कपास की खेती पर सरकार का बड़ा दांव, गुजरात के किसानों को प्रति हेक्टेयर मिलेगी 14000 रुपये तक की मदद, यहाँ करें आवेदन
देश में कपास की खेती को अधिक लाभकारी बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। बढ़ती उत्पादन लागत और आयात पर निर्भरता के बीच अब सरकार आधुनिक खेती के ज़रिये कपास की पैदावार बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। इसी कड़ी में किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 'कपास उत्पादकता मिशन' (कपास क्रांति मिशन) शुरू किया है। गुजरात सरकार ने भी इस मिशन के तहत राज्य में कपास की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी तेज़ कर दी है। गुजरात के कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने बताया कि इस साल राज्य के लिए 134.80 करोड़ रुपये का बजट मंज़ूर किया गया है। मिशन के तहत राज्य के 21 कपास उत्पादक ज़िलों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
खेती के तरीक़े के आधार पर मिलेगी सहायता, एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर तक लाभ
कपास उत्पादकता मिशन के तहत किसानों को खेती की पद्धति के आधार पर दो श्रेणियों में इनपुट सहायता दी जाएगी। जो किसान 90 सेमी × 30 सेमी की क्लोज़र स्पेसिंग तकनीक अपनाकर कपास की खेती करेंगे, उन्हें प्रति हेक्टेयर 14,000 रुपये की सहायता मिलेगी। वहीं, 90 सेमी × 60 सेमी के रोपण पैटर्न के साथ एकीकृत फसल प्रबंधन (आईसीएम) पद्धति अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 7,500 रुपये की इनपुट सहायता दी जाएगी।
योजना के तहत एक किसान एक वर्ष में अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि के लिए ही सहायता का लाभ ले सकेगा। सहायता पाने के लिए किसानों को सरकार से अनुमोदित या प्रमाणित कपास की किस्मों अथवा स्वीकृत बीटी कपास के बीजों का उपयोग करना होगा। इसके साथ ही किसान पंजीकरण कराना भी अनिवार्य होगा।
पूरे साल होगा प्रशिक्षण, 10 जुलाई से शुरू हुए आवेदन
कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने बताया कि आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने और कपास की उत्पादकता बढ़ाने के लिए पूरे वर्ष विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। इन कार्यक्रमों के ज़रिये किसानों को नई खेती तकनीकों और बेहतर फसल प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। मिशन के तहत सहायता लेने के इच्छुक पात्र किसान 10 जुलाई 2026 से 'i-Khedut' पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
वाघानी ने 90 सेमी × 30 सेमी या 90 सेमी × 60 सेमी की रोपण पद्धति से कपास की खेती कर रहे किसानों और इस सीज़न में इन तकनीकों को अपनाने की योजना बना रहे किसानों से अपील की कि वे आई-खेदुत पोर्टल पर आवेदन कर इस योजना का लाभ उठाएँ।