बंगाल की खाड़ी में उठ रहा तूफान बना मानसून की रफ्तार में रुकावट! केरल में देरी से दस्तक दे सकता है मानसून
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत को लेकर अब मौसम की स्थिति बदलती नजर आ रही है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे संभावित तूफान और ऊपरी वातावरण में जरूरी सिस्टम कमजोर पड़ने से केरल में मानसून की सामान्य एंट्री में देरी हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून फिलहाल श्रीलंका के आसपास अटका हुआ है और उसे आगे बढ़ाने वाली समुद्री हवाओं की मजबूत प्रणाली अभी विकसित नहीं हो पाई है।
केरल पहुंचने में क्यों हो रही देरी?
आमतौर पर मानसून को केरल तक तेजी से पहुंचाने में समुद्र के ऊपर बनने वाला एक मजबूत चक्रवाती सर्कुलेशन मदद करता है, लेकिन इस बार ऐसा सिस्टम महीने के आखिर तक बनने की संभावना कम दिखाई दे रही है। इसी वजह से मानसून की मुख्य धारा फिलहाल कमजोर बनी हुई है और उसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है।
MJO सिस्टम के कमजोर पड़ने का असर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून को ताकत देने वाला मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन यानी MJO फिलहाल हिंद महासागर से निकलकर पश्चिमी प्रशांत महासागर की ओर चला गया है। यह एक ऐसा उष्णकटिबंधीय सिस्टम होता है जो बादल, बारिश और नमी को आगे बढ़ाने में मदद करता है। इसके कमजोर पड़ने से अरब सागर शाखा वाले मानसून की गति पर असर पड़ा है।
बंगाल की खाड़ी में बन सकता है तूफान
वैश्विक मौसम मॉडल्स के अनुसार पूर्वी बंगाल की खाड़ी में जल्द ही कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है, जो आगे चलकर तूफान का रूप ले सकता है। इसके म्यांमार और बांग्लादेश की ओर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सिस्टम की वजह से मानसून की सामान्य प्रगति प्रभावित हो रही है।
IMD ने क्या कहा?
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक केरल में मानसून की “क्लासिकल ऑनसेट” स्थिति 5 जून से पहले बनती नहीं दिख रही है। यानी मानसून की आधिकारिक एंट्री सामान्य से कुछ देरी से हो सकती है।
किन राज्यों में बारिश की संभावना?
यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF के अनुसार 1 जून से 8 जून के बीच केरल, तटीय कर्नाटक, तटीय तमिलनाडु और दक्षिण आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। इसके बाद 8 जून से 15 जून के बीच बारिश का दायरा आंध्र प्रदेश से ओडिशा और पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ सकता है।
मानसून की शुरुआती रफ्तार कमजोर पड़ने के संकेत
मौसम मॉडल्स यह भी संकेत दे रहे हैं कि जून के मध्य के बाद मानसून की शुरुआती रफ्तार फिर कमजोर पड़ सकती है। यानी जिन इलाकों में शुरुआत में अच्छी बारिश होगी, वहां बाद में कुछ समय के लिए बारिश कम हो सकती है।
कृषि पर पड़ सकता है असर
मानसून की देरी और कमजोर शुरुआत का असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ सकता है। खासकर धान, दालें और तिलहन जैसी फसलों की खेती मानसून पर काफी निर्भर रहती है। ऐसे में किसान अब मौसम की अगली अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।