रस्तावों को मंज़ूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इन फ़ैसलों से किसानों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी, कृषि विपणन व्यवस्था मज़बूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।



मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का होगा विस्तार

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसान परिवारों के बच्चों तक इस योजना का लाभ पहुँचाना है, ताकि आर्थिक कारणों से उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। योजना के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में सहायता मिलेगी और किसान परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।



आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी कृषि मंडियाँ

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण और पुनरोद्धार पर विशेष ज़ोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में स्वच्छ पेयजल, बेहतर साफ़-सफ़ाई, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। इसका उद्देश्य किसानों और व्यापारियों के लिए अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित मंडी वातावरण तैयार करना है।



इसके साथ ही मंडियों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने पर भी बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने निवेश को आसान बनाने के लिए नियमों को और सरल करने के निर्देश दिए, ताकि निजी निवेश बढ़े, ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा हों और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।



मंडी परिषद की आय में दर्ज हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी

बैठक के दौरान मंडी परिषद की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा की गई। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, मंडी समितियों की आय में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15.79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में परिषद की आय 1,991.33 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,305.80 करोड़ रुपये हो गई।



इसके अलावा वर्ष 2026-27 के लिए 3,025.49 करोड़ रुपये के व्यय प्रावधान वाले बजट को भी मंज़ूरी दी गई। सरकार का कहना है कि इस बजट का उपयोग मंडियों के विकास, बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने और किसानों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने में किया जाएगा।



किसानों की सुरक्षा के लिए योजनाओं की अवधि बढ़ी

किसानों और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना तथा मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना की अवधि 30 जून 2030 तक बढ़ाने का फ़ैसला किया है। इन दोनों योजनाओं के लिए 30 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।



सरकार का मानना है कि दुर्घटना या खेत-खलिहान में आग लगने जैसी अप्रत्याशित घटनाओं के दौरान समय पर आर्थिक सहायता मिलने से प्रभावित किसान परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।



ई-नाम और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश की अधिक से अधिक कृषि मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (e-NAM) प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ा जाए। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए व्यापक बाज़ार मिलेगा, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी मज़बूत होगी।



साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक ज़िले में ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रमाणन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। सरकार राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने की दिशा में भी काम करेगी, ताकि टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती को प्रोत्साहन मिल सके।



दलहन और तिलहन खरीद को मिलेगी मज़बूती

बैठक में दलहन और तिलहन की खरीद व्यवस्था को मज़बूत बनाने के लिए सहकारी संस्थाओं को ब्याज मुक्त पूँजी उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इससे खरीद प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी, किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा और कृषि विपणन व्यवस्था और मज़बूत होगी।



कृषि क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की बैठक में लिए गए फ़ैसले यह संकेत देते हैं कि सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के साथ-साथ किसानों की शिक्षा, सुरक्षा और आय बढ़ाने पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है। मंडियों के आधुनिकीकरण, डिजिटल कृषि बाज़ार, जैविक खेती, कृषि प्रसंस्करण उद्योग, छात्रवृत्ति योजना और सहायता योजनाओं के विस्तार जैसे कदम किसानों के लिए दीर्घकालिक लाभ देने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।



यदि इन निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी और प्रदेश का कृषि क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी तथा आधुनिक बन सकेगा।

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