Healthy Soil: मिट्टी में कार्बन कम हुआ तो घटेगी पैदावार, जानिए कैसी होनी चाहिए ‘स्वस्थ मिट्टी’
खेती की अच्छी पैदावार सिर्फ बीज और खाद पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि खेत की मिट्टी कितनी स्वस्थ है यह सबसे महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर मिट्टी में जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा में मौजूद हों तो फसल की वृद्धि अच्छी होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। लेकिन आज देश के कई हिस्सों में मिट्टी की सेहत धीरे-धीरे खराब होती जा रही है।
क्या होती है मिट्टी की सेहत, गुणवत्ता जाँचना क्यों जरूरी, मिट्टी में कार्बन का क्या रोल और कैसे सुधारें मिट्टी की सेहत जैसे सवालों को समझने के लिए गाँव कनेक्शन टीम पहुँची लखनऊ के CIMAP संस्थान, बजहाँ वैज्ञानिक राजेश वर्मा से अपने सवालों के जवाब जानने और समझने की कोशिश की।
मिट्टी में कार्बन की कमी बढ़ा रही चिंता
मिट्टी की सेहत के लिए सबसे जरूरी चीज जीवांश पदार्थ यानी ऑर्गेनिक कार्बन होता है। अगर किसी खेत की मिट्टी में कार्बन की मात्रा 0.5 प्रतिशत से कम है तो इसका मतलब है कि मिट्टी में जीवांश पदार्थ की कमी है और इससे अच्छी पैदावार मिलना मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले खेतों में गोबर की खाद, फसल के अवशेष और अन्य जैविक पदार्थ डाले जाते थे, जिससे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बनी रहती थी। लेकिन अब लगातार रासायनिक खादों के इस्तेमाल और फसल के अवशेष खेत में न छोड़ने की वजह से मिट्टी में कार्बन की मात्रा लगातार कम होती जा रही है।
मिट्टी के लिए जरूरी पोषक तत्व
फसल के अच्छे विकास के लिए मिट्टी में कुछ मुख्य पोषक तत्वों का होना जरूरी होता है। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अगर मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा 180 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से ज्यादा है तो मिट्टी को ठीक माना जाता है, जबकि 250 किलोग्राम के आसपास होने पर खेती के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है।
इसके अलावा कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व भी होते हैं जिनकी जरूरत कम मात्रा में होती है लेकिन फसल के विकास में इनकी भूमिका अहम होती है। इनमें जिंक, आयरन, मैंगनीज, कॉपर और कार्बन जैसे तत्व शामिल हैं।
क्यों घट रही है मिट्टी की उर्वरता?
पहले किसान फसल कटाई के बाद बचा हुआ अवशेष खेत में ही सड़ा देते थे। इससे मिट्टी में जीवांश पदार्थ बना रहता था। लेकिन अब अधिक उत्पादन लेने की होड़ और लगातार खेती करने की वजह से फसल अवशेषों को खेत में सड़ने का समय नहीं मिल पाता।
इसके अलावा देश में पशुओं की संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है, जिससे गोबर की खाद जैसी प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल भी कम हो गया है। इसके साथ-साथ किसान ज्यादा उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों का अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं। कई बार ये खाद असंतुलित मात्रा में डाली जाती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
मिट्टी की सेहत कैसे पता करें?
किसी भी खेत की मिट्टी की उर्वरता जानने के लिए मिट्टी की जाँच कराना सबसे जरूरी होता है। इसमें सबसे पहले मिट्टी का पीएच यानी उसका स्वभाव देखा जाता है कि वह अम्लीय है, क्षारीय है या सामान्य है।
इसके बाद मिट्टी में मौजूद जीवांश पदार्थ, नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा की जांच की जाती है। साथ ही जिंक, आयरन, मैंगनीज और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जांच की जाती है। इन सभी परीक्षणों के आधार पर खेत का सोइल हेल्थ कार्ड तैयार किया जाता है।
कैसे सुधारी जा सकती है मिट्टी की सेहत
विशेषज्ञ के मुताबिक अगर किसान मिट्टी की जाँच के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें और इसके साथ जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और बायोफर्टिलाइजर का उपयोग करें तो मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है।
इसके अलावा फसल अवशेषों को खेत में मिलाना, संतुलित खाद का इस्तेमाल करना और जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाना मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। जब मिट्टी स्वस्थ रहेगी तभी फसल भी अच्छी होगी और किसानों को बेहतर उत्पादन मिल सकेगा।